मॉर्गन स्टेनली से विश्व बैंक तक...भारत की इकोनॉमी पर किसके क्या हैं अनुमान
ग्लोबल टेंशन के बीच विश्व बैंक, वैश्विक संगठन मॉर्गन स्टेनली समेत कई रेटिंग एजेंसियों ने देश की इकोनॉमी को लेकर अपने अनुमान जताए हैं। वहीं, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने भी जीडीपी को लेकर अपने अनुमान बताए हैं।

विश्व बैंक ने बुधवार को वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि के अपने अनुमान को 30 आधार अंक बढ़ाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया। यह अक्टूबर 2025 के उसके 6.3 प्रतिशत के अनुमान से ज्यादा है। बैंक ने इसका कारण मजबूत घरेलू आर्थिक गतिविधियों को बताया है। हालांकि उसे उम्मीद है कि एनर्जी की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई थोड़ी बढ़ सकती है।
आरबीआई का अनुमान
चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर यानी जीडीपी ग्रोथ को 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है जो वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनुमानित 7.6 प्रतिशत से कम है। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि प्रमुख समुद्री मार्गों में व्यवधान एवं इसके कारण ढुलाई तथा बीमा लागत में वृद्धि से माल निर्यात पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, सर्विस सेक्टर की मजबूती, जीएसटी की दरों में बदलाव का असर, मैन्युफैक्चरिंग में क्षमता उपयोग में वृद्धि के अलावा वित्तीय संस्थानों एवं कंपनियों के मजबूत बही-खाते घरेलू मांग को समर्थन देंगे। आरबीआई के अनुसार, पहली तिमाही में वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 6.7 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 7.0 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 7.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
मॉर्गन स्टेनली का अनुमान
वैश्विक संगठन मॉर्गन स्टेनली ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी में वृद्धि के अनुमान को प्रतिशत 0.30 अंक घटाकर 6.2 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले संगठन ने 6.5 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान लगाया था। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि 2026-27 में कच्चे तेल की औसत कीमत 95 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रहेगी तथा गैस की उपलब्धता एक अतिरिक्त बाधा होगी।
मॉर्गन स्टेनली की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि ईंधन की बढ़ती कीमत और औद्योगिक आपूर्ति में कमी से उत्पादन के संसाधनों की लागत बढ़ रही हैं और चुनिंदा वस्तुओं के उत्पादन में कटौती करनी पड़ रही है। रुपये की कमजोरी के बीच आयातित महंगाई बढ़ रही है। इसके अलावा, रेटिंग एजेंसी इक्रा ने अनुमान लगाया है कि ऊर्जा की ऊंची कीमतों के प्रतिकूल प्रभाव के कारण वित्त वर्ष 2026- 27 में भारत की वृद्धि धीमी होकर 6.5 प्रतिशत रह सकती है।
मूडीज रेटिंग्स ने क्या कहा?
बीते दिनों मूडीज रेटिंग्स ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को 6.8 प्रतिशत से घटाकर छह प्रतिशत कर दिया है। रेटिंग एजेंसी ने कहा है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण भारत की वृद्धि की रफ्तार घटेगी और इससे महंगाई का जोखिम भी बढ़ेगा।
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