सोने-चांदी के दाम क्यों गिर रहे, जबकि ईरान-इजरायल युद्ध उफान पर है

Mar 09, 2026 09:28 am ISTDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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Gold Silver Rate: आमतौर जियो-पॉलिटिकल टेंशन जब बढ़ते हैं तो सोने-चांदी कीमतें भी आसमान छूती हैं, लेकिन इस बार उलटा असर हो रहा है। ईरान-इजरायल-अमेरिका में युद्ध के बावजूद सोमवार (9 मार्च) को ग्लोबल मार्केट में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

सोने-चांदी के दाम क्यों गिर रहे, जबकि ईरान-इजरायल युद्ध उफान पर है

आमतौर जियो-पॉलिटिकल टेंशन जब बढ़ते हैं तो सोने-चांदी कीमतें भी आसमान छूती हैं, लेकिन इस बार उलटा असर हो रहा है। ईरान-इजरायल-अमेरिका में युद्ध के बावजूद सोमवार (9 मार्च) को ग्लोबल मार्केट में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। आमतौर पर, ऐसे हालात में निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने-चांदी की ओर रुख करते हैं, लेकिन इस बार बाजार में उलटा रुख देखने को मिला है।

कॉमेक्स (COMEX) पर सोने की कीमत करीब 1.3% फिसलकर 5,090 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गई। वहीं, चांदी की कीमत में 4% से अधिक की तेज गिरावट दर्ज की गई। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट मुनाफावसूली और बढ़ते बाजार तनाव के चलते देखी जा रही है। खास बात यह है कि यह सब तब हो रहा है जब ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच संघर्ष गहरा रहा है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं और वैश्विक वित्तीय बाजार हिल रहे हैं।

तेजी के बाद मुनाफावसूली का दौर

रॉयटर्स के मुताबिक कीमती धातुओं में गिरावट की एक बड़ी वजह निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली किया जाना है। पिछले कुछ महीनों में सोने ने शानदार तेजी दिखाई थी, जिसके बाद निवेशक अब अपने मुनाफे को भुनाने में लगे हैं। इसके पीछे एक और वजह यह है कि शेयर बाजार में जारी गिरावट के चलते निवेशक अपने पोर्टफोलियो में हो रहे नुकसान की भरपाई के लिए सोने के हिस्से को बेचकर नकदी जुटा रहे हैं। एमके वेल्थ मैनेजमेंट के शोध प्रमुख जोसेफ थॉमस के मुताबिक, फिलहाल सोने की कीमतों पर मध्य पूर्व की स्थिति का सबसे अधिक असर देखा जा रहा है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव काफी बढ़ गया है।

बढ़ते तेल के दाम ने बढ़ाई चिंता

जहां एक ओर सोने की कीमतें लुढ़क रही हैं, वहीं दूसरी ओर कच्चे तेल की कीमतों ने नए रिकॉर्ड बना लिए हैं। ब्रेंट क्रूड का भाव 17% उछलकर 108 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया, जो महामारी के बाद से सबसे बड़ी एक दिवसीय छलांग है। वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 107 डॉलर के करीब पहुंच गया। तेल की कीमतों में यह उछाल होर्मुज स्ट्रेट से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के चलते आया है।

तेल की बढ़ती कीमतें दुनियाभर में महंगाई को और बढ़ावा देती हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों के सामने ब्याज दरों को लेकर उलझन बढ़ जाती है। बढ़ती महंगाई के कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों में कटौती का रास्ता और मुश्किल हो सकता है।

डॉलर मजबूत, कीमती धातुएं कमजोर

कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव का एक और बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना और बॉन्ड यील्ड (ब्याज दरों) में बढ़ोतरी है। बाजार में अनिश्चितता के दौर में निवेशक नकदी के लिए डॉलर का रुख कर रहे हैं। वहीं, बढ़ती महंगाई के कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड भी ऊपर गई है। एक मजबूत डॉलर के चलते दूसरी मुद्राओं वाले देशों के लिए सोना खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग कम हो जाती है।

युद्ध का बाजार पर उल्टा असर: क्या है सच?

विश्लेषकों का कहना है कि सोने की कीमतों में यह उतार-चढ़ाव किसी बुनियादी बदलाव की वजह से नहीं, बल्कि युद्ध के चलते पैदा हुई short-term volatility के कारण हो रहा है। जोसेफ थॉमस का कहना है कि एक बार भू-राजनीतिक तनाव कम होने के बाद, अमेरिकी ब्याज दरों और डॉलर की दिशा जैसे पारंपरिक कारक ही सोने-चांदी की कीमतों को तय करेंगे। फिलहाल, निवेशक सुरक्षित निवेश और बाजार की तरलता की जरूरत के बीच उलझे हुए

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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