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Albinder Dhindsa: कभी कंपनी से हटाने की थी नौबत... अब संभालेंगे जोमैटो की कमान

Albinder Dhindsa: कभी कंपनी से हटाने की थी नौबत... अब संभालेंगे जोमैटो की कमान

संक्षेप:

Who is Albinder Dhindsa: ब्लिंकिट को भारत में क्विक कॉमर्स का बड़ा नाम बनाने वाले अल्बिंदर ढिंडसा अब जोमैटो और ब्लिंकिट की पैरेंट कंपनी इटरनल के नए CEO बन गए हैं।

Jan 21, 2026 05:39 pm ISTVarsha Pathak लाइव हिन्दुस्तान
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Who is Albinder Dhindsa: ब्लिंकिट को भारत में क्विक कॉमर्स का बड़ा नाम बनाने वाले अल्बिंदर ढिंडसा अब जोमैटो और ब्लिंकिट की पैरेंट कंपनी इटरनल के नए CEO बन गए हैं। यह बड़ा नेतृत्व बदलाव तब हुआ है, जब जोमैटो के संस्थापक दीपिंदर गोयल ने 1 फरवरी से ग्रुप CEO पद से हटने का फैसला किया है। हालांकि, गोयल कंपनी से पूरी तरह अलग नहीं हो रहे हैं और वे वाइस चेयरमैन की भूमिका में बने रहेंगे। इस बदलाव को इटरनल के भविष्य की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है, जहां अब तेज डिलीवरी और हाइपरलोकल बिजनेस पर ज्यादा फोकस रहेगा। बता दें कि ढिंडसा और गोयल न सिर्फ लंबे समय से साथ काम कर रहे हैं, बल्कि निजी तौर पर भी करीबी दोस्त माने जाते हैं। आइए जानते हैं विस्तार से...

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कौन हैं अल्बिंदर ढिंडसा

पंजाब के पटियाला में जन्मे अल्बिंदर ढिंडसा की कहानी एक छोटे शहर से ग्लोबल बिजनेस लीडर बनने की है। उन्होंने IIT दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और इसके बाद अमेरिका जाकर कोलंबिया बिजनेस स्कूल से MBA किया। पढ़ाई के दौरान ही उन्हें टेक्नोलॉजी से जुड़ी बड़ी और स्केलेबल बिजनेस समस्याओं को समझने का मौका मिला। यही अनुभव आगे चलकर ऑन-डिमांड डिलीवरी जैसे जटिल और तेज रफ्तार सेक्टर में उनके काम आया। ढिंडसा शुरू से ही ऐसे बिजनेस बनाना चाहते थे, जो रोजमर्रा की समस्याओं को आसान बनाएं।

ग्रोफर्स से मिली थी पहचान

साल 2013 में, ढिंडसा ने सौरभ कुमार के साथ मिलकर ग्रोफर्स (Grofers) की शुरुआत की। शुरुआत में यह एक हाइपरलोकल डिलीवरी प्लेटफॉर्म था, जो आसपास की दुकानों से सामान ग्राहकों तक पहुंचाता था। धीरे-धीरे यह एक ऑनलाइन ग्रॉसरी प्लेटफॉर्म बन गया। लेकिन असली गेम-चेंजर साल 2021 में आया, जब ग्रोफर्स ने खुद को ब्लिकिंट के रूप में रीब्रांड किया। कंपनी ने 10 मिनट में डिलीवरी का वादा कर क्विक कॉमर्स पर बड़ा दांव लगाया। इसके लिए देशभर में डार्क स्टोर्स और माइक्रो-फुलफिलमेंट सेंटर्स का तेजी से विस्तार किया गया, जिससे शहरी ग्राहकों की खरीदारी की आदत ही बदल गई।

जब जोमैटो ने ब्लिकिंट को खरीदा

साल 2022 में जोमैटो ने ब्लिकिंट को करीब 568 मिलियन डॉलर के ऑल-स्टॉक डील में खरीदा। शुरुआत में इस मर्जर के दौरान कई चुनौतियां आईं। खुद दीपिंदर गोयल ने एक पुराने इंटरव्यू में माना था कि इंटीग्रेशन आसान नहीं था और एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने ढिंडसा को ब्लिंकिट से हटाने तक पर विचार कर लिया था, लेकिन समय के साथ हालात बदले और आज ब्लिंकिट, इटरनल ग्रुप का सबसे मजबूत और तेजी से बढ़ने वाला बिजनेस बन चुका है।

कितनी है दीपिंदर गोयल की संपत्ति

इटरनल लिमिटेट में बड़े नेतृत्व बदलाव के बीच जोमैटो के संस्थापक दीपिंदर गोयल की निजी संपत्ति एक बार फिर चर्चा में है। ग्रुप CEO पद से हटने के बावजूद गोयल की नेट वर्थ में लगातार तेज़ उछाल देखने को मिला है। 21 जनवरी 2026 तक उनकी रियल-टाइम नेट वर्थ करीब 1.6 अरब डॉलर, यानी लगभग ₹13,300 करोड़ आंकी गई है। ग्लोबल वेल्थ ट्रैकर्स के मुताबिक, उनकी कुल संपत्ति का बड़ा हिस्सा जोमैटो में उनकी हिस्सेदारी से आता है, जहां उनके पास कंपनी के करीब 4.18% शेयर हैं।

Varsha Pathak

लेखक के बारे में

Varsha Pathak
वर्षा पाठक बतौर डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर करीब 2 साल से हिन्दुस्तान डिजिटल से जुड़ी हुई हैं। मूल रूप से मधुबनी (बिहार) की रहने वाली वर्षा लाइव हिन्दुस्तान में बिजनेस सेक्शन के लिए खबरें लिखती हैं। उन्हें बिजनेस सेक्शन के अलग-अलग जॉनर की खबरों की समझ है। इसमें स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, यूटिलिटी आदि शामिल हैं। करीब 7 साल से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय वर्षा ने यहां से पहले दैनिक भास्कर और नेटवर्क 18 में बतौर कंटेंट राइटर काम किया है। उन्हें रिपोर्टिंग का भी अनुभव है। करियर की छोटी अवधि में ही वर्षा के काम की ना सिर्फ सराहना हुई है बल्कि सम्मानित भी किया गया है। वर्षा ने जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता में डिप्लोमा की डिग्री ली। और पढ़ें
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