क्या इस बार वॉर का LPG की सप्लाई पर नहीं होगा असर, मोदी सरकार ने ऐसा क्या कर दिया?

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मुख्य बातें

  • LPG Supply: होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बावजूद भारत में एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई निर्बाध जारी है
  • आखिर मोदी सरकार ने ऐसा क्या किया कि आम उपभोक्ता सुकून से हैं? क्रिसिल इंटेलिजेंस की नई रिपोर्ट क्या कह रही?
lpg price supply booking

पश्चिम एशिया में जारी नया संघर्ष का असर रसोई गैस (LPG) की सप्लाई पर बहुत अधिक नहीं पड़ने वाला है। मार्च से मई तक एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई निर्बाध जारी रखने के लिए मोदी सरकार ने कई कड़े फैसले किए थे। कुछ खास के लिए छोड़ कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पर अंकुश लगाने से लेकर घरेलू सिलेंडर की बुकिंग और डिलीवरी को लेकर नियम सख्त किए गए।

पैनिक बाइंग के चलते गैस एजेंसियों के बाहर उभाक्ताओं की लाइनें आम हो गईं। इस बार युद्ध के हालात पहले से अधिक भयकंर हो गए हैं। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बावजूद भारत में एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई निर्बाध जारी है। आखिर मोदी सरकार ने ऐसा क्या किया कि आम उपभोक्ता सुकून से हैं?

क्रिसिल इंटेलिजेंस की नई रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने कुछ ही महीनों में अपनी LPG आयात रणनीति बदल दी है। पहले जहां भारत अपनी लगभग 90% आयातित LPG मध्य-पूर्व के देशों से खरीदता था, वहीं अब अमेरिका, ईरान और कई यूरोपीय देशों से भी बड़ी मात्रा में गैस मंगाई जा रही है।

अमेरिका बना बड़ा सप्लायर

रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 2026 में भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़कर लगभग 32% हो गई, जबकि फरवरी 2026 में यह केवल 8% थी। भारत ने 2025 के अंत में अमेरिका के साथ 22 लाख टन प्रति वर्ष LPG आपूर्ति का समझौता किया था, जिसका फायदा अब मिल रहा है। इसके अलावा ईरान ने भी भारत को फिर से LPG की आपूर्ति शुरू की है। अर्जेंटीना, चिली, फ्रांस और नीदरलैंड जैसे देशों से भी गैस खरीदी जा रही है।

कोलकाता में एक LPG डिलीवरी करने वाला व्यक्ति ब्राजीलियाई फ़ुटबॉल खिलाड़ियों के एक बड़े पोस्टर के पास से गुज़र रहा है।

गैस की खपत में आई गिरावट

पश्चिम एशिया संकट के कारण आपूर्ति प्रभावित होने से भारत में LPG की खपत भी कम हुई। फरवरी 2026 में जहां कुल खपत 32 लाख टन थी, वह अप्रैल में घटकर 24.7 लाख टन रह गई। मार्च और अप्रैल में खपत सालाना आधार पर 13% घटी, जबकि मई में इसमें 20% की गिरावट दर्ज की गई।

होटल और उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित

रिपोर्ट बताती है कि पिछली बार युद्ध के दौरान सबसे अधिक असर होटल, रेस्तरां और औद्योगिक क्षेत्रों पर पड़ा। इन क्षेत्रों में LPG की मांग घरेलू उपभोक्ताओं की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से घटी। इसका कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेज बढ़ोतरी और सप्लाई में अनिश्चितता रहा।

एलपीजी की किल्लत की अफवाह के चलते एजेंसियों पर भीड़ लगने लगी थी।

घरेलू सिलेंडर के दाम कम बढ़े, कमर्शियल गैस हुई महंगी

फरवरी से जून 2026 के बीच अंतरराष्ट्रीय LPG कीमतों में 46% तक उछाल आया। इसके बावजूद दिल्ली में 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत केवल लगभग 10% बढ़कर ₹853 से ₹942 हुई। दूसरी ओर 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत 79% बढ़कर ₹1,741 से ₹3,114 तक पहुंच गई।

तेल कंपनियों पर ₹22,000 करोड़ का बोझ

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार और तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने घरेलू उपभोक्ताओं पर कीमतों का पूरा बोझ नहीं डाला। इसका नतीजा यह हुआ कि मार्च से मई 2026 के बीच घरेलू LPG पर तेल कंपनियों को लगभग ₹22,000 करोड़ की अंडर-रिकवरी (लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर) झेलनी पड़ी। केवल मई 2026 में दिल्ली में एक घरेलू सिलेंडर पर यह अंतर करीब ₹651 तक पहुंच गया।

आगे क्या होगा?

क्रिसिल का कहना है कि पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से LPG की वैश्विक कीमतों और सप्लाई पर दबाव घट सकता है। हालांकि, इस संकट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत को भविष्य में किसी एक क्षेत्र पर निर्भर रहने के बजाय कई देशों से LPG खरीदने की रणनीति अपनानी होगी, ताकि भू-राजनीतिक संकटों का असर कम किया जा सके।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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