पेट्रोल-डीजल के बढ़ेंगे दाम? एक्सपर्ट्स की चेतावनी, '150 डॉलर तक जाएगा कच्चा तेल'
मुख्य बातें
- ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जबकि विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर हालात नहीं सुधरे तो कच्चा तेल 110 से 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है, जिसका सीधा असर भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों पर पड़ सकता है

आने वाले दिनों में अगर पेट्रोल-डीजल के दाम में उछाल देखने को मिले तो उछलिएगा नहीं, क्योंकि ईरान-अमेरिका की युद्ध की आग में कच्चे तेल की किमतें रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंच सकती हैं। ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जबकि विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अगर हालात नहीं सुधरे तो कच्चा तेल 110 से 150 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकता है, जिसका सीधा असर भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों पर पड़ सकता है।
सोमवार को तेल की कीमतों में 4 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई। इस वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। 13 जुलाई को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 3.34 डॉलर (4.38%) बढ़कर 79.50 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 3.07 डॉलर (4.30%) चढ़कर 74.20 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
यह ताजा उछाल ऐसे समय आया है जब पिछले सप्ताह दोनों बेंचमार्क 5.5 प्रतिशत चढ़े थे और डब्ल्यूटीआई एक बार फिर 74 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है। वहीं, सप्ताहांत के बाद बाजार खुलने पर यूरोपीय प्राकृतिक गैस फ्यूचर्स में भी 2.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
क्या तेल 150 डॉलर तक जाएगा?
हालिया बढ़ोतरी ने साल के अंत तक दुनिया के खाली हो रहे तेल भंडार को फिर से भरने के प्रयासों को खतरे में डाल दिया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने शुक्रवार को जारी बयान में यह बात कही थी, जो इन ताजा हमलों से पहले आया था। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज व्यापारिक आवाजाही के लिए खुला है, लेकिन ईरान ने एक जहाज पर हमले के बाद इस जलमार्ग को बंद घोषित कर दिया था।
इस ताजा घटनाक्रम ने पिछले महीने साइन हुए अंतरिम समझौते के भविष्य पर भी बादल मंडरा दिए हैं, जो 60 दिनों की और बातचीत के बाद संघर्ष समाप्त करने की कोशिश कर रहा था। आईईए की मासिक रिपोर्ट के अनुसार, समझौते के बाद जून में ग्लोबल ऑयल सप्लाई में 4.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन की वृद्धि हुई, फिर भी उत्पादन युद्ध-पूर्व स्तरों से 9.4 मिलियन बैरल प्रतिदिन कम था। एनालिस्टों के अनुसार बाजार में तनाव बना हुआ है।
नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज का कहना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय तक बंद रहता है, तो करीब 20 मिलियन बैरल प्रतिदिन के क्रूड फ्लो पर असर पड़ सकता है, ऐसे में तेल की कीमतें 110 से 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
एसईबी के मुख्य कमोडिटी विश्लेषक का मानना है कि वर्तमान बाजार परिस्थितियों में 70 डॉलर की बजाय 80 डॉलर प्रति बैरल का भाव अधिक उचित है।
समझौते के बाद फिर बिगड़े हालात, ईरान ने बढ़ाई कार्रवाई
सप्ताहांत के दौरान तेहरान ने अपनी हड़ताल को कतर और संयुक्त अरब अमीरात तक बढ़ा दिया, जबकि अमेरिका ने ईरान पर हमलों का एक और दौर किया। यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े जवाबी हमलों में सबसे ताजा वृद्धि है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसने रविवार शाम 5 बजे नए हमले किए, जिसका मकसद होर्मुज से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर हमलों के लिए ईरान को जवाबदेह ठहराना था। गौरतलब है कि पिछले महीने फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिका और ईरान के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के बाद तेल की कीमतों ने ईरान संघर्ष से पहले की सारी बढ़त गंवा दी थी। उस समझौते में संघर्ष समाप्त करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के प्रावधान शामिल थे।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


