काम की बात: बिना डॉक्यूमेंट तुरंत लोन मंजूर करने वालों की नजर आपके बच्चों पर है, बचाइए इन्हें वरना…
मुख्य बातें
- Instant Loan: एक सामान्य परिवार के लड़के को कोचिंग की फीस जमा करनी थी, पैसे नहीं थे तो उसने सोचा क्यों न थोड़ा सा ऑनलाइन लोन ले लूं? बस फिर क्या था? एक फेक लोन ऐप डाउनलोड किया, थोड़े पैसे आए, लेकिन

आपका बच्चा घर से दूर पढ़ रहा है या आपके साथ है, आपकी नजर भले ही उस पर न हो, लेकिन साइबर ठगों की नजर उस पर जरूर होती है। फेक लोन ऐप्स अब सिर्फ पैसे नहीं उड़ाते, बल्कि आपकी पहचान, आपकी तस्वीरें और आपकी इज्जत को भी गिरवी रख लेते हैं। गोरखपुर साइबर थाने में तैनात साइबर कमांडो उपेंद्र सिंह से पहले इन दो केस को समझिए। इसके बाद बताएंगे कैसे होती है फेक लोन ऐप या इंस्टेंट लोन ऐप से ठगी और इससे बचने के उपाय क्या हैं...
कहानी 1: कोचिंग की फीस बनीं फांस
एक सामान्य परिवार के लड़के को कोचिंग की फीस जमा करनी थी, पैसे नहीं थे। तो उसने सोचा क्यों न थोड़ा सा ऑनलाइन लोन ले लूं? बस फिर क्या था? एक फेक लोन ऐप डाउनलोड किया, थोड़े पैसे आए, लेकिन जैसे ही लोन का समय आया। वसूली एजेंटों ने ऐसा प्रेशर डाला, गालियां दीं, धमकियां दीं कि वह घबरा गया।
पहला लोन चुकाने के लिए उसने दूसरा लोन लिया, फिर तीसरा... और देखते-देखते उसने 26 अलग-अलग फेक ऐप्स से लोन ले लिया। हर रोज अपमान, हर रोज धमकी, व्हाट्सएप पर अश्लील मैसेज, फोन की गैलरी और कॉन्टैक्ट्स हैक। वह डिप्रेशन में चला गया। उसने कई बार आत्महत्या की कोशिश की।
गोरखपुर साइबर थाने के साइबर कमांडो उपेंद्र सिंह ने जब यह केस देखा, तो न सिर्फ ठगों के चक्रव्यूह को समझा, बल्कि पीड़ित और उसके परिवार को काउंसलिंग देकर मानसिक मदद भी दी। आज वह लड़का ठीक है, लेकिन हर बार यह चमत्कार नहीं होता।
कहानी 2: नवविवाहिता की अश्लील तस्वीरें फैलाने वाले ठग
एक नई-नई ब्याही लड़की ने थोड़ा सा इंस्टेंट लोन ले लिया। ऐप ने उसकी गैलरी, कॉन्टैक्ट्स, मैसेजेस, सब कुछ चुरा लिया। जब वह लोन नहीं चुका पाई, तो ठगों ने उसकी असली तस्वीरों को एडिट करके अश्लील बना दिया। फिर वे तस्वीरें उसके पति, ससुराल वालों और रिश्तेदारों को भेज दीं।
पहले उसने ₹2000 दिए, फिर ₹5000, फिर ₹10,000... लेकिन भुगतान कभी बंद नहीं हुआ। मांग हर दिन बढ़ती गई, परेशानी भी। वह शर्म और डर से टूट गई। उसने सोचा, "अब मेरी इज्जत बचाना नामुमकिन है।" उसने साइबर थाने में कंप्लेन किया तब जाकर मुक्ति मिली।
ये सिर्फ दो कहानियां नहीं हैं। यह एक संगठित साइबर अपराध है जो पूरे देश में फैल रहा है।
ठग निशाना किसे बनाते हैं?
· स्कूल-कॉलेज के छात्र
· पॉकेट मनी या पार्टी के लिए जल्दी पैसे चाहने वाले
· महंगे गैजेट्स या ब्रांडेड चीजों के शौकीन
· गिफ्ट देने के लिए परेशान लड़के-लड़कियां
· गरीब परिवार के बच्चे जो अपने मां-बाप की मदद करना चाहते हैं
· बेरोजगार युवा
ठग जानते हैं कि इन लोगों के पास न तो बैंकिंग पात्रता है, न समझदारी। इसलिए वे लिखते हैं, इंस्टेंट लोन, बिना डॉक्यूमेंट 5 मिनट में लोन मंजूर होने का लालच देते हैं।
कैसे काम करता है फेक लोन ऐप का गेम?
1. लिंक भेजा जाता है, SMS, WhatsApp, Telegram, या किसी अजीब वेबसाइट से।
2. APK फाइल डाउनलोड करने को कहते हैं (गूगल प्ले स्टोर से नहीं)।
3. ऐप आपके फोन की मंजूरी मांगता है, जैसे कॉन्टैक्ट्स, गैलरी, मैसेजेस, माइक, स्टोरेज।
4. आपको लगता है लोन आ गया, लेकिन हुआ कुछ और है, आपके बैंक खाते में ₹1000-2000 आ जाते हैं। असली खेल अब शुरू होता है।
असली मुसीबत लोन देने के बाद आती है
अगले ही दिन आपको व्हाट्सएप पर गालियों से भरे कॉल और मैसेज आने लगते हैं। ठग बोलते हैं, "अभी पैसे दे, नहीं तो तेरी गैलरी की तस्वीरें अश्लील बनाकर सबको भेज दूंगा", "तेरे पापा, मम्मी, दोस्तों को मैसेज करूंगा", "सोशल मीडिया पर बदनाम कर दूंगा।"
डर और शर्म से लोग पैसे देने लगते हैं। फिर जुर्माना, छुपा ब्याज, नया चार्ज, रकम बढ़ती जाती है। यह लोन नहीं, डिजिटल फिरौती है।
क्या करें, क्या न करें?
ये करें
· बैंकिंग या लोन ऐप केवल गूगल प्ले स्टोर या एपल स्टोर से डाउनलोड करें।
· ऐप इंस्टॉल करते वक्त परमिशन जरूर पढ़ें, अगर गैलरी या कॉन्टैक्ट्स मांगे, तो शक करें।
· बच्चों को समझाएं कि कोई भी ऐप आपकी निजी फोटो और कॉन्टैक्ट्स बिना वजह नहीं देख सकता।
· परिवार में खुलकर बात करने का माहौल बनाएं। अगर बच्चे ने गलती भी की, तो वह आपको बता सके।
· संदेह होते ही तुरंत साइबर क्राइम पुलिस या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत करें
ये काम बिल्कुल न करें
· किसी अनजान लिंक पर कभी क्लिक न करें।
· APK फाइल कभी डाउनलोड न करें। भले ही वह WhatsApp पर दोस्त ने भेजी हो।
· अगर परेशान करने वाले कॉल आएं, तो चुप न रहें। शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं। शिकार आप नहीं, ठग हैं।
माता-पिता के लिए खास बात यह है कि आप सोच सकते हैं , "मेरा बच्चा कुछ नहीं करेगा।", लेकिन ये ठग भावनाओं का फायदा उठाते हैं। आपका बच्चा आपको बताने से पहले ही डर के मारे पैसे दे देता है, और फिर जाल गहरा हो जाता है।
क्या करें?
बच्चे के मोबाइल पर नजर रखें । समय-समय पर डिजिटल सुरक्षा की बातें करें। उन्हें यकीन दिलाएं, चाहे कुछ भी हो, आप उनके साथ हैं।
उपेंद्र बताते हैं कि फेक लोन ऐप सिर्फ ठगी नहीं है। यह मानसिक यातना, ब्लैकमेल और इज्जत लूटने का एक संगठित धंधा है, लेकिन अगर आप जागरूक हैं, डिजिटल अनुशासन रखते हैं, और समय रहते शिकायत करते हैं तो आप न केवल खुद बच सकते हैं, बल्कि दूसरों को भी बचा सकते हैं। किसी भी संदेह पर तुरंत 1930 (साइबर हेल्पलाइन) पर डॉयल करें और cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें।
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


