गौतम अडानी को बड़ी राहत! US कोर्ट से हमेशा के लिए बंद हुआ ये केस, अमेरिका में सारे आरोप हुए खारिज
अमेरिकी न्याय विभाग ने गौतम अडानी और सागर अडानी के खिलाफ चल रहे एक आपराधिक मामले को स्थायी रूप से बंद कर दिया है। कोर्ट ने केस को खारिज कर दिया है, यानी अब इसे दोबारा नहीं खोला जा सकेगा। इससे अडानी समूह को बड़ी कानूनी और कारोबारी राहत मिली है।

भारत के बड़े उद्योगपति गौतम अडानी (Gautam Adani) और उनके भतीजे सागर अडानी (Sagar Adani) को लेकर अमेरिका से बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिकी न्याय विभाग (US Department of Justice) ने उन सभी आपराधिक मामलों को स्थायी रूप से बंद कर दिया है, जिनमें गौतम अडानी और सागर अडाणी पर सिक्योरिटीज फ्रॉड और वायर फ्रॉड जैसे आरोप लगाए गए थे। इस फैसले के बाद अडानी ग्रुप के खिलाफ चल रही एक बड़ी कानूनी लड़ाई खत्म हो गई है और कंपनी के लिए यह बड़ा राहत भरा मोड़ माना जा रहा है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।
दरअसल, साल 2024 के आखिर में अमेरिका में अडानी ग्रुप के खिलाफ जांच शुरू हुई थी। आरोप था कि भारत में सोलर प्रोजेक्ट्स से जुड़े कुछ कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए कथित तौर पर गलत जानकारी और निवेशकों से जुड़े नियमों का उल्लंघन किया गया। अमेरिकी एजेंसियों का दावा था कि करीब 265 मिलियन डॉलर के कथित रिश्वत मामले और निवेशकों को दी गई जानकारी में गड़बड़ी हुई थी। हालांकि, अडानी ग्रुप लगातार इन आरोपों को गलत और बेबुनियाद बताता रहा।
अब अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत में दाखिल दस्तावेजों में साफ कहा है कि वह इस मामले में आगे संसाधन खर्च नहीं करना चाहता और आरोपों को जारी रखने के लिए पर्याप्त आधार नहीं मिले। इसके बाद कोर्ट ने केस को ‘विथ प्रिज्यूडिस’ के साथ खारिज कर दिया। इसका मतलब यह है कि अब इस मामले को दोबारा खोला नहीं जा सकेगा।
इससे पहले अमेरिकी सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने भी अडानी परिवार के साथ एक सिविल सेटलमेंट किया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गौतम अडानी (Gautam Adani) ने करीब 6 मिलियन डॉलर और सागर अडानी (Sagar Adani) ने लगभग 12 मिलियन डॉलर का भुगतान किया था। हालांकि, दोनों ने किसी भी गलती को स्वीकार नहीं किया।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मामले में अमेरिका से सीधा संबंध साबित नहीं हो पाया। अडानी पक्ष के वकीलों ने कोर्ट में दलील दी थी कि यह पूरा मामला भारत से जुड़ा है, संबंधित कंपनियां भारतीय हैं और जिन बॉन्ड्स की बात हो रही है वे अमेरिकी एक्सचेंजों पर ट्रेड नहीं होते। ऐसे में अमेरिकी कानूनों का इस्तेमाल सीमित होना चाहिए।
बताया जा रहा है कि अडानी ग्रुप की तरफ से अमेरिका की कई बड़ी लॉ फर्म्स ने मजबूती से पैरवी की। लंबी समीक्षा के बाद अमेरिकी न्याय विभाग ने फैसला लिया कि केस को आगे बढ़ाना उचित नहीं है।
इस फैसले को अडानी ग्रुप के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से विदेशी निवेशकों और ग्लोबल प्रोजेक्ट्स को लेकर जो अनिश्चितता बनी हुई थी, अब उसमें कमी आ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे अडानी समूह की अंतरराष्ट्रीय कारोबारी योजनाओं और निवेशकों के भरोसे को फिर मजबूती मिल सकती है।
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Sarveshwar Pathakसर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए
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उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी
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