ईरान-अमेरिका की जंग से भारत की इकोनॉमी को रिस्क, इक्रा की रिपोर्ट ने बढ़ाई टेंशन

Mar 10, 2026 11:30 pm ISTDeepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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रेटिंग एजेंसी ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि लगभग 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह वित्त वर्ष 2025-26 के अनुमान 7.6 प्रतिशत से थोड़ा कम है। हालांकि, कुछ रिस्क फैक्टर भी है।

ईरान-अमेरिका की जंग से भारत की इकोनॉमी को रिस्क, इक्रा की रिपोर्ट ने बढ़ाई टेंशन

पश्चिम एशिया में अगर संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो भारत की आर्थिक वृद्धि की संभावनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने एक रिपोर्ट में यह कहा। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि लगभग 7.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह वित्त वर्ष 2025-26 के अनुमान 7.6 प्रतिशत से थोड़ा कम है। हालांकि, पश्चिम एशिया में लंबे समय तक जारी तनाव से कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मुद्रास्फीति के दबाव के कारण वृद्धि प्रभावित हो सकती है।

वैश्विक स्तर पर तनाव

बता दें कि इजराइल-अमेरिका के ईरान पर हमले के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास के समुद्री मार्गों में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। यह एक अहम वैश्विक ऊर्जा गलियारा है। इससे आपूर्ति प्रभावित होने और माल ढुलाई लागत में वृद्धि को लेकर चिंता बढ़ी है।

पश्चिम एशिया भारत का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार बना हुआ है। भारत के निर्यात में इसकी लगभग 14 प्रतिशत और आयात में लगभग 21 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ऐसे में, यदि तनाव और बढ़ता है तो व्यापार के साथ ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होगी।

भारत के लिए जोखिम हैं ये फैक्टर

इक्रा की रिपोर्ट में कहा गया- यह संघर्ष विशेष रूप से माल ढुलाई लागत में वृद्धि, आपूर्ति में देरी और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के रूप में भारत के व्यापार प्रवाह के लिए महत्वपूर्ण जोखिम पैदा करता है। इक्रा के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि से भारत का चालू खाते का घाटा 0.30-0.40 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। साथ ही थोक और खुदरा मुद्रास्फीति भी बढ़ सकती है। ईंधन की बढ़ती लागत से उपभोग मांग कम हो सकती है और समग्र आर्थिक गतिविधि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

एजेंसी के अनुमान के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे तेल की कीमतें औसतन 70 से 75 डॉलर प्रति बैरल रहती हैं तो इससे चालू खाते का घाटा सकल घरेलू उत्पाद के लगभग एक प्रतिशत के आसपास बना रह सकता है। हालांकि, यदि कीमतें बढ़कर 100-105 डॉलर प्रति बैरल हो जाती हैं, तो घाटा सकल घरेलू उत्पाद के लगभग 1.9-2.2 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, जिससे वृहद आर्थिक दबाव बढ़ेगा।

इक्रा ने कहा कि इस स्थिति का असर बाहर से भेजे जाने वाली राशि पर भी पड़ सकता है, क्योंकि भारत में आने वाले रेमिंटन्स का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से आता है, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब शामिल हैं।

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हिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।

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