ट्रंप के नए शिगूफे से निवेशकों को दो दिन में 13 लाख करोड़ का झटका
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए शिगूफे ने मंगलवार को दुनियाभर में हलचल मचा दी। इसका असर भारत समेत दुनिया के बाजार में दिखा। भारतीय निवेशकों के दो दिनों में 13 लाख करोड़ रुपये डूब गए।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए शिगूफे ने मंगलवार को दुनियाभर में हलचल मचा दी। ट्रंप ने एक तस्वीर साझा करते हुए अमेरिका के नए नक्शे में ग्रीनलैंड और कनाडा को दर्शाया। वहीं, पीस बोर्ड का समर्थन नहीं करने पर उन्होंने फ्रांसीसी वाइन और शैंपेन पर 200%आयात शुल्क लगाने की धमकी दी। इसका असर भारत समेत दुनिया के बाजार में दिखा। भारतीय निवेशकों के दो दिनों में 13 लाख करोड़ रुपये डूब गए।
गाजा और अन्य वैश्विक संघर्षों को सुलझाने के लिए शांति बोर्ड की पहल का फ्रांस द्वारा समर्थन नहीं करने पर ट्रंप ने कहा, राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को कोई नहीं चाहता, क्योंकि वह जल्द पद से हटने वाले हैं। मैं उनकी वाइन एवं शैंपेन पर 200 प्रतिशत आयात शुल्क लगा दूंगा और वह बोर्ड में शामिल हो जाएंगे, लेकिन उन्हें शामिल होने की कोई जरूरत नहीं है। एक अन्य बयान में ट्रंप ने कहा, ग्रीनलैंड पर नियंत्रण के लक्ष्य से पीछे हटने का सवाल ही नहीं है।
दुनिया के शेयर बाजार भी फिसले
ट्रंप के नए रुख से निवेशकों में अनिश्चितता बढ़ गई, जिसका असर एशिया, यूरोप और अमेरिका-तीनों प्रमुख बाजारों पर दिखा। एशिया के अन्य बाजारों में दक्षिण कोरिया का कॉस्पी, जापान का निक्की, चीन का शंघाई कंपोजिट और हांगकांग का हैंगसेंग सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। यूरोप के बाजारों में कारोबार के दौरान एक प्रतिशत से अधिक की कमजोरी देखी गई। अमेरिकी बाजार सोमवार को अवकाश के कारण बंद रहे।
भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच मंगलवार को प्रमुख कंपनियों में भारी बिकवाली आने से घरेलू शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स 1,066 अंक लुढ़क गया जबकि निफ्टी 353 अंक टूटा।
आठ माह की एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट
यह प्रतिशत के मामले में बीते आठ माह की एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट रही। इससे पहले इतनी बड़ी गिरावट 13 मई 2025 को दर्ज की गई थी। कारोबारियों ने कहा कि प्रतिकूल वैश्विक हालात में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट जारी रहने से निवेशकों की धारणा पर प्रतिकूल असर पड़ा।
जनवरी 2026 में अब तक स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहा है। इस महीने इंडेक्स करीब 6.3 प्रतिशत टूटा है, जबकि इसी दौरान सेंसेक्स में करीब 2.8 प्रतिशत की गिरावट आई है।
निफ्टी रियल्टी में सबसे ज़्यादा 5% की गिरावट
सभी प्रमुख प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए, जिसमें निफ्टी रियल्टी में सबसे ज़्यादा 5% की गिरावट आई, इसके बाद निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी केमिकल्स में से प्रत्येक में 2.7% की गिरावट आई। निफ्टी ऑटो, निफ्टी आईटी, निफ्टी फार्मा, निफ्टी मीडिया, निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी एफएमसीजी सहित अन्य सेक्टरों में 1.5% से 2.5% के बीच गिरावट आई।
दो सत्रों में 13 लाख करोड़ डूबे
लगातार दो दिन में 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1400 से अधिक अंक, यानी 2% गिर गया, जबकि निफ्टी 50 भी दो फीसदी टूटा है। इसमें निवेशकों को करीब 13 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ, क्योंकि बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण शुक्रवार को करीब 468 लाख करोड़ रुपये से गिरकर करीब 455 लाख करोड़ रुपये हो गया।
गिरावट की वजहें
-ग्रीनलैंड के मुद्दे पर ट्रेड वॉर का डर
-कंपनियों के मिले-जुले तिमाही नतीजे
-विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
-सोना-चांदी खींच रहे बाजार का पैसा
-बजट से पहले निवेशकों की घबराहट
आगे भी बना रहेगा उतार चढ़ाव
जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में जियो पॉलिटिकल और जियो इकोनॉमिक मुद्दे बाजार की दिशा तय करेंगे। खास तौर पर अमेरिका और यूरोप के बीच ग्रीनलैंड टैरिफ को लेकर चल रहे तनाव से बाजार में अनिश्चितता बनी रहेगी।

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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया:-लाइव हिन्दुस्तान में पिछले 6 साल से बिजनेस टीम का अहम हिस्सा हैं। दृगराज को पत्रकारिता में 21 वर्षों का लंबा अनुभव है। इन्होंने टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में अपनी स्पेशल खबरों से खास पहचान बनाई है। शेयर मार्केट, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी पर विशेष पकड़। मैथ्स से ग्रेजुएट, मास कम्युनिकेशन और कंप्यूटर साइंस में पीजी डिप्लोमा। दृगराज, रिसर्च और एनॉलिस के जरिए मार्केट डेटा को आसान भाषा में 'कुछ अलग' पाठकों तक पहुंचाते हैं। लाइव हिन्दुस्तान से पहले साढ़े सात साल तक हिन्दुस्तान अखबार में बतौर सीनियर रिपोर्टर काम किया। इसके अलावा सहारा समय, दैनिक जागरण, न्यूज नेशन में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
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