डाबर की नई मुसीबत, अब अमेरिकी नियामक ने दी कड़ी चेतावनी

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मुख्य बातें

  • अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (USFDA) ने डाबर इंडिया के सिलवासा स्थित औषधि मैन्युफैक्चरिंग प्लांट को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं
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डाबर की बढ़ी मुसीबत

एफएमसीजी कंपनी डाबर इंडिया के सामने एक नई मुश्किल आ गई है। दरअसल, अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन (USFDA) ने डाबर इंडिया के सिलवासा स्थित औषधि मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में करंट गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (सीजीएमपी) के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कंपनी को चेतावनी पत्र जारी किया है।

सीईओ को लिखा पत्र

USFDA ने डाबर इंडिया के सीईओ मोहित मल्होत्रा को भेजे गए पत्र में आंकड़ों की विश्वसनीयता में कमी, गुणवत्ता निगरानी की अपर्याप्त व्यवस्था और मैन्युफैक्चरिंग कंट्रोल में खामियों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया है।अमेरिकी नियामक के अनुसार, सिलवासा प्लांट में किए गए कृत्य सीजीएमपी मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। इसके कारण वहां निर्मित उत्पाद अमेरिकी कानून के तहत 'मिलावटी' श्रेणी में आते हैं। इस पत्र के मुताबिक, जांच के दौरान USFDA को मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से संबंधित उपकरण उपयोग रजिस्टर में हेरफेर के भी प्रमाण मिले। इसके अलावा, पत्र में और कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

डाबर के जवाब से संतुष्ट नहीं

डाबर ने इन खामियों को स्वीकार करते हुए कर्मचारियों को दोबारा प्रशिक्षण देने, दस्तावेजीकरण में सुधार और सफाई सत्यापन प्रणाली मजबूत करने का आश्वासन दिया। लेकिन USFDA ने कंपनी के जवाब को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि इससे गुणवत्ता और आंकड़ों की विश्वसनीयता से जुड़ी प्रणालीगत कमियों का समाधान नहीं होता है।

USFDA ने बताया कि उसने पांच जून, 2026 से सिलवासा प्लांट में बने सभी औषधीय उत्पादों को 'आयात चेतावनी 66-40' के दायरे में रखा है। इसके साथ ही कंपनी को 15 वर्किंग डेज के भीतर सुधारात्मक कदमों का विस्तृत जवाब देने और स्वतंत्र सीजीएमपी विशेषज्ञ से संयंत्र का व्यापक ऑडिट कराने को कहा गया है।

डाबर के दावे पर सख्ती

बता दें कि भारत में भी डाबर के दावे को लेकर कार्रवाई की गई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा डाबर इंडिया को कई उत्पादों पर गुमराह करने वाले '100 प्रतिशत' दावों को रोकने का आदेश दिया है।

सोशल मीडिया पोस्ट में नियामक ने बताया कि उसने डाबर इंडिया लिमिटेड को गुमराह करने वाले '100 प्रतिशत' दावे वाले खाद्य उत्पादों - जैसे शहद, एप्पल साइडर विनेगर, वर्जिन कोकोनट ऑयल, तिल का तेल, गाय का घी, नारियल पानी और ऐसी ही अन्य चीजें की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया है।

डाबर ने क्या कहा?

इस पर डाबर ने कहा कि वह आगे की कार्रवाई के लिए कानूनी सलाह ले रही है। इससे संकेत मिलता है कि रोजमर्रा के उपभोग का सामान बनाने वाली कंपनी खाद्य नियामक के खिलाफ कानूनी रास्ता अपना सकती है। डाबर ने कहा कि उसने एफएसएसएआई के आदेश में बताए गए उत्पादों के लेबल, विज्ञापनों और वेबसाइट सामग्री में '100 प्रतिशत' दावे को हटाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी थी और ज्यादातर बदलाव या तो पूरे हो चुके हैं या अभी चल रहे हैं।

Deepak Kumar

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हिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।

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