सुंदर पिचाई की सैलरी जानकर रह जाएंगे दंग, मिलेंगे 6361 करोड़ रुपये!
गूगल ने अपने सीईओ सुंदर पिचाई के कुल संभावित पैकेज को अगले तीन वर्षों के लिए बढ़ाकर 692 मिलियन डॉलर यानी करीब 6,361 करोड़ रुपये कर दिया है। इस भारी-भरकम पैकेज के साथ वह दुनिया के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले चीफ एक्जीक्यूटिव में से एक बन गए हैं।

गूगल ने अपने सीईओ सुंदर पिचाई के कुल संभावित पैकेज को अगले तीन वर्षों के लिए बढ़ाकर 692 मिलियन डॉलर यानी करीब 6,361 करोड़ रुपये कर दिया है। इस भारी-भरकम पैकेज के साथ वह दुनिया के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले चीफ एक्जीक्यूटिव में से एक बन गए हैं।
अमेरिकी शेयर बाजार नियामक एसईसी के पास दायर एक दस्तावेज के मुताबिक, पिचाई के इस पैकेज का एक बड़ा हिस्सा परफॉरमेंस स्टॉक यूनिट्स यानी पीएसयू के रूप में है। इनकी कीमत 126 मिलियन डॉलर आंकी गई है, जिसे दो बराबर हिस्सों में बांटा गया है। ये स्टॉक अवॉर्ड पूरी तरह से कंपनी के प्रदर्शन से जुड़े हैं, यानी इनकी अंतिम कीमत इस बात पर निर्भर करेगी कि गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट अपने शेयरधारकों के लिए कितना बेहतर प्रदर्शन करती है।
मस्क के सैलरी पैकेज ने सुर्खियां बटोरी थीं
बता दें कि कुछ समय पहले एलन मस्क के सैलरी पैकेज ने भी दुनियाभर में सुर्खियां बटोरी थीं। नवंबर 2025 में टेस्ला के शेयरधारकों ने सीईओ मस्क के लिए एक पेमेंट योजना को मंजूरी दी थी, जिसकी अगले 10 वर्षों में कीमत 1 ट्रिलियन डॉलर तक हो सकती है।
कंपनी के प्रदर्शन पर टिका है ‘इनाम’
पिचाई को दिए जाने वाले ये पीएसयू गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट के कुल शेयरधारक रिटर्न की तुलना एसएंडपी 100 इंडेक्स में शामिल दूसरी कंपनियों के प्रदर्शन से करके तय किए जाएंगे। अगर अल्फाबेट का प्रदर्शन अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी बेहतर रहता है, तो पीएसयू की राशि से दोगुना यानी 252 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, लेकिन अगर कंपनी का प्रदर्शन पीछे रह जाता है, तो यह पेमेंट घटकर शून्य भी हो सकता है।
इसके अलावा, भारतीय मूल के इस सीईओ को अगले तीन सालों में 84 मिलियन डॉलर के प्रतिबंधित स्टॉक भी मिलेंगे, जो कंपनी में उनके बने रहने पर लगभग मासिक आधार पर उनके खाते में आते रहेंगे। इसके साथ ही उन्हें सालाना 2 मिलियन डॉलर का वेतन भी मिलता रहेगा।
सेल्फ-ड्राइविंग कार और ड्रोन से भी कमाई का रास्ता
पिचाई के इस वेतन पैकेज में दो नए स्टॉक इंसेंटिव भी जोड़े गए हैं, जिनकी कीमत 350 मिलियन डॉलर तक हो सकती है। ये इंसेंटिव गूगल की सेल्फ-ड्राइविंग टैक्सी सेवा वेन्मो और ड्रोन डिलीवरी स्टार्टअप विंग के विकास से जुड़े हैं। अगले तीन सालों में पिचाई को वेन्मो के शेयर 130 मिलियन डॉलर और विंग एविएशन के स्टॉक 45 मिलियन डॉलर के टार्गेटेड प्राइस पर मिलेंगे।
यह राशि उनके 'उचित मूल्य' के आधार पर तय की गई है। यहां भी यही शर्त है कि अगर इन कारोबारों से जुड़े टार्गेट हासिल होते हैं या उनसे बेहतर प्रदर्शन होता है, तो यह भुगतान टार्गेट अमाउंट से 200% तक जा सकता है। ऐसी स्थिति में सीईओ को स्टॉक और सैलरी के रूप में 391 मिलियन डॉलर की आधार राशि के साथ अधिकतम 692 मिलियन डॉलर तक मिल सकते हैं।
गूगल की चमक से बढ़ी पिचाई की संपत्ति
सुंदर पिचाई ने अगस्त 2015 में गूगल के सीईओ का पदभार संभाला था। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, तब से कंपनी का मार्केट कैप करीब सात गुना बढ़कर 535 अरब डॉलर से 3.6 ट्रिलियन डॉलर हो गया है, जो जनवरी में एक समय 4 ट्रिलियन डॉलर के पार भी पहुंच गया था।
कंपनी के वैल्यूएशन में इस तेज उछाल ने 53 वर्षीय पिचाई की निजी संपत्ति में भी इजाफा किया है, जो पूर्व में मैकिन्से में सलाहकार रह चुके हैं। फोर्ब्स पत्रिका के अनुसार, उनकी मौजूदा कुल संपत्ति 1.5 बिलियन डॉलर है, जिसके साथ वह अरबपतियों की सूची में शामिल हो गए हैं।
नियामकीय फाइलिंग के मुताबिक, पिचाई और उनकी पत्नी अंजलि के पास संयुक्त रूप से 1.67 मिलियन गूगल शेयर हैं, जिनकी कीमत कंपनी के शुक्रवार के बंद भाव 298 डॉलर के हिसाब से 498 मिलियन डॉलर आंकी गई है।
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


