ट्रंप की नई 100000 डॉलर H‑1B वीजा फीस से कंपनियों में हलचल, वॉलमार्ट ने भर्ती पर लगाई रोक
कंपनियों को प्रत्येक नए H‑1B वीजा आवेदन पर $100,000 की फीस देनी होगी। पहले वॉलमार्ट हर साल बड़ी संख्या में विदेशी कुशल पेशेवरों की भर्ती करता था, जिनमें भारत और चीन से आने वाले तकनीकी कर्मियों की संख्या अधिक होती थी, लेकिन अब इतनी भारी फीस देने से इसकी भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
अमेरिका की सबसे बड़ी निजी नियोक्ता कंपनी वॉलमार्ट ने हाल ही में यह घोषणा की कि वह अब H‑1B वीजा की आवश्यकता वाले उम्मीदवारों को फिलहाल नौकरी के ऑफर नहीं देगी। यह निर्णय ट्रंप प्रशासन द्वारा नई नीति लागू करने के बाद आया है, जिसमें कंपनियों को प्रत्येक नए H‑1B वीजा आवेदन पर 100,000 डॉलर (लगभग ₹87 लाख) की फीस देनी होगी।
नई नीति का असर
यह बदलाव वॉलमार्ट की कॉर्पोरेट (कार्यालय) टीम पर सबसे अधिक प्रभाव डाल रहा है। पहले वॉलमार्ट हर साल बड़ी संख्या में विदेशी कुशल पेशेवरों की भर्ती करता था, जिनमें भारत और चीन से आने वाले तकनीकी कर्मियों की संख्या अधिक होती थी, लेकिन अब इतनी भारी फीस देने से इसकी भर्ती प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
ट्रंप प्रशासन की दलील
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि यह कदम उस "दुरुपयोग" को रोकने के लिए है, जो H‑1B सिस्टम में वर्षों से हो रहा है। उनका उद्देश्य है कि इस वीजा प्रोग्राम को पुनर्गठित किया जाए ताकि अमेरिकी नागरिकों को प्राथमिकता मिले। हालांकि, यह कदम भारतीय पेशेवरों को सबसे ज्यादा प्रभावित करेगा, क्योंकि अब तक कुल H‑1B वीजा में से लगभग 70 प्रतिशत भारत के लोगों को मिले हैं।
वॉलमार्ट ने क्या कहा
कंपनी की प्रवक्ता ने कहा कि वॉलमार्ट सर्वश्रेष्ठ प्रतिभा को नियुक्त करने और अपने ग्राहकों के लिए निवेश करने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में “अपने H‑1B हायरिंग दृष्टिकोण को सोच-समझकर अपनाना” ही बेहतर रहेगा। यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि कंपनी अस्थायी रूप से वीजा से संबंधित भर्तियों में सावधानी बरत रही है।
उद्योग जगत में चिंता
अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स और कई टेक कंपनियों ने इस नीति की आलोचना की है। उनका कहना है कि इतनी भारी फीस देने से खासतौर पर स्टार्टअप और मध्यम आकार की कंपनियों के लिए विदेशी प्रतिभाशाली लोगों को नौकरी पर रखना असंभव हो जाएगा। कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, यह “मनमाना” आंकड़ा कार्यबल संरचना को अस्थिर कर सकता है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रतिभा की कमी को और बढ़ा देगा।
आगे की स्थिति
हालांकि ट्रंप प्रशासन का दावा है कि यह कदम “आवश्यक सुधारों की दिशा में इंक्रिमेंटल स्टेप” है, मगर इसका असर न केवल वॉलमार्ट बल्कि पूरे अमेरिकी रोजगार बाजार पर देखा जा रहा है। टेक्नोलॉजी और रिटेल दोनों ही उद्योग आने वाले महीनों में अपनी रणनीतियों को इसके अनुसार ढालने पर मजबूर होंगे।
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