घर बनवाने से लेकर फर्नीचर तक सब होगा महंगा! आम लोगों को लगेगा बड़ा झटका? तीसरी बार कीमत बढ़ाने चली ये कंपनी
मुख्य बातें
- आपके घरों में बनने वाले फर्नीचर, मेंटीनेंस और तमाम डेकोरेटिव आइटम में लगने वाला सामान महंगा होने वाला है
- जी हां, क्योंकि फेविकोल और डॉ
- फिक्सिट के दाम बढ़ने वाले हैं
- पिडिलाइट (Pidilite) कंपनी ने कच्चे माल की कीमतों में उछाल आने के बाद प्राइस हाइक का संकेत दिया है

अगर आप घर बनाने या मरम्मत का काम शुरू करने की सोच रहे हैं, तो जल्द फैसला लेना बेहतर हो सकता है, क्योंकि 'फेविकोल का मजबूत जोड़' अब थोड़ा महंगा होने वाला है। फेविकोल, डॉ. फिक्सिट और एम-सील जैसे मशहूर ब्रांड्स बनाने वाली कंपनी पिडिलाइट इंडस्ट्रीज (Pidilite Industries) ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में ग्राहकों को अपनी जेब और ढीली करनी पड़ सकती है। कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर सुधांशु वत्स के अनुसार, पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव और युद्ध जैसी स्थितियों के कारण कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे कीमतों में बढ़ोतरी करना अब कंपनी की मजबूरी बनता जा रहा है। आइए समझते हैं कि आखिर कीमतें क्यों बढ़ रही हैं और इसका आप पर क्या असर होगा?
पश्चिम एशिया संकट और 50% महंगाई की मार
पिडिलाइट के उत्पादों को बनाने में विनाइल एसीटेट मोनोमर (VAM) जैसे रसायनों का इस्तेमाल होता है, जो सीधे तौर पर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) से जुड़े होते हैं। पश्चिम एशिया में चल रहे संकट की वजह से कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर हैं। कंपनी के 'रॉ मटेरियल बास्केट' यानी कच्चे माल की लागत में 40% से 50% तक की भारी वृद्धि देखी गई है। कंपनी ने पहले ही अप्रैल और मई में दो बार दाम बढ़ाए हैं। अकेले फेविकोल की कीमतों में 12-15% तक की वृद्धि की जा चुकी है, लेकिन लागत इतनी बढ़ गई है कि कंपनी को फिर से कीमतें बढ़ाने पर विचार करना पड़ रहा है।
क्या कहते हैं कंपनी के एमडी?
सुधांशु वत्स का कहना है कि स्थिति हर दिन बदल रही है। उन्होंने बताया कि कंपनी एक साथ बोझ डालने के बजाय धीरे-धीरे और नपे-तुले ढंग से कीमतों को बढ़ाएगी, ताकि बाजार और मांग पर बुरा असर न पड़े। अगर यह संकट लंबा खिंचता है, तो महंगाई बढ़ने से आम जनता की खरीदारी की क्षमता (डिमांड) कम हो सकती है। हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि यदि इस महीने तनाव कम होता है, तो स्थिति नियंत्रण में रहेगी। दिलचस्प बात यह है कि पिडिलाइट की ग्रामीण इलाकों में मांग शहरों के मुकाबले अधिक तेजी से बढ़ रही है, जो कंपनी के लिए एक अच्छा संकेत है।
किस पर पड़ेगा इसका असर?
कंपनी (Pidilite Industries) की संभावित प्राइस हाइक का असर सीधे उन प्रोडक्ट्स पर पड़ सकता है, जिनका इस्तेमाल घर, स्कूल, ऑफिस, फर्नीचर और कंस्ट्रक्शन कामों में रोज होता है। कंपनी के कई लोकप्रिय ब्रांड बाजार में काफी बड़े स्तर पर इस्तेमाल किए जाते हैं, इसलिए कीमत बढ़ने का असर आम ग्राहकों और छोटे कारोबारियों दोनों पर दिख सकता है।
| प्रोडक्ट और इस्तेमाल | असर |
|---|---|
| फर्नीचर, लकड़ी और कारपेंट्री में इस्तेमाल होने वाला गोंद | फर्नीचर और कारपेंटर का खर्च बढ़ सकता है। |
| इंस्टेंट सुपर ग्लू | छोटे रिपेयर और घरेलू उपयोग महंगे हो सकते हैं। |
| घरों की वॉटरप्रूफिंग और कंस्ट्रक्शन केमिकल्स | घर की मरम्मत और निर्माण लागत बढ़ सकती है। |
| पाइप, लीकेज और रिपेयरिंग प्रोडक्ट्स | रिपेयरिंग और मेंटेनेंस खर्च बढ़ सकता है। |
| आर्ट और क्रॉफ्ट प्रोडक्ट्स | स्कूल और क्राफ्ट सामान महंगे हो सकते हैं। |
| फैक्ट्री और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इस्तेमाल होने वाले एडहेसिव्स | इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन लागत बढ़ सकती है। |
इसका असर सिर्फ इन प्रोडक्ट्स तक सीमित नहीं रहेगा, क्योंकि फेविकोल (Fevicol) और डॉ. फिक्सिट (Dr Fixit) जैसे प्रोडक्ट्स फर्नीचर, इंटीरियर, होम रेनोवेशन और कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होते हैं, इसलिए फर्नीचर बनवाना महंगा हो सकता है। घर की मरम्मत और वॉटरप्रूफिंग का खर्च बढ़ सकता है। स्कूल और ऑफिस स्टेशनरी की कीमतों पर असर पड़ सकता है।
कंपनी के मुताबिक वेस्ट एशिया (West Asia) संकट के कारण कच्चे तेल से जुड़े केमिकल्स, पैकेजिंग और ट्रांसपोर्ट लागत तेजी से बढ़ी है। अगर यह संकट लंबे समय तक जारी रहा, तो आने वाले महीनों में बाजार में और भी प्राइस हाइक देखने को मिल सकती है।
शानदार वित्तीय नतीजे
कीमतों के दबाव के बावजूद, पिडिलाइट ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। कंपनी का मुनाफा 36.6% बढ़कर ₹584.15 करोड़ हो गया है और रेवेन्यू भी 13% उछला है। लेकिन, असली परीक्षा अब शुरू होगी, क्योंकि कंपनी को अपने मुनाफे (मार्जिन) को 20-24% के बीच बनाए रखने के लिए बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालना ही होगा।
लेखक के बारे में
Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते
हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग
पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में
ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में
भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।
उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के
दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई
स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही
क्रिकेट खेलने और डांस का शौक है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलित और ऊर्जावान बनाता है। उनका उद्देश्य सिर्फ खबरें लिखना ही
नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।


