सोने का भाव ₹1.30 लाख के आएगा नीचे या जाएगा ₹2 लाख के पार?
मुख्य बातें
- Gold Silver Rates Today: WGC ने चेतवानी दी है कि आने वाले दिनों में गोल्ड 3500 डॉलर प्रति औंस तक गिर सकता है
- वहीं अजय केडिया का दावा है कि इस साल तो सोना 1.70 से 1.80 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है, लेकिन साल-डेढ़ साल में अगर यह 2 लाख के पार भी जा सकता है

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की मानें तो सोने में निवेश करने वालों के लिए डराने और गहने खरीदने वालों को डराने वाली खबर है। जबकि, केडिया कमोडिटिज के प्रेसीडेंट अजय केडिया की मानें तो ठीक इसके उल्टा है। केडिया के अनुमान सोने के गहने खरीदने वालों के लिए डराने वाले और निवेश करने वालों को खुश करने वाले हैं। आइए समझते हैं कैसे...
सबसे पहले बात वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की चेतावनी की। WGC ने चेतवानी दी है कि आने वाले दिनों में गोल्ड 3500 डॉलर प्रति औंस तक गिर सकता है। जनवरी में हाई से 37 प्रतिशत नीचे तक सोने का भाव गिर सकता है। अगर इंटरनेशनल मार्केट में सोना 3857 डॉलर प्रति औंस के लेवल को तोड़ता है तो निवेश कर चुके लोगों के लिए काफी नुकसान उठाना पड़ सकता है जबकि, सस्ता सोना खरीदने का इंतजार करने वालों लोगों के लिए बल्ले-बल्ले जैसी स्थिति है।
अगर 3500 डॉलर के आसपास सोने के भाव आ जाते हैं तो यह करीब 1.30 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ जाएगा। बता दें सोने को ट्रैक करने वाली दुनिया की सबसे बड़ी एजेंसी वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल है। बता दें जनवरी में सोना 5700 डॉलर के आसपास था।
जापान के येन मजबूत होने से सोने को सपोर्ट मिल सकता है। शायद इससे सोने में गिरावट थम जाए। क्योंकि डॉलर जितना कमजोर होगा, सोना उतना ही उछलेगा। अगर डॉलर मजबूत होगा तो सोना गिरेगा। शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग वालों के लिए सोने में पैसा लगाना घाटे का सौदा हो सकता है। फिल सोने में खरीद का माहौल नहीं दिख रहा है।
फिलहाल सोना अभी 4300 डॉलर प्रति औंस से ऊपर है। कच्चे तेल की कीमतें अगर कम होती हैं और महंगाई पर लगाम लगाता है तो ब्याज दरें भी कम होंगी और तब सोने को सपोर्ट मिलेगा।
2 लाख के पार क्यों जा सकता है सोना
अब आते हैं उस खबर पर जो अभी सोना नहीं खरीदने वालों की होश उड़ाने वाली खबर पर। केडिया कमोडिटिज के प्रेसीडेंट अजय केडिया ने दावा किया है कि इस साल तो सोना 1.70 से 1.80 लाख रुपसे प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है, लेकिन साल-डेढ़ साल में अगर यह 2 लाख के पार भी जा सकता है।
उन्होंने इसके पीछे डी-डॉलराइजेशन को महत्वपूर्ण कारण माना है। अगर इंटरनेशनल मार्केट में सोना 4300 डॉलर प्रति औंस पर टिक जाता है तो यह 4600 डॉलर तक पहुंच सकता है। डेढ़ साल में 6000 डॉलर तक पहुंच सकता है।
सोने के आज के भाव
एमसीएक्स पर सोना अक्टूबर वायदा 1,51,870 रुपये प्रति 10 ग्राम पर स्थिर था, जबकि एमसीएक्स चांदी का सितंबर वायदा 0.90 प्रतिशत की तेजी के साथ 2,33,532 रुपये प्रति किलोग्राम पर था।
सोने की कीमत $4,316 प्रति औंस के पार, नई ऊंचाई पर
चीनी बैंक के आंकड़े जारी होने के बाद इंटरनेशनल मार्केट में स्पॉट गोल्ड 1.8% चढ़कर $4,316 प्रति औंस पर पहुंच गया, जो जून के बाद का सबसे उच्च स्तर है। इस महीने सोने की कीमतों में लगातार तेजी देखी जा रही है।
जुलाई में चीन ने 20 टन सोना खरीदा, 2023 के बाद सबसे बड़ी खरीदारी
चीन के केंद्रीय बैंक (पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना) ने जुलाई महीने में अपने सोने के भंडार में 640,000 औंस (करीब 20 टन) की बढ़ोतरी की है। यह लगातार 21वां महीना है जब चीन ने सोने की खरीदारी की है। जून में चीन ने करीब 15 टन सोना खरीदा था, लेकिन जुलाई की यह खरीदारी अक्टूबर 2023 के बाद सबसे बड़ी है।
ईरान-अमेरिका समझौते की उम्मीद से मिला सोने को सपोर्ट
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, होर्मुज को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की खबरों से सोने की कीमतों को मजबूती मिली है। इस समझौते से ऊर्जा से जुड़ी महंगाई कम होने और कड़ी मौद्रिक नीति (सख्त ब्याज दरों) की संभावना घटने की उम्मीद है। साथ ही, चीन के संस्थागत निवेशक भी सोने से जुड़े एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF) में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।
हांगकांग भी बन रहा सोने का ट्रेडिंग हब, चीन वहां भी बढ़ा रहा भंडार
जानकार सूत्रों के अनुसार, चीन का केंद्रीय बैंक पिछले कुछ महीनों से हांगकांग में भी सोने का भंडार बढ़ा रहा है। यह कदम हांगकांग को एक प्रमुख सोना-व्यापार केंद्र बनाने की उसकी योजना के अनुरूप है। इसके अलावा, चीन धीरे-धीरे अपना कुछ सोने का भंडार लंदन से वापस हांगकांग और घरेलू बाजार में शिफ्ट कर रहा है।
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक भी खरीद रहे सोना
विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council) के अनुमान के अनुसार, दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने इस साल की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में कुल 289 टन सोना खरीदा। हालांकि यह पहली तिमाही के मुकाबले ज्यादा है, लेकिन पूरे साल के दौरान कुल खरीदारी में कमी आने की संभावना जताई जा रही है।


