ट्रंप का नया पैंतरा: भारत समेत 60 देशों पर नए टैरिफ की मार, लग सकता 12.5% एक्स्ट्रा Tariff
मुख्य बातें
- भारत समेत कई देशों पर अमेरिकी टैरिफ बढ़ाने की तैयारी शुरू हो चुकी है
- ऐसे में आने वाले हफ्तों में भारत सहित कई देशों की नजर अमेरिकी प्रशासन के अंतिम फैसले पर रहेगी

टैरिफ को लेकर अमेरिकी कोर्ट से मात खाने के बाद अब ट्रंप नया पैंतरा लगाने जा रहे हैं। इस बार बहाना है जबरन मजदूरी का। अमेरिका ने भारत समेत दुनिया के कई बड़े ट्रेडिंग पार्टनर देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर नए टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) की ओर से जारी बयान के अनुसार भारत से आने वाले सामान पर 12.5 प्रतिशत तक का नया टैरिफ लगाया जा सकता है।
अमेरिका का कहना है कि भारत अपने यहां जबरन काम करवाने (बंधुआ मजदूरी) पर सख्ती से रोक लगाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो अमेरिकी कानून के तहत ऐसे माल पर बैन लग सकता है। बता दें ट्रंप सरकार ने भारत के स्टील और एल्युमीनियम जैसे उत्पादों पर जो भारी टैक्स लगाया था, ट्रेड डील के तहत भारत उसे हटवाना चाहता है ताकि कंपनियों को अमेरिकी बाजार में बराबरी मिले।
किन देशों पर कितना टैरिफ प्रस्तावित?
लाइव मिंट की खबर के मुताबिक अमेरिका ने कनाडा, मैक्सिको, यूरोपीय संघ, ब्रिटेन और ताइवान जैसे देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर न्यूनतम 10 प्रतिशत टैरिफ का प्रस्ताव रखा है। वहीं भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील और स्विट्जरलैंड जैसे देशों के लिए 12.5 प्रतिशत शुल्क का प्रस्ताव रखा गया है।
अमेरिका ने क्या कहा?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने कहा कि कई बड़े ट्रेडिंग पार्टनर जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात को रोकने में पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "यह स्थिति अमेरिकी मजदूरों के लिए असमान प्रतिस्पर्धा पैदा करती है। अब अमेरिका इस अंतर को और बर्दाश्त नहीं करेगा।" ग्रीर के अनुसार कुछ देशों ने शुरुआती कदम जरूर उठाए हैं, लेकिन सभी ट्रेडिंग पार्टनर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि ग्लोबल ट्रेड जबरन मजदूरी को बढ़ावा न दे।
भारत पर क्या हो सकता है असर?
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है तो भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार में कंपटीशन करना महंगा हो सकता है। खासकर इंजीनियरिंग सामान, टेक्सटाइल, रसायन, फार्मा और अन्य एक्सपोर्ट सेक्टर पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि यह अभी केवल प्रस्तावित कदम है और अंतिम फैसला सार्वजनिक सलाह और सुनवाई के बाद लिया जाएगा।
जुलाई में होगी सुनवाई
अमेरिकी प्रशासन ने इस प्रस्ताव पर 6 जुलाई तक लिखित सुझाव मांगा है। इसके बाद 7 जुलाई से सेक्शन 301 पैनल सार्वजनिक सुनवाई शुरू करेगा। इन सुनवाइयों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नया रास्ता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी व्यापक टैरिफ लगाने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए कुछ शुल्कों को रद्द कर दिया था। इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने सेक्शन 301 जांच का सहारा लिया है, जिसे कानूनी रूप से अधिक मजबूत माना जाता है। फिलहाल अमेरिका ने सेक्शन 122 के तहत 10 प्रतिशत का अस्थायी वैश्विक शुल्क भी लागू कर रखा है, जिसकी अवधि जुलाई में समाप्त हो रही है।
बढ़ सकती है चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नए टैरिफ लागू होते हैं तो अमेरिका और उसके प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के बीच तनाव बढ़ सकता है। हालांकि अभी तक अधिकांश देशों ने जवाबी कार्रवाई के बजाय बातचीत और ट्रेड डील के जरिए समाधान तलाशने की रणनीति अपनाई है।
इनपुट: एजेंसी
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