EXPLAINER: भारत में कब घटेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम? पाकिस्तान, भूटान, म्यांमार, नेपाल ने तो घटा दिए
मुख्य बातें
- जब तेल कंपनियां अपना घाटा पूरा कर लेंगी, तब सरकार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर अपने राजस्व की भरपाई करने की कोशिश कर सकती है
- इसलिए सिर्फ क्रूड ऑयल सस्ता होने से पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत कम होना तय नहीं माना जा सकता

Petrol Diesel Price: ईरान युद्ध खत्म होने के बाद कच्चे तेल के आसमान से जमीन पर आ गए हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत अब 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। युद्ध के समय यह 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। कच्चे तेल की कीमतें गिरने के साथ ही दुनिया के कई देशों में पेट्रोल-डीजल के दाम कम हुए हैं, जबकि भारत में अभी भी स्थिर हैं।
यहां तक अब पड़ोसी देशों में सबसे सस्ता पेट्रोल भूटान के बाद पाकिस्तान में मिल रहा है। आखिर दुनिया के अधिकतर देश पेट्रोल-डीजल के रेट में कटौती कर रहे हैं तो भारत क्यों नहीं कर रहा है?
भारत की राजधानी नई दिल्ली में पेट्रोल करीब ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर के आसपास बिक रहा है। इसमें आज भी कोई बदलाव नहीं हुआ है। ग्लोबल पेट्रोल प्राइस के आंकड़ों के मुताबिक भूटान में आज पेट्रोल 109.73 रुपये से घटकर 99.94 रुपये लीटर पर आ गया है। वहीं, पाकिस्तान में पेट्रोल की औसत कीमत 130.82 रुपये लीटर से घटकर 101.91 रुपये पर आ गई है। जबकि भारत में औसत कीमत 108.71 रुपये लीटर है।
बांग्लादेश में पेट्रोल की कीमत 112.68 रुपये से कम होकर 111.71 रुपये पर आ गई है। जबकि, म्यांमार में पेट्रोल 140.20 रुपये से घटकर अब 116.09 रुपये लीटर पर आ गया है। चीन में भी पेट्रोल सस्ता हुआ है। अब यहां पेट्रोल की कीमत 132.81 रुपये से घटकर 119.09 रुपये लीटर पर आ गया है। नेपाल में पेट्रोल भी पेट्रोल की कीमत 136.41 रुपये से 135.57 रुपये लीटर पर आ गई है। श्रीलंका में पेट्रोल के दाम 142.00 रुपये से घटकर 140.12 रुपये पर पहुंच गया है।
पड़ोसी देशों में क्या हैं डीजल के रेट
डीजल के मामले में पड़ोसी देशों की बात करें तो बंग्लादेश 1 लीटर डीजल की कीमत 90.10 रुपये से घटकर अब 88.60 रुपये प्रति लीटर पर आ गई है। जबकि, भारत में औसत रेट 98.10 रुपये लीटर है। जबकि, भूटान में डीजल के दाम 104.68 रुपये प्रति लीटर से घटकर 104.12 रुपये पर पहुंच गए हैं।
पाकिस्तान में डीजल का औसत रेट 139.07 रुपये लीटर से घटकर 105.98 रुपये पर आ गया है। वहीं, जबकि, चीन में 1 लीटर डीजल की कीमत 119.92 रुपये से घटकर 106.20 रुपये पर आ गई है। म्यांमार में डीजल के दाम 140.13 रुपये से सस्ता होकर 118.58 रुपये लीटर पर आ गया है। श्रीलंका में डीजल 137.12 से घटकर 135.31 रुपये और नेपाल में डीजल 141.34 रुपये से घटकर 140.57 रुपये पर आ गई है।
भारत में क्यों नहीं घट रहे पेट्रोल-डीजल के दाम
भारत अपने पड़ोसी देशों में एक मात्र ऐसा देश है, जो ईरान युद्ध के दौरान अपने नागरिकों को सबसे अधिक राहत दिया है। ईरान युद्ध के दौरान पहले चुनाव के कारण पेट्रोल, डीजल की कीमतों पर लगाम लगी रही।
पूरे ढाई महीने बाद मई में ही चार बार में दाम 7.50-7.50 रुपये प्रति लीटर बढ़ाए गए। यह बढ़ोतरी भी जापान के बाद भारत में सबसे कम रही। सरकार ने अपनी तरफ से पेट्रोल-डीजल पर 10-10 रुपये प्रति लीटर की एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर तेल को किफायती बनाए रखा।
दरअसल कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आने के बावजूद पेट्रोल और डीजल के दाम तुरंत कम नहीं होते। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल महंगा हुआ था, तब सरकारी तेल कंपनियों ने करीब ढाई महीने तक पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाईं। इससे कंपनियों को करीब एक लाख करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।
नुकसान की भरपाई करने में लग सकते हैं 3 महीने
एक्सपर्ट्स बताते हैं कि अगर कच्चे तेल की कीमतें मौजूदा स्तर पर बनी रहती हैं, तो तेल कंपनियों को इस नुकसान की भरपाई करने में करीब दो से तीन महीने लग सकते हैं। इसलिए फिलहाल पेट्रोल और डीजल के दाम घटने की संभावना कम मानी जा रही है।
इसके अलावा एक और वजह भी है। विधानसभा चुनाव के दौरान सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने से परहेज किया था। उसी समय मार्च में केंद्र सरकार ने प्रति लीटर 10 रुपये एक्साइज ड्यूटी भी घटा दी थी।
इससे तेल कंपनियों का कुछ नुकसान कम हुआ, लेकिन सरकार के टैक्स कलेक्शन में बड़ी कमी आई। अनुमान है कि इससे सरकार को सालभर में करीब एक लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ।
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


