दुनिया भर में बिजली-पेट्रोल महंगा होने से हाहाकार, सरकारें क्या-क्या कर रहीं उपाय

Drigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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म्यामांर में पेट्रोल के दाम दोगुने से अधिक हो गए हैं। डीजल में 161 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। अमेरिका में तेल के रेट 41 प्रतिशत तक उछला है। चीन में भी ईंधन के दाम 30% से अधिक बढ़े हैं। जंग की मार म्यांमार से लेकर अफ्रीकी देशों तक पड़ रही है।

दुनिया भर में बिजली-पेट्रोल महंगा होने से हाहाकार, सरकारें क्या-क्या कर रहीं उपाय

अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग से दुनियाभर में बिजली, गैस से लेकर पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे हैं। पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर करीब 100 डॉलर तक पहुंच गई है। अब हर देश अपने नागरिकों को इस महंगाई से बचाने की कोशिश कर रहा है। आइए जानते हैं कि किस देश ने क्या कदम उठाया है।

भारत: सरकार पेट्रोल-डीजल पर 10-10 रुपये टैक्स कम कर चुकी है। पड़ोसी देशों को ईंधन सिर्फ तभी भेजा जाएगा, जब भारत के पास अतिरिक्त मात्रा हो। पाइप वाली गैस वाले उपभोक्ताओं को नया LPG सिलेंडर रखने पर रोक लगी है। 33 करोड़ LPG कनेक्शन वाले घरों को ध्यान में रखते हुए, उद्योगों को गैस कम दी जा रही है ताकि रसोई गैस की कमी न हो।

इंग्लैंड: पुराने विंड और सोलर प्लांट्स को तय दामों पर बिजली बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है, ताकि आम लोगों के बिल कम आएं।

नीदरलैंड: पेट्रोल-डीजल महंगा होने पर अस्थायी टैक्स छूट दी गई है। साथ ही, संकट बढ़ने पर और कदम उठाने की तैयारी।

स्वीडन: घरों के बिजली-पेट्रोल बिल कम करने के लिए फ्यूल टैक्स घटाया और बिजली सब्सिडी बढ़ाई जा रही है।

दक्षिण कोरिया: कोयले से बिजली बनाने की सीमा हटाई गई। परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को 80% तक चलाने की अनुमति। कमजोर परिवारों को एनर्जी वाउचर देने की तैयारी। घरेलू सप्लाई बढ़ाने के लिए नेफ्था का निर्यात बंद किया।

चीन: देश में ईंधन की कमी से बचने के लिए रिफाइंड ईंधन निर्यात पर बैन। फसलों के मौसम से पहले नेशनल रिजर्ब से खाद जारी की जा रही है।

ऑस्ट्रेलिया: ग्रामीण इलाकों, खनन और कृषि के लिए घरेलू भंडार से पेट्रोल-डीजल निकाला जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि युद्ध का असर महीनों रहेगा, लोगों को सार्वजनिक परिवहन इस्तेमाल करना चाहिए।

जापान: अप्रैल से एक साल के लिए कोयला बिजली प्लांट्स के नियम ढीले किए। G7 और IEA से कहा कि अगर ईरान युद्प लंबा हुआ तो बाजार स्थिर करने के लिए और कदम उठाने को तैयार रहें। ऑस्ट्रेलिया (जहाa से LNG आती है) से उत्पादन बढ़ाने की मांग। नेफ्था की कमी के चलते प्लास्टिक जैसे केमिकल का आयात बढ़ाया।

बांग्लादेश: तेल और LNG आयात के लिए अरबों डॉलर का बाहरी मदद ढूंढ रहा है।

सर्बिया: कच्चे तेल पर 60% तक एक्साइज ड्यूटी घटाई। बाजार में कमी न हो, इसलिए तेल और ईंधन निर्यात पर बैन लगा दिया।

इटली: पेट्रोल सस्ता करने के लिए एक्साइज ड्यूटी कटौती की योजना। जो कंपनियां संकट का फायदा उठाकर मुनाफा कमा रही हैं, उन पर टैक्स बढ़ाने को तैयार।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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