HDFC बैंक के खिलाफ आखिर दुबई में क्यों भड़के निवेशक? पीएमओ से शिकायत
मुख्य बातें
- HDFC Bank: निवेशक एचडीएफसी बैंक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की संभावना तलाश रहे हैं
- साथ ही, वे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और बहरीन के सेंट्रल बैंक से भी संपर्क करने की योजना बना रहे हैं
- कुछ निवेशकों ने पहले ही दुबई वित्तीय सेवा प्राधिकरण (DFSA) से स्वतंत्र रूप से शिकायत कर दी है

दुबई में एचडीएफसी बैंक की ब्रांच के जरिए कार्लिसल की लाइफ सेटलमेंट योजना में पैसा लगाने वाले निवेशकों का एक समूह इस सप्ताह प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को पत्र लिखने जा रहा है। उनका आरोप है कि यह उत्पाद उन्हें गलत तरीके से बेचा गया, उन्हें भारी नुकसान हुआ और कई सालों से उन्हें अपना पैसा वापस नहीं मिल पाया है।
हालांकि, इसके बावजूद आज एचडीएफसी शेयरों में बहुत अधिक हलचल नहीं देखने को मिल रही है। शुरुआती कारोबार में काफी देर तक हरे निशान पर रहने के बाद 10:40 बजे के करीब 0.22 प्रतिशत नीचे 725.90 पर ट्रेड कर रहा था।
यह समूह 75 से अधिक निवेशकों का है, जिन्होंने कार्लिसल के लक्जमबर्ग लाइफ फंड में कुल 13.5 मिलियन डॉलर से अधिक का निवेश किया है। ये निवेशक अब अपनी सभी शिकायतों को इकट्ठा कर रहे हैं और एचडीएफसी बैंक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की संभावना तलाश रहे हैं।
साथ ही, वे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और बहरीन के सेंट्रल बैंक से भी संपर्क करने की योजना बना रहे हैं। कुछ निवेशकों ने पहले ही दुबई वित्तीय सेवा प्राधिकरण (DFSA) से स्वतंत्र रूप से शिकायत कर दी है।
निवेशकों का आरोप: गलत जानकारी और ज्यादा रिस्क
दुबई में रहने वाले पूर्व बैंकर हितेश भाटिया, जिन्होंने 2019 में इस फंड में निवेश किया था, ने बताया कि वे पीएमओ को पत्र में एचडीएफसी बैंक की दुबई ब्रांच में ग्राहकों के लिए सूटेबिलिटी) के गंभीर उल्लंघन, लीवरेज (उधार लेकर निवेश) से जुड़ी चिंताओं, डिस्क्लोजर में कमियों, निवेशकों के नुकसान और लिक्विडिटी से वंचित किए जाने के मुद्दे उठाएंगे। वे मांग करेंगे कि इस मामले को उचित नियामक और जांच एजेंसियों को भेजा जाए।
निवेशकों का कहना है कि इस बीमा-आधारित उत्पाद को उन्हें "पूंजी सुरक्षा" वाला निवेश बताकर बेचा गया, जबकि साथ में दिए गए तीन से पांच गुना तक लीवरेज ने कोविड-19 बाजार गिरावट के दौरान उनके जोखिम और नुकसान को काफी बढ़ा दिया। एक निवेशक के अनुसार, उन्हें बताया गया कि इस उत्पाद से सालाना 12-19% तक का रिटर्न मिलता रहा है, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत रही।
डीएफएसए की पिछली कार्रवाई और अब नया कदम
गौरतलब है कि डीएफएसए ने 2025 में एचडीएफसी बैंक की दुबई अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र (DIFC) ब्रांच के खिलाफ कार्रवाई की थी, जब उसने आरोप लगाया कि बैंक ने खुदरा ग्राहकों को उच्च जोखिम वाले क्रेडिट सुइस एटी1 बॉन्ड गलत तरीके से बेचे थे। इसके बाद डीएफएसए ने उस ब्रांच को नए ग्राहक जोड़ने और उनके साथ कुछ वित्तीय गतिविधियां करने से रोक दिया था।
अब इस नए मामले में भाटिया ने बताया कि निवेशक समूह आरबीआई से संपर्क करने, बहरीन सेंट्रल बैंक में शिकायत दर्ज कराने और डीएफएसए के साथ इस मामले को उठाने के लिए एक वकील नियुक्त करने की भी योजना बना रहा है। उन्होंने कहा, "हमने एचडीएफसी बैंक को एक पत्र लिखा है और उन्हें 31 अगस्त तक का समय दिया है। अगर वे जवाब नहीं देते हैं, तो हम कानूनी रास्ता अपनाएंगे।"
डीएफएसए दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर (DIFC) में सभी वित्तीय सेवाओं की स्वतंत्र नियामक संस्था है। एक निवेशक ने ईटी को दिए दस्तावेजों में आरोप लगाया कि एचडीएफसी बैंक ने इस उत्पाद में निवेश के लिए बैंक में जमा राशि के मुकाबले तीन से पांच गुना तक लीवरेज की सुविधा दी, जिससे जोखिम और बढ़ गया।


