
क्या टाटा ग्रुप एयर इंडिया के सीईओ को बदलने जा रहा है?
एयर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का बोर्ड कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कैंपबेल विल्सन का विकल्प तलाश रहा है। यह कदम उस समय उठाया जा रहा है जब जून में हुई एक विमान दुर्घटना में 260 लोगों की मौत के बाद एयरलाइन की सुरक्षा प्रक्रियाओं पर सख्त नजर रखी जा रही है।
एयर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड का बोर्ड कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कैंपबेल विल्सन का विकल्प तलाश रहा है। यह जानकारी दो सूत्रों ने दी है। यह कदम उस समय उठाया जा रहा है जब जून में हुई एक विमान दुर्घटना में 260 लोगों की मौत के बाद एयरलाइन की सुरक्षा प्रक्रियाओं पर सख्त नजर रखी जा रही है।
सुरक्षा में कमियों पर चिंता
पिछले एक दशक की सबसे भीषण विमान दुर्घटना के बाद, नियामकों ने कई समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया था। इनमें बिना आपातकालीन उपकरण जांच के विमान उड़ाना, इंजन के पुर्जे बदलने में देरी, रखरखाव के रिकॉर्ड में गड़बड़ी और चालक दल की थकान प्रबंधन में कमियां शामिल थीं।
सीईओ कैंपबेल विल्सन का कार्यकाल
न्यूजीलैंड में जन्मे कैंपबेल विल्सन ने जुलाई 2022 में एयर इंडिया के सीईओ और प्रबंध निदेशक का पद संभाला था। इससे पहले उन्होंने सिंगापुर एयरलाइंस में 26 साल तक काम किया था और वहां कई वरिष्ठ भूमिकाएं निभाई थीं। इकनॉमिक टाइम्स अखबार ने सोमवार को पहली बार नए सीईओ की तलाश की खबर दी थी। विल्सन का कार्यकाल मध्य-2027 तक है, लेकिन उन्हें इससे पहले भी हटाया जा सकता है।
टाटा ग्रुप की नाराजगी
एयर इंडिया के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन हैं, जो कंपनी के बहुसंख्यक मालिक टाटा समूह के भी चेयरमैन हैं। सिंगापुर एयरलाइंस के पास एयर इंडिया में 25% हिस्सेदारी है। एक सूत्र के अनुसार, सरकार से खरीदने के बाद एयर इंडिया की समस्याओं को ठीक करने के लिए विल्सन को खुली छूट दिए जाने के बावजूद, पिछले साल एयरलाइन के प्रदर्शन से टाटा समूह नाराज था।
संभावित उत्तराधिकारियों की तलाश
इकनॉमिक टाइम्स ने खबर दी है कि चंद्रशेखरन ने विल्सन के संभावित उत्तराधिकारियों के तौर पर कम से कम दो प्रमुख यूके और अमेरिका आधारित अंतरराष्ट्रीय एयरलाइनों के सीईओ के साथ चर्चा की है। समूह की लो-कॉस्ट एयरलाइन एयर इंडिया एक्सप्रेस में भी ऐसे ही नेतृत्व परिवर्तन होने की संभावना है।
एयर इंडिया का सफर
एयर इंडिया 2022 में निजीकरण और टाटा समूह को बिकने से पहले भारत की राष्ट्रीय वाहक एयरलाइन थी, जो घाटे में चल रही थी। तब से, टाटा समूह ने बेड़े के आधुनिकीकरण और रूट विस्तार पर भारी निवेश किया है। हालांकि, विमानों की डिलीवरी और उनके नवीनीकरण में देरी, साथ ही परिचालन संबंधी मुद्दों और सुरक्षा चिंताओं ने एयरलाइन के पुनरुत्थान को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।





