सोना-FD छोड़ अब शेयर बाजार में निवेश कर रही हैं महिलाएं, जानिये कारण
मुख्य बातें
- भारतीय महिलाओं को हमेशा से सेविंग करने में माहिर माना जाता रहा है
- पहले ज्यादातर महिलाएं अपनी सेविंग सोने, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या सेविंग खाते तक ही सीमित रखती थीं
- लेकिन अब तस्वीर बदल रही है

भारतीय महिलाओं को हमेशा से सेविंग करने में माहिर माना जाता रहा है। पहले ज्यादातर महिलाएं अपनी सेविंग सोने, फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) या सेविंग खाते तक ही सीमित रखती थीं। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। महिलाएं सिर्फ पैसे बचाने पर नहीं, बल्कि उसे बढ़ाने पर भी ध्यान दे रही हैं। यही वजह है कि बड़ी संख्या में महिलाएं अब शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश कर रही हैं।
शेयर बाजार में निवेश बढ़ा रहीं महिलाएं
महिलाओं में निवेश को लेकर यह बदलाव पिछले कुछ सालों में तेजी से आई है। इसकी सबसे बड़ी वजह आर्थिक आत्मनिर्भरता, बेहतर शिक्षा, डिजिटल प्लेटफॉर्म की आसान पहुंच और फाइनेंशियल जागरूकता है। अब महिलाएं अपनी कमाई का फैसला खुद ले रही हैं और लंबे समय में बेहतर रिटर्न के लिए इक्विटी जैसे निवेश विकल्प चुन रही हैं।
क्रिसिल इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2019 में महिलाओं के म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो का 43.3 फीसदी हिस्सा इक्विटी में था। मार्च 2024 तक यह बढ़कर 63.7 फीसदी पहुंच गया। वहीं डेट निवेश का हिस्सा 22.6 फीसदी से घटकर 10.7 फीसदी रह गया। यानी महिलाएं अब कम रिटर्न वाले पारंपरिक निवेश की जगह ज्यादा रिटर्न देने वाले विकल्पों की ओर बढ़ रही हैं।
युवा महिलाएं इस बदलाव की अगुवाई कर रही हैं। 25 से 44 साल की महिलाओं का इक्विटी में निवेश सबसे ज्यादा 75.6 फीसदी है। वहीं 25 साल से कम उम्र की महिलाओं का इक्विटी निवेश भी 69.3 फीसदी तक पहुंच चुका है।
रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2026 तक महिलाओं का म्यूचुअल फंड निवेश बढ़कर 11.3 ट्रिलियन रुपये हो गया, जो एक साल पहले के मुकाबले 13 फीसदी ज्यादा है। महिलाओं के कुल पोर्टफोलियो में 82 फीसदी हिस्सा इक्विटी और हाइब्रिड फंड का है, जबकि डेट निवेश सिर्फ 9 फीसदी रह गया है।
एसआईपी ने निभाया बड़ा रोल
एसआईपी ने भी इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभाई है। हर महीने छोटी रकम से निवेश की सुविधा मिलने के कारण पहली बार निवेश करने वाली महिलाओं का भरोसा बढ़ा है। साथ ही मोबाइल ऐप और ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म ने पूरी प्रक्रिया को पहले से काफी आसान बना दिया है। अब महिलाओं का मकसद सिर्फ पैसे बचाना नहीं, बल्कि घर खरीदना, बच्चों की पढ़ाई, रिटायरमेंट और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा जैसे बड़े टारगेट पूरा करना है। यही वजह है कि निवेश को लंबे समय की रणनीति के तौर पर देख रही हैं।


