LPG सिलेंडर के लिए फिर लगानी पड़ेगी लाइन? क्या आने वाला है बड़ा संकट?
मुख्य बातें
- LPG Supply Updates: एक आम आदमी को रसोई गैस की चिंता सताने लगी है कि कहीं सिलेंडर की किल्लत न शुरू हो जाए
- पिछली बार जंग शुरू होने के बाद एलपीजी सिलेंडर के लिए गैस गोदामों और एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें दिखने लगी थीं

ईरान और अमेरिका के बीच जंग का मैदान अब होर्मुज स्ट्रेट हो गया है। इस वजह से वहां से तेल और गैस से लदे जहाज निकल नहीं पा रहे हैं। ऐसे में एक आम आदमी को रसोई गैस की चिंता सताने लगी है कि कहीं सिलेंडर की किल्लत न शुरू हो जाए। पिछली बार जंग शुरू होने के बाद शहर से लेकर गांव-गांव तक एलपीजी सिलेंडर के लिए गैस गोदामों और एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें दिखने लगी थीं।
बता दें अब आपको घबराने की कोई जरूरत नहीं है। जंग से पहले भारत के LPG आयात का 90% इसी रास्ते से होता था, लेकिन अब यह सिर्फ एक छोटा हिस्सा रह गया है। वहीं, अब अमेरिका के अलावा कई देशों से एलपीजी आ रही है। होर्मुज स्ट्रेट पर भारत की निर्भरता घटी है।
रोजाना 37,000-38,000 मीट्रिक टन LPG बना रहा है भारत
भारत अभी रोजाना 37,000-38,000 मीट्रिक टन LPG बना रहा है। अब देश के रिफाइनरियों का लक्ष्य इसमें करीब 4,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन यानी 10% से ज्यादा का इजाफा करना है। द इकनॉमिक टाइम्स के सूत्रों के मुताबिक, "फिलहाल स्टॉक ठीक है। होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई आ रही है, लेकिन यह रास्ता अब भरोसेमंद नहीं रहा। अगर एक हफ्ते के लिए भी यह रास्ता बंद हो जाए, तो फिर मुश्किल खड़ी हो सकती है।"
आयात में कमी की भरपाई ज्यादातर घरेलू उत्पादन से
आयात में कमी की भरपाई ज्यादातर घरेलू उत्पादन बढ़ाकर और खपत घटाकर की गई। पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में घरेलू LPG खपत सालाना आधार पर 17% कम रही। घरों, कमर्शियल यूजर और उद्योग, सभी प्रभावित हुए। उद्योगों की थोक LPG खपत सबसे ज्यादा घटी, जो जुलाई में करीब 80% गिर गई।
अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे के जहाजों पर हमले तेज किए
पिछले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे के जहाजों पर हमले तेज कर दिए हैं, जिससे होर्मुज से आवागमन सामान्य होने की उम्मीदें कम हो गई हैं। यह जलमार्ग बेहद अहम है।
जंग शुरू होने (28 फरवरी) से पहले दुनिया की करीब 20 फीसद कच्चे तेल और गैस की सप्लाई इसी से गुजरती थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को संकेत दिया कि नवंबर में अमेरिकी मध्यावधि चुनावों तक तेल की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं।
खपत और आयात में गिरावट
ईरान जंग शुरू होने के बाद से भारत का LPG आयात और खपत, दोनों काफी घट गए हैं। अगस्त में आयात 25% गिरकर 14.5 लाख टन रह गया, हालांकि यह इस दौर का सबसे अधिक मासिक आंकड़ा है।
Vortexa के वरिष्ठ तेल बाजार विश्लेषक रोहित राठौड़ ने कहा, "दुनिया में LPG की पर्याप्त सप्लाई उपलब्ध नहीं है। अगस्त में वैश्विक समुद्री LPG निर्यात फरवरी 2026 के स्तर से करीब 6 लाख मीट्रिक टन और पिछले साल से करीब 12.5 लाख मीट्रिक टन कम रहा।"
कुछ उद्योग अधिकारियों का मानना है कि इस कमी की एक वजह पाइप्ड नेचुरल गैस, डीजल या लकड़ी की ओर रुख करना है, जबकि कुछ अनौपचारिक सप्लाई कटौती और मांग नष्ट होने की बात कहते हैं।
उत्पादन का उतार-चढ़ाव
भारत ने जंग से पहले के करीब 36,000 टन प्रतिदिन से मई में उत्पादन बढ़ाकर 54,000 टन प्रतिदिन के शिखर तक पहुंचाया था। इसके लिए पेट्रोकेमिकल्स जैसे दूसरे उत्पादों को दिए जाने वाले इनपुट में कटौती की गई।
लेकिन, जब प्लास्टिक और अन्य सामग्रियों की कमी दिखने लगी, तो LPG उत्पादन घटा दिया गया। अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बाद होर्मुज से माल ढुलाई आसान होने पर जुलाई में उत्पादन महीने-दर-महीने 19% गिरकर 12 लाख टन रह गया। जून में औसत उत्पादन करीब 50,000 टन प्रतिदिन था।


