पीएम मोदी ने इन 4 चीजों के कम इस्तेमाल करने की अपील क्यों की, क्या कोई बड़ा संकट आने वाला है?
मुख्य बातें
- PM Modi Appeales: पीएम मोदी ने अपील की कि खाने के तेल की खपत कम करें और एक साल के लिए सोने की खरीद टाल दें
- पेट्रोल-डीजल की बचत करें और EV अपनाएं
- आखिर प्रधानमंत्री को यह अपील क्यों करनी पड़ी?

रविवार से ही चौक-चौराहों से लेकर चाय की दुकानों तक पीएम मोदी की अपील एक चर्चा का केंद्र बनी हुई है। साथ में यह डर भी लगने लगा है कि क्या कोई बड़ा संकट आने वाला है? आखिर पीएम नरेंद्र मोदी ने कच्चा तेल, सोना, वनस्पति तेल और फर्टीलाइजर के आयात पर लगाम लगाने की अपील क्यों की है?
दरअसल वित्त वर्ष 2025-26 में अकेले इन चार चीजों का कुल आयात 240.7 अरब डॉलर रहा, जो भारत के कुल आयात बिल का 31.1% है। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए चारों प्रमुख वस्तुओं कच्चा तेल, सोना, वनस्पति तेल और उर्वरक के कम उपयोग करने की अपील की है।
वित्त वर्ष 2025-26 में कितना हुआ आयात?
वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने सबसे अधिक 134.7 अरब डॉलर का आयात कच्चा तेल का किया। इसके बाद नंबर सोना का है, इसका रिकॉर्ड 72 अरब डॉलर का आयात हुआ। वनस्पति तेल की बात करें तो 19.5 अरब डॉलर का आयात किया गया। भारत ने फर्टिलाइजर्स का आयात 14.5 अरब डॉलर का किया।
PM मोदी ने क्या कहा?
10 मई को हैदराबाद में एक रैली में पीएम मोदी ने कहा कि ग्लोबल संकट के इस दौर में हमें देश को सबसे ऊपर रखकर संकल्प लेने होंगे। उन्होंने अपील की कि खाने के तेल की खपत कम करें और एक साल के लिए गैर-जरूरी सोने की खरीद टाल दें। पेट्रोल-डीजल की बचत करें और इलेक्ट्रिक वाहन (EV) अपनाएं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें, कार-पूलिंग करें और माल ढुलाई रेलवे से करें। किसानों से उन्होंने कहा कि डीजल से चलने वाले पंपों की जगह सोलर पंप लगाएं और रासायनिक खादों का उपयोग 50% तक घटाएं।
इतना जरूरी क्यों है आयात कम करना?
इन चार वस्तुओं का आयात पिछले चार साल में दोगुने से अधिक हो गया है। वित्त वर्ष 2021 में यह 112 अरब डॉलर था, जो 26 में 240.7 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इन चीजों की वैश्विक कीमतें भी आसमान छू रही हैं। अप्रैल और मई 2026 में भारत की क्रूड बास्केट की औसत कीमत क्रमशः 114.48 डॉलर और 105.4 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि पूरे वित्तवर्ष 2025-26 का औसत 70.99 डॉलर प्रति बैरल था।
सोने का आयात वित्त वर्ष 2024-25 में 58 अरब डॉलर था जो वित्त वर्ष 25-26 में बढ़कर 72 अरब डॉलर पर पहुंच गया। यानी इसमें लगभग 24% की बढ़ोतरी हुई। खाद के आयात में 77% की उछाल आई और यह 14.6 अरब डॉलर हो गया। बता दें पश्चिम एशिया में संकट के कारण आयात लागत बढ़ गई है। अगर हम थोड़ी-सी भी आदतें बदलें, तो इसका भारत के विदेशी व्यापार घाटे पर बहुत सकारात्मक असर पड़ेगा।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


