कब लॉन्च होंगे ₹10 और ₹20 के प्लॉस्टिक नोट, राज्यसभा में उठा सवाल

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मुख्य बातें

  • Plastic Note: सांसद नीरज शेखर ने पूछा कि क्या सरकार और RBI प्लास्टिक करेंसी लाने की योजना बना रहे हैं और अगर हां, तो इसकी डेड लाइन क्या हो सकती है
  • इसपर सरकार की ओर से वित्तमंत्री ने क्या दिया जवाब, यहां देखें…
RBI
RBI लाने जा रहा है प्लास्टिक करेंसी।

इसी साल जून में RBI गवर्नर ने प्लॉस्टिक के नोट यानी पॉलिमर करेंसी पर विचार करने की घोषणा की थी। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई गलत खबरें फैलने लगीं कि सेंट्रल बैंक सभी करेंसी नोटों को वापस लेकर प्लास्टिक नोटों से बदल देगा। इस पर सरकार को सफाई देने के लिए मजबूर होना पड़ा। अब यह तय हो चुका है कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत बहुत जल्द 10 और 20 रुपये के प्लॉस्टिक नोट आपके हाथों में होंगे। आइए समझें कि कब तक या संभव होगा...

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पिछले सप्ताह मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी दी कि सरकार पॉलिमर बैंकनोट्स को भारतीय परिस्थितियों, जलवायु और बुनियादी ढांचे में परखने के लिए पायलट प्रोजेक्ट चला रही है। उन्होंने बताया कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो अगले वित्तीय वर्ष की शुरुआत में इन्हें जारी किए जाने की उम्मीद है, हालांकि उन्होंने प्लास्टिक नोटों के लॉन्च की कोई तारीख नहीं बताई।

राज्यसभा में उठा सवाल

11 अगस्त (मंगलवार) को राज्यसभा में यह मुद्दा उस वक्त गरमा गया, जब सांसद नीरज शेखर ने पूछा कि क्या सरकार और RBI प्लास्टिक करेंसी लाने की योजना बना रहे हैं और अगर हां, तो इसकी समयसीमा क्या हो सकती है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने क्या कहा?

नीरज शेखर के सवाल के जवाब में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि RBI ने सरकार के पास ₹10 और ₹20 के पॉलिमर यानी प्लॉस्टिक के बैंकनोट्स के एक-एक अरब फील्ड ट्रायल के लिए प्रस्ताव भेजा था। उन्होंने बताया कि सरकार ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और सफल ट्रायल के बाद इन दो मूल्यवर्गों में पॉलिमर नोटों की नियमित जारी की जाने की उम्मीद है।

लॉन्च डेट पर क्या बोलीं वित्तमंत्री

हालांकि, वित्त मंत्री ने आधिकारिक लॉन्च तारीख नहीं बताई और कहा कि प्लास्टिक नोटों की खरीद प्रक्रिया अभी शुरुआती चरण में है। उन्होंने राज्यसभा को बताया, "RBI ने जानकारी दी है कि खरीद प्रक्रिया फिलहाल शुरुअाती अवस्था में है। ऐसे में इस समय पॉलिमर बैंकनोट्स शुरू करने की सही समयसीमा या उस पर होने वाले खर्च का सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं है।"

क्या होते हैं पॉलिमर बैंकनोट्स?

पॉलिमर करेंसी नोट कॉटन-बेस्ड पेपर की जगह प्लास्टिक सब्सट्रेट से बनाए जाते हैं। ये दिखने और महसूस होने में पेपर करेंसी जैसे ही होते हैं, लेकिन इनकी टिकाऊपन कहीं ज्यादा होती है और ये लंबे समय तक चलन में रह सकते हैं। नमी, गंदगी और रोजाना इस्तेमाल से होने वाले नुकसान से बचने के कारण ये नोट ज्यादा साफ रहते हैं और कम खराब होते हैं।

इन बैंकनोट्स में सुरक्षा के बेहतर फीचर्स भी होते हैं जैसे कि सी-थ्रू विंडो, माइक्रो-ऑप्टिक होलोग्राम और खास तरह की स्याही, जिससे नकली नोट बनाना मुश्किल हो जाता है।

कितने देशों में हैं ये नोट और RBI क्यों लाना चाहता है प्लास्टिक नोट?

दुनिया भर में करीब 60 देश पॉलिमर बैंकनोट्स का इस्तेमाल करते हैं, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूके, न्यूजीलैंड, सिंगापुर, वियतनाम, मलेशिया और मैक्सिको शामिल हैं। मई 2026 में आई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सेंट्रल बैंक करीब एक दशक पुरानी योजना को पुनर्जीवित करना चाहता है ताकि पेपर करेंसी छापने की बढ़ती लागत से बचा जा सके और गंदे तथा खराब नोटों को बदलने की जरूरत को कम किया जा सके।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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