US-ईरान जंग का असर आपकी जेब पर...खुदरा के बाद थोक महंगाई में भी उछाल

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मुख्य बातें

  • जून के महीने में थोक मुद्रास्फीति बढ़कर 9.87 प्रतिशत हो गई
  • मई में यह 9.68 प्रतिशत थी
  • खुदरा या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति भी जून में बढ़कर 17 महीने के उच्चस्तर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई थी
महंगाई का नया झटका: तेल, चावल, चीनी और टमाटर के दाम सुनकर उड़ जाएंगे होश

WPI inflation data: पश्चिम एशिया संकट, होर्मुज जलडमरूमध्य की प्रभावी नाकेबंदी और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल ने आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाला है। दरअसल, वैश्विक स्तर पर बदलते हालात का असर थोक महंगाई के आंकड़ों पर पड़ा है। आंकड़े बताते हैं कि जून के महीने में थोक मुद्रास्फीति बढ़कर 9.87 प्रतिशत हो गई। मई में यह 9.68 प्रतिशत थी। बता दें कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच कई महीनों से तनाव है।

क्या कहते है आंकड़े

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) के आंकड़े जारी करते हुए कहा कि थोक मुद्रास्फीति के जून 2026 के आंकड़े पर खनिज तेल (जिसमें पेट्रोलियम उत्पाद शामिल हैं), खाद्य वस्तुएं, मैन्युफैक्चरर मेटल और केमिकल प्रोडक्ट आदि की कीमतों का असर दिखा। मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, ईंधन और बिजली की कैटेगरी में थोक मुद्रास्फीति जून में 27.41 प्रतिशत रही जबकि मई में यह 30.33 प्रतिशत थी। खाद्य वस्तुओं में मुद्रास्फीति जून में बढ़कर 5.49 प्रतिशत हो गई जो मई में 3.60 प्रतिशत थी। गैर-खाद्य वस्तुओं में थोक महंगाई 11.07 प्रतिशत रही जबकि खनिज श्रेणी में यह 9.45 प्रतिशत दर्ज की गई।

खुदरा महंगाई 17 महीने के हाई पर

बता दें कि खुदरा या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित मुद्रास्फीति भी जून में बढ़कर 17 महीने के उच्चस्तर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई थी, जबकि इससे पिछले महीने यह 3.93 प्रतिशत थी। नए बेस ईयर 2024 वाली सीरीज के तहत खुदरा मुद्रास्फीति पहली बार चार प्रतिशत के स्तर के पार गई है।

क्या-क्या हुआ महंगा?

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जून में सबसे अधिक महंगाई चांदी, सोना, हीरा और प्लैटिनम के आभूषण, अदरक, टमाटर और किशमिश के अलावा मुनक्का की कीमतों में दर्ज की गई। दूसरी तरफ, आलू, मटर, कार अैर जीप, जीरा, मोटरसाइकिल और स्कूटर जैसी वस्तुओं में अपेक्षाकृत कम महंगाई रही। सरकारी आंकड़े से पता चलता है कि राज्यों में तेलंगाना में सबसे अधिक 6.36 प्रतिशत और मिजोरम में सबसे कम 1.63 प्रतिशत महंगाई दर्ज की गई।

आरबीआई का अनुमान

बता दें कि सरकार ने आरबीआई को खुदरा मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत पर बनाए रखने का लक्ष्य दिया हुआ है, जिसमें दो प्रतिशत की घट-बढ़ संभव है। केंद्रीय बैंक ने जून में हुई पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था। हालांकि, आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए मुद्रास्फीति के अपने अनुमान को पिछले महीने 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया था। इसके लिए वैश्विक ऊर्जा कीमतों में वृद्धि का असर खुदरा पेट्रोल और डीजल कीमतों पर पड़ने से लागत बढ़ना मुख्य वजह बताई गई थी।

Deepak Kumar

लेखक के बारे में

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हिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।

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