दो रूसी तेल कंपनियों पर ट्रंप के प्रतिबंध का भारत पर क्या होगा असर, क्या महंगा होगा ईंधन
ट्रंप ने रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए। इसका भारत पर फिलहाल असर नहीं दिखेगा। सरकारी तेल कंपनियों को बिचौलियों के माध्यम से रूसी तेल की आपूर्ति जारी रहेगी।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार देर रात को रूस की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए। इसका भारत पर फिलहाल असर नहीं दिखेगा। सरकारी तेल कंपनियों को बिचौलियों के माध्यम से रूसी तेल की आपूर्ति जारी रहेगी।
रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी को इसकी वजह से नुकसान उठाना पड़ सकता है। रिलायंस रूसी तेल की सबसे बड़ी खरीदार है और रूस से देश में प्रतिदिन आयातित 17 लाख बैरल तेल का आधा हिस्सा खरीदती है। रिलायंस ने दिसंबर 2024 में रोसनेफ्ट के साथ 25 वर्ष तक प्रतिदिन 5,00,000 बैरल तेल आयात करने के लिए समझौता किया था। सूत्रों के मुताबिक, रिलायंस ने आयात को काफी कम करने या पूरी तरह रोकने की योजना बनाई है। कंपनी सऊदी अरब और इराक से आयात बढ़ाने की दिशा में विचार कर रही है।
प्रभावित होने वाली दूसरी कंपनी नायरा एनर्जी है। यह कंपनी, जिसमें रोसनेफ्ट की 49.13% हिस्सेदारी है, जुलाई में यूरोपीय संघ द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से पूरी तरह रूसी तेल की आपूर्ति पर निर्भर है।
युक्रेन युद्ध के लिए धन देने का आरोप: दोनों रूसी कंपनियों पर आरोप है कि वे क्रेमलिन को यूक्रेन से युद्ध के लिए धन मुहैया करातीं हैं, इसलिए उन पर कार्रवाई हुई है। दोनों कंपनियां मिलकर प्रतिदिन 31 लाख बैरल तेल का निर्यात करतीं हैं। रोसनेफ्ट कंपनी ही वैश्विक तेल उत्पादन का करीब छह प्रतिशत और रूस के तेल उत्पादन का आधा हिस्सा निर्यात करती है।
सरकारी कंपनियों पर सीमित असर : भारत पेट्रोलियम, इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां मध्यस्थ व्यापारियों के माध्यम से तेल खरीदती हैं। इन्होंने जोखिम का मूल्यांकन शुरू कर दिया है, लेकिन तत्काल रूसी तेल आयात रोकने की योजना नहीं है।
ट्रंप ने पांचवीं बार दावा किया: ट्रंप ने एक हफ्ते में पांचवीं बार दावा दोहराते हुए बुधवार को कहा था कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे बातचीत में कहा था कि भारत रूस से इस साल के अंत तक तेल खरीद में 40 फीसदी की कटौती करेगा।
रिलायंस इंडस्ट्रीज की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड को आयात फिर से संतुलित करना पड़ सकता है, क्योंकि वह सीधे रूस की ‘रोसनेफ्ट’ से कच्चा तेल खरीदती है। कंपनी कच्चे तेल को पेट्रोल, डीजल और विमानन ईंधन में परिष्कृत करती है, जिसका एक बड़ा हिस्सा यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे बाजारों में बाजार मूल्य पर निर्यात किया जाता है, जिससे उसे अच्छा मुनाफा होता है।
भारत के लिए चुनौती, कीमतों में बढ़ोतरी संभव
रूस अब तक भारत को सस्ते दामों पर कच्चा तेल उपलब्ध कराता रहा है जिससे देश को बड़ी लागत में राहत मिलती थी। अब नए स्रोतों से खरीद महंगी पड़ सकती है। अगर भारत को वैकल्पिक स्रोतों से तेल खरीदना पड़ा तो इससे ऊर्जा लागत और घरेलू ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय कानून में रोक का प्रावधान नहीं : चीन
चीन ने गुरुवार को कहा कि अमेरिका द्वारा दो रूसी तेल कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंधों का विरोध करता है। चीन ने कहा कि इन प्रतिबंधों का अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है। बीजिंग में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नए अमेरिकी प्रतिबंधों के बारे में पूछे जाने पर, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा, चीन लगातार ऐसे एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध करता है, जिनका अंतरराष्ट्रीय कानून में कोई आधार नहीं है और जो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अधिकृत नहीं हैं।





