UPI के नए नियम: सरकार ने किसको दी राहत, किसे देना होगा चार्ज?
मुख्य बातें
- UPI: नई व्यवस्था से केवल करीब चार प्रतिशत व्यापारी लेनदेन ही प्रभावित होंगे
- इसकी वजह है कि अधिकांश लेनदेन या तो 2,000 रुपये की सीमा से कम हैं या पी2एम छूट के दायरे में आते हैं

सरकार ने कहा कि यूपीआई ऐप प्रोवाइडर को डिजिटल प्लैटफॉर्म चार्ज या छिपे हुए शुल्क लगाने की अनुमति नहीं होगी। बैंकों को यह सुनिश्चित करने को भी कहा गया है कि व्यापारी इस नए शुल्क का बोझ ग्राहकों पर न डालें। इसके अलावा, व्यक्तिगत UPI ट्रांजैक्शन के लिए कोई मासिक कोटा या मुफ्त लेनदेन की संख्या पर सीमा नहीं होगी।
यूपीआई क्यूआर कोड के जरिये हर महीने एक लाख रुपये तक पाने वाले छोटे व्यापारी नई व्यवस्था के तहत शून्य एमडीआर का लाभ लेते रहेंगे। अगर कोई व्यापारी लगातार तीन महीने तक एक लाख रुपये से अधिक का मासिक लेनदेन करता है, तो उसे सामान्य P2M कैटेगरी में रखा जाएगा।
सरकार के अनुसार, नई व्यवस्था से केवल करीब चार प्रतिशत व्यापारी लेनदेन ही प्रभावित होंगे। इसकी वजह है कि अधिकांश लेनदेन या तो 2,000 रुपये की सीमा से कम हैं या पी2एम छूट के दायरे में आते हैं।
नई एमडीआर व्यवस्था केवल डारेक्ट यूजर के बैंक खाते से व्यापारी के खाते में होने वाले यूपीआई पेमेंट पर लागू होगी। यूपीआई पर रुपे क्रेडिट कार्ड या पहले से मंजूर ‘क्रेडिट लाइन’ के जरिये होने वाले पेमेंट अलग नियमों के तहत आएंगे।
छह साल से लागू थी शून्य शुल्क सेवा
शून्य एमडीआर व्यवस्था जनवरी, 2020 से लागू थी और इसका उद्देश्य डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना था। हालांकि, बैंक और वित्तीय-प्रौद्योगिकी (फिनटेक) कंपनियां इसे टिकाऊ नहीं बताते हुए शुल्क फिर से लागू करने की लंबे समय से मांग कर रही थीं। भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय राष्ट्रीय पेमेंट निगम (NPCI) भी पहले सरकार से इस नीति की समीक्षा करने का आग्रह कर चुके हैं।
सरकार ने तय किया है कि छोटे कारोबारियों के बीच यूपीआई के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए एक अलग कोष बनाया जाएगा। इसमें कुल एमडीआर से मिलने वाली राशि का पांच प्रतिशत योगदान दिया जाएगा।
इससे छोटे कारोबारियों के बीच यूपीआई स्वीकार्यता बढ़ाने, लगातार इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने और डिजिटल पेमेंट व्यवस्था में छोटे कारोबारियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए किया जाएगा। सरकार का मानना है कि नई एमडीआर व्यवस्था से यूपीआई को वित्तीय रूप से अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी।
UPI पेमेंट के नए नियम को लेकर सवाल और उनके जवाब
दूध-सब्जी की खरीदारी हो, बिजली का बिल, यूपीआई हमारी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। ऐसे में एमडीआर को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच क्या आपकी जेब पर कोई अतिरिक्त भार पड़ेगा? जानते हैं 10 सीधे सवालों और जवाबों में समझते हैं पूरा गणित।
- क्या बीमा प्रीमियम के पेमेंट पर भी सामान्य प्रतिशत के हिसाब से एमडीआर लगेगा?
नहीं। 2,000 से अधिक के बीमा प्रीमियम पेमेंट पर विशेष रियायती व्यवस्था के तहत पांच रुपये का फ्लैट एमडीआर लागू होगा। इससे बड़े वार्षिक या छमाही प्रीमियम पर प्रतिशत आधारित शुल्क का बोझ कम रहेगा।
2. क्या यूपीआई एमडीआर लागू होने से ऑटो-पे महंगे होंगे?
नहीं। यूपीआई मैंडेट या ऑटो-पे के तहत होने वाले नियमित पेमेंट पर निर्धारित एमडीआर नहीं लगेगा। बिजली-पानी के बिल, ओटीटी सदस्यता, म्यूचुअल फंड निवेश जैसे आवर्ती पेमेंट प्रभावित नहीं होंगे।
3. बिजली और पानी जैसे सरकारी बिलों पर एमडीआर कितना होगा?
2,000 रुपये से अधिक के बिजली, पानी और पाइप्ड प्राकृतिक गैस जैसे उपयोगिता बिलों पर 0.4 प्रतिशत की दर के बजाय पांच रुपये का फ्लैट एमडीआर लागू होगा। 2,000 तक के पेमेंट पर एमडीआर शून्य रहेगा।
4. एमडीआर का पेमेंट आखिर कौन करता है?
एमडीआर मूल रूप से डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले कारोबारी या संस्था से जुड़ा शुल्क है। इसका उद्देश्य पेमेंट प्रक्रिया में शामिल विभिन्न पक्षों की लागत को कवर करना है।
5. पेट्रोल पंप पर यूपीआई से 2,000 से अधिक का पेमेंट करने पर कितना एमडीआर लगेगा?
2,000 रुपये से अधिक के ईंधन पेमेंट पर पांच रुपये का फ्लैट एमडीआर लागू होगा। 2,000 रुपये तक के ईंधन पेमेंट पर एमडीआर शून्य रहेगा। रोजाना ईंधन भराने वाले ग्राहकों और पेट्रोल पंप कारोबारियों पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ सीमित होगा।
6. यूपीआई पर एमडीआर पारंपरिक डेबिट और क्रेडिट कार्ड से कैसे अलग है?
क्रेडिट कार्ड पर आमतौर पर 1.5 से 2.5 प्रतिशत तक एमडीआर लगता है, जबकि डेबिट कार्ड पर यह 0.90 प्रतिशत तक हो सकता है। यूपीआई पर 2,000 से अधिक के लेनदेन के लिए 0.4% और अधिकतम 300 की सीमा इसे कारोबारियों के लिए कम लागत वाला विकल्प बनाती है।
7. एमडीआर से आम ग्राहक को क्या फायदा होगा?
डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की लागत को नियंत्रित रखा जा सकता है। बीमा, ईंधन, उपयोगिता बिल और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में रियायती या शून्य एमडीआरसे कारोबारियों की लागत कम होगी।
8. क्या छोटे कारोबारियों को अपने पुराने यूपीआई क्यूआर कोड बदलने होंगे?
नहीं। मौजूदा यूपीआई क्यूआर कोड पहले की तरह काम करते रहेंगे। कारोबारियों को नया क्यूआर लगाने, दोबारा पंजीकरण कराने या अपने साउंडबॉक्स बदलने की जरूरत नहीं होगी।
9. क्या है एमडीआर
मर्चेंट डिस्काउंट रेट' (MDR) वह शुल्क है जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले किसी व्यापारी से लिया जाता है। इसे डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की कारोबारी की लागत भी कहा जा सकता है। डिजिटल पेमेंट की प्रक्रिया में बैंक, पेमेंट नेटवर्क और पेमेंट सेवा प्रदाता जैसे कई पक्ष शामिल होते हैं। एमडीआर शुल्क इनकी पेमेंट प्रक्रिया से जुड़ी लागत को पूरा करने में इस्तेमाल होता है।


