चीन के ‘सस्ते’ रोबोट से क्यों घबराया अमेरिका? दुनिया में क्यों बढ़ी बेचैनी? बैन की पूरी कहानी

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मुख्य बातें

  • यह विवाद सिर्फ अमेरिका और चीन के बीच ट्रेड वॉर का हिस्सा नहीं है
  • असली कहानी इससे कहीं बड़ी है
  • दुनिया को डर है कि जिस तरह चीन ने सोलर पैनल, बैटरी और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के बाजार पर दबदबा बनाया, कहीं वही कहानी अब ह्यूमनॉइड रोबोट के साथ भी न दोहराई जाए
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चीन के रोबोट से क्यों घबराया अमेरिका? दुनिया में क्यों बढ़ी बेचैनी? बैन की पूरी कहानी

अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सप्लाई चेन से जुड़े खतरे का हवाला देते हुए चीन में बने नए ह्यूमनॉइड रोबोट के आयात पर रोक लगा दी है। चीन ने इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजिंग का कहना है कि अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा का बहाना बनाकर चीनी कंपनियों को रोकना चाहता है और वह अपने उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए जवाबी कदम उठाएगा।

रोबोटिक्स में चीन कितनी बड़ी ताकत बन चुका है?

इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ रोबोटिक्स (IFR) के मुताबिक, 2024 में दुनिया में लगाए गए सभी इंडस्ट्रियल रोबोट में 54% हिस्सेदारी अकेले चीन की थी। 2024 में चीन ने करीब 2.95 लाख इंडस्ट्रियल रोबोट लगाए।

चीन की फैक्ट्रियों में अब 20 लाख से ज्यादा रोबोट काम कर रहे हैं। 2024 में चीन के इंडस्ट्रियल रोबोट बाजार में 57% बिक्री घरेलू कंपनियों की रही, जबकि 10 साल पहले यह आंकड़ा करीब 28% था। यानी चीन सिर्फ रोबोट इस्तेमाल नहीं कर रहा, बल्कि अपनी कंपनियों के दम पर विदेशी कंपनियों को भी पीछे छोड़ रहा है।

ह्यूमनॉइड रोबोट की दौड़ में भी चीन सबसे आगे

ह्यूमनॉइड रोबोट इंसानों की तरह दिखने और कई तरह के काम करने के लिए बनाए जाते हैं। Barclays के अनुसार, पिछले साल दुनिया में तैनात किए गए ह्यूमनॉइड रोबोट में करीब 85% चीन के थे।

CNN के मुताबिक, 2025 में दुनिया भर में भेजे गए ह्यूमनॉइड रोबोट का लगभग 90% चीन की कंपनियों ने बनाया। जबकि, Omdia के अनुमान के अनुसार, 2025 में दुनिया भर में करीब 13,000 ह्यूमनॉइड रोबोट भेजे गए। इनमें AgiBot 5,100 से ज्यादा हैं। यूनीट्री करीब 4,200, UBTech करीब 1,000 हैं।

इसके मुकाबले अमेरिका की टेस्ला और फिगर AI ने सिर्फ कुछ सौ या उससे भी कम रोबोट भेजे। यानी अभी बाजार छोटा है, लेकिन इसकी रफ्तार चीन तय कर रहा है।

आखिर चीन इतनी तेजी से आगे कैसे बढ़ रहा है?

ह्यूमनॉइड रोबोट बनाने में बैटरी, इलेक्ट्रिक मोटर, कैमरे, सेंसर, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और बेहद सटीक मैन्युफैक्चरिंग की जरूरत होती है। इन सभी क्षेत्रों में चीन पहले से दुनिया की सबसे बड़ी ताकतों में शामिल है।

स्मार्टफोन, ड्रोन, सोलर उपकरण और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बनी विशाल सप्लाई चेन का फायदा अब रोबोटिक्स उद्योग को भी मिल रहा है। शेनझेन और हांगझोउ जैसे शहरों में कंपनियां बहुत तेजी से नए मॉडल तैयार करके बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर सकती हैं।

चीन में 140 से ज्यादा कंपनियां बना रही हैं ह्यूमनॉइड रोबोट

CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में अब 140 से ज्यादा ह्यूमनॉइड रोबोट निर्माता हैं। यह उद्योग अब चीन की राष्ट्रीय रणनीति का हिस्सा बन चुका है। सिर्फ उत्पादन ही नहीं, इनोवेशन में भी चीन तेजी से आगे बढ़ रहा है।

LexisNexis की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, पेटेंट की मजबूती के आधार पर दुनिया के 10 सबसे मजबूत ह्यूमनॉइड रोबोट स्टार्टअप में 6 चीन के हैं। सबसे खास बात यह है कि टॉप-5 स्थानों पर भी चीनी कंपनियों का कब्जा है। मॉर्गन स्टैनली का अनुमान है कि 2030 तक सिर्फ चीन का ह्यूमनॉइड रोबोट मार्केट 15 अरब डॉलर का हो सकता है।

ह्यूमनॉइड रोबोट इतने खास क्यों हैं?

सोलर पैनल सिर्फ बिजली बनाते हैं। इलेक्ट्रिक वाहन सिर्फ सफर कराते हैं, लेकिन ह्यूमनॉइड रोबोट फैक्ट्री, गोदाम, लॉजिस्टिक्स, रिटेल स्टोर और अस्पताल जैसे कई क्षेत्रों में अलग-अलग तरह के काम कर सकते हैं।

आज के इंडस्ट्रियल रोबोट सिर्फ एक तय काम करते हैं, लेकिन ह्यूमनॉइड रोबोट इंसानों के लिए बनी जगहों पर कई तरह के काम करने की क्षमता रखते हैं। इसलिए भविष्य में इन्हें बार-बार नई मशीन डिजाइन किए बिना अलग-अलग काम दिए जा सकते हैं। हालांकि तकनीक अभी पूरी तरह विकसित नहीं हुई है, लेकिन अगर ये रोबोट सस्ते और भरोसेमंद हो गए तो पूरी दुनिया के उद्योग बदल सकते हैं।

दुनिया को सबसे ज्यादा डर किस बात का है?

दुनिया को यह डर नहीं है कि चीन सबसे बेहतरीन रोबोट बनाएगा। डर इस बात का है कि चीन सबसे सस्ता और सबसे ज्यादा उपलब्ध ह्यूमनॉइड रोबोट बना देगा। Morningstar के मुताबिक, चीनी कंपनियां उत्पादन बढ़ाने और लागत घटाने में विदेशी कंपनियों से कहीं आगे हैं।

अगर यही रुझान जारी रहा तो यूरोप, दक्षिण-पूर्व एशिया, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका की फैक्ट्रियां, गोदाम और लॉजिस्टिक्स कंपनियां बड़े पैमाने पर चीनी रोबोट खरीद सकती हैं। यह वैसा ही होगा जैसा सोलर पैनल उद्योग में हुआ था। चीन ने बड़े पैमाने पर उत्पादन किया, कीमतें गिराईं और बाकी देशों की कई कंपनियां टिक नहीं पाईं।

इनपुट: एजेंसीज

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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