2.5 साल में ₹6.5 करोड़ की बचत: कंसल्टेंट की वायरल स्टोरी पर सोशल मीडिया में मचा बवाल

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मुख्य बातें

  • Viral Story: इस कंसल्टेंट ने दावा किया कि पिछले ढाई वर्षों में उन्होंने करीब ₹6.5 करोड़ की बचत की है
  • इस शानदार बचत को जोड़कर उनकी कुल संपत्ति अब लगभग ₹7.5 करोड़ हो गई है
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कंसल्टेंट की वायरल स्टोरी पर सोशल मीडिया में मचा बवाल

भारत के एक मैनेजमेंट कंसल्टेंट ने रेडिट पर अपनी फाइनेंशियल जर्नी का खुलासा किया है, जिसने सोशल मीडिया पर सभी का ध्यान खींचा है। 37 वर्षीय इस एनआरआई पेशेवर ने बताया कि कैसे उन्होंने खाड़ी देशों में जाने के बाद अपनी कुल संपत्ति को करीब ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹7.5 करोड़ कर लिया। यह पोस्ट सबरेडिट 'r/Indian_flex' पर शेयर की गई, जिसके बाद लोग इस करियर और निवेश रणनीति को जानने के लिए उत्सुक हो गए।

शुरुआती करियर: 22 साल में ₹10 लाख से 34 साल में ₹65 लाख तक का सफर

उन्होंने अपनी नौकरी की शुरुआत महज 22 साल की उम्र में एक ग्रेजुएट ट्रेनी के रूप में की थी, जहां उन्हें सालाना ₹10 लाख का वेतन मिलता था। एमबीए करने के बाद, 26 साल की उम्र में उन्होंने मैनेजमेंट कंसल्टिंग में कदम रखा और उनका वेतन बढ़कर ₹25 लाख सालाना हो गया।

29 साल की उम्र में उन्होंने कंसल्टिंग छोड़कर इंडस्ट्री की नौकरी ज्वाइन की, जहां उन्हें ₹40 लाख का पैकेज मिला। अगले पांच साल में यह आंकड़ा ₹65 लाख तक पहुंच गया। इस दौरान उन्होंने ईपीएफ (EPF), सोना, शेयर बाजार और रियल एस्टेट में निवेश करके करीब ₹1 करोड़ की संपत्ति जुटा ली थी।

34 साल की उम्र में मिला टैक्स-फ्री पैकेज

असली बदलाव तब आया, जब 34 साल की उम्र में उन्होंने भारत छोड़कर मिडिल ईस्ट में वापस कंसल्टिंग ज्वाइन करने का फैसला किया। यहां उन्हें ₹3.5 करोड़ का सालाना पैकेज मिला और सबसे खास बात यह थी कि यह पूरी तरह टैक्स-फ्री था। इस कदम ने उनकी संपत्ति बनाने की रफ्तार को बदल कर रख दिया।

अब 37 साल की उम्र में पहुंचकर, इस कंसल्टेंट ने दावा किया कि पिछले ढाई वर्षों में उन्होंने करीब ₹6.5 करोड़ की बचत की है। इस शानदार बचत को जोड़कर उनकी कुल संपत्ति अब लगभग ₹7.5 करोड़ हो गई है। उन्होंने यह भी बताया कि अभी उनकी मासिक आय लगभग 26 हजार डॉलर (बोनस को छोड़कर) है, जो भारतीय रुपयों में करीब 22 लाख रुपये प्रति माह बैठती है।

मुंबई में तीन मकान, 700 ग्राम सोना और शेयरों में बड़ा निवेश

अपनी संपत्ति का ब्योरा देते हुए उन्होंने बताया कि उनके पास मुंबई में तीन प्रॉपर्टी हैं, जो पूरी तरह से फ्रीहोल्ड हैं। इसके अलावा, उनके पास फिजिकल गोल्ड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स के रूप में करीब 700 ग्राम सोना है। वह फिलहाल इक्विटी मार्केट में करीब ₹30 लाख का निवेश रखते हैं और आने वाले समय में इस हिस्से को और बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

पैसे को दुबई से भारत कैसे लाते हैं? क्या है उनका तरीका?

रेडिट यूजर्स ने उनसे सबसे ज्यादा यही सवाल पूछा कि वह दुबई की कमाई को भारत कैसे ट्रांसफर करते हैं। जवाब में उन्होंने बताया कि यह बहुत सरल है। वह एनआरई (NRE) खाते का इस्तेमाल करते हैं। उनके अनुसार, भारत में विदेशी मुद्रा भेजने की कोई सीमा नहीं है। वह बैंक वायर ट्रांसफर या 'केयरम' जैसे ऐप्स का उपयोग करके विदेशी खाते से सीधे एनआरई खाते में पैसा भेजते हैं, और जरूरत पड़ने पर वहां से एनआरओ (NRO) खाते में ट्रांसफर कर लेते हैं।

इंटरनेट पर लोगों का रिएक्शन

इस पोस्ट पर लोगों ने काफी उत्साह दिखाया। एक यूजर ने तो बस इतना लिखा, "प्रेरणा देने के लिए धन्यवाद भाई।" वहीं कुछ लोगों ने उनके करियर में बार-बार स्विच करने और विदेशों में मिलने वाले टैक्स-फ्री वेतन के बारे में भी गहरी दिलचस्पी दिखाई। इस पोस्ट ने भारतीय पेशेवरों में हाई पैकेज वाली विदेशी नौकरियों, खासकर कंसल्टिंग सेक्टर, को लेकर बढ़ती रुचि को भी उजागर किया है।

हालांकि, इस पोस्ट में बताई गई वेतन, बचत और संपत्ति के आंकड़े पूरी तरह से रेडिट यूजर के अपने दावों पर आधारित हैं। इन्हें किसी थर्ड पार्टी ने आधिकारिक रूप से वेरिफाई नहीं किया है। फिर भी, यह कहानी उन सैकड़ों युवाओं के लिए एक प्रेरणा जरूर बन गई है, जो विदेशों में करियर बनाने का सपना देख रहे हैं।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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