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रुपया क्यों गिर रहा? जीडीपी चमक रही, महंगाई लगभग शून्य, आखिर हो क्या रहा है?

रुपया क्यों गिर रहा? जीडीपी चमक रही, महंगाई लगभग शून्य, आखिर हो क्या रहा है?

संक्षेप:

आज भारत की अर्थव्यवस्था एक अजीब विरोधाभास दिखा रही है। दुनिया में सबसे तेज जीडीपी ग्रोथ, लगभग शून्य मुद्रास्फीति और नियंत्रित राजकोषीय घाटा होने के बावजूद भारतीय रुपया एशिया की सबसे खराब मुद्रा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक 17 अरब डॉलर निकाल चुके हैं और 2024-25 में शुद्ध एफडीआई लगभग खत्म हो गया।

Dec 15, 2025 01:47 pm ISTDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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आज भारत की अर्थव्यवस्था एक अजीब विरोधाभास दिखा रही है। दुनिया में सबसे तेज जीडीपी ग्रोथ, लगभग शून्य मुद्रास्फीति और नियंत्रित राजकोषीय घाटा होने के बावजूद भारतीय रुपया एशिया की सबसे खराब मुद्रा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक 17 अरब डॉलर निकाल चुके हैं और 2024-25 में शुद्ध एफडीआई लगभग खत्म हो गया। मजबूत घरेलू आधार अब विदेशी भरोसे की गारंटी नहीं देता।

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पुराना व्यापार घाटा, नई चुनौती

भारत एशिया का इकलौता बड़ा विकासशील देश है, जो दशकों से व्यापार घाटा चला रहा है। एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सोना और मशीनरी के आयात से निर्यात ज्यादा है। 30 साल तक विदेशी निवेशकों के भरोसे से यह घाटा ताकत बना रहा। 1990 से 1 ट्रिलियन डॉलर एफडीआई आया, विदेशी मुद्रा भंडार दुनिया के सबसे बड़े हो गए। नीतिगत माहौल, मजबूत संस्थाओं और उच्च रिटर्न ने निवेशकों को आकर्षित किया।

एफडीआई का उलटफेर

शुद्ध एफडीआई 2020-21 के 40 अरब डॉलर से घटकर 350 मिलियन डॉलर रह गया। भारतीय कंपनियां विदेश निवेश बढ़ा रही हैं, जो आत्मविश्वास दिखाता है, लेकिन विदेशी कंपनियां निकल रही हैं। जैसे सिटी बैंक, फोर्ड, हुंडई, व्हर्लपूल। तीव्र प्रतिस्पर्धा, नियामकीय अनिश्चितता और वैश्विक रणनीतियों से वे मुनाफा बुक कर अमेरिका जैसे बाजारों में जा रही हैं।

पोर्टफोलियो निकासी और रुपये की कमजोरी

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक भारी पैसा निकाल रहे हैं। एमएससीआई इंडिया अन्य उभरते बाजारों से 1993 के बाद सबसे ज्यादा पिछड़ा। अमेरिकी शुल्क, व्यापार समझौते की कमी, ऊंचे मूल्यांकन और बेहतर विकल्प कारण हैं। रुपया 5-6% नाममात्र और 9% वास्तविक रूप से कमजोर हुआ। यह आरबीआई की कमजोरी नहीं, बाहरी वित्तपोषण की गिरावट है।

ट्रेड सरप्लस की ओर रणनीति

अस्थिर पूंजी पर निर्भरता खत्म करनी होगी। अगले दशक में व्यापार घाटे को अधिशेष बनाना जरूरी है, जैसे चीन का 1 ट्रिलियन डॉलर अधिशेष। वैश्विक सब्सिडी पूंजी को विकसित देश खींच रहे हैं। साहसिक कदम चाहिए। इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, रसायन, वस्त्र, ऑटो निर्यात बढ़ाएं।

आईटी-एआई से सेवा निर्यात विस्तार करें, पर्यटन, शिक्षा, वैश्विक केंद्र। आपूर्ति श्रृंखलाओं से गहराई से जुड़ें, अमेरिका-ईयू-एशिया से व्यापार समझौते करें, आरसीईपी जॉइन करें। हाइड्रोजन-सौर से ऊर्जा आयात घटाएं।

आने वाले दबाव

तेल कीमतें कम रहेंगी, लेकिन सोना डॉलर खाएगा। निर्यात न बढ़े तो रुपया कमजोर रहेगा। उच्च वृद्धि-कम महंगाई जश्न लायक हैं, लेकिन मुद्रा स्थिरता के लिए बाहरी आधार चाहिए। लंबा समाधान निर्यातक बनना है, न कि आरबीआई हस्तक्षेप।

नोट: लेखक अजीत राना डे पुणे इंटरनेशनल सेंटर के सीनियर फेलो हैं।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia
टीवी, प्रिंट और डिजिटल में कुल मिलाकर 20 साल का अनुभव। एचटी डिजिटल से पहले दृगराज न्यूज नेशन, दैनिक जागरण, हिंदुस्तान, सहारा समय और वॉच न्यूज एमपी /सीजी में रिपोर्टिग और डेस्क पर जिम्मेदारी निभा चुके हैं। स्पेशल स्टोरीज,स्पोर्ट्स, पॉलिटिक्स, सिनेमा, स्पोर्ट्स के बाद अब बिजनेस की खबरें लिख रहे हैं। दृगराज, लाइव हिन्दुस्तान में बतौर असिस्टेंट न्यूज एडिटर काम कर रहे हैं। और पढ़ें
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