SpaceX IPO को लेकर जबरदस्त उत्साह, 75 अरब डॉलर के इश्यू पर टूटे निवेशक, भारतीय कैसे लगा पाएंगे पैसा?

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मुख्य बातें

  • SpaceX IPO: कई बड़े संस्थागत निवेशकों ने अकेले 10 अरब डॉलर या उससे अधिक के शेयर खरीदने के ऑर्डर दिए हैं
  • SpaceX का अनुमानित वैल्युएशन करीब 1.75 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े IPO में से एक बन सकता है
SpaceX IPO को लेकर जबरदस्त उत्साह, 75 अरब डॉलर के इश्यू पर टूटे निवेशक, भारतीय कैसे लगा पाएंगे पैसा?

एलन मस्क की दुनिया की सबसे बड़ी निजी अंतरिक्ष कंपनी SpaceX के प्रस्तावित IPO को लेकर निवेशकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। रॉयटर्स के मुताबिक, करीब 75 अरब डॉलर के इस मेगा IPO को निवेशकों से उम्मीद से कहीं ज्यादा प्रतिक्रिया मिली है और यह इश्यू पहले ही कई गुना सब्सक्राइब हो चुका है।

वहीं, SpaceX IPO में सीधे निवेश करना भारतीय खुदरा निवेशकों के लिए आसान नहीं होगा। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म, GIFT City के माध्यम से उपलब्ध FIO या लिस्ट होने के बाद अमेरिकी शेयर बाजार में निवेश के जरिए भारतीय निवेशक SpaceX में हिस्सेदारी लेने का अवसर पा सकते हैं।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कई बड़े संस्थागत निवेशकों ने अकेले 10 अरब डॉलर या उससे अधिक के शेयर खरीदने के ऑर्डर दिए हैं। SpaceX का अनुमानित वैल्युएशन करीब 1.75 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े IPO में से एक बन सकता है।

AI डेटा सेंटर को अंतरिक्ष में ले जाने की तैयारी

IPO से पहले SpaceX के CEO एलन मस्क ने कंपनी की भविष्य की रणनीति पर बड़ा खुलासा किया है। मस्क ने कहा कि अंतरिक्ष में AI डेटा सेंटर बनाना कोई बेहद कठिन इंजीनियरिंग चुनौती नहीं है, क्योंकि इसके लिए जरूरी अधिकांश तकनीक कंपनी पहले से ही अपने स्टारलिंक सैटेलाइट नेटवर्क में इस्तेमाल कर रही है।

मस्क के मुताबिक, कंपनी ऐसे AI सैटेलाइट विकसित कर रही है जो अंतरिक्ष में कंप्यूटिंग नोड्स की तरह काम करेंगे। ये सौर ऊर्जा से संचालित होंगे और अंतरिक्ष में ही अपनी गर्मी बाहर निकालकर खुद को ठंडा रख सकेंगे।

एक AI सैटेलाइट की ताकत एनवीडिया सर्वर के बराबर

SpaceX के अनुसार, शुरुआती AI सैटेलाइट लगभग 150 किलोवाट पीक पावर और 120 किलोवाट कंप्यूटिंग क्षमता प्रदान कर सकेंगे। मस्क ने बताया कि यह क्षमता लगभग Nvidia GB300 AI सर्वर रैक के बराबर है, जो करीब 140 किलोवाट बिजली खपत करता है। कंपनी का मानना है कि भविष्य में AI डेटा सेंटरों की बढ़ती बिजली जरूरतों को देखते हुए अंतरिक्ष आधारित कंप्यूटिंग एक बड़ा समाधान बन सकती है।

स्टारलिंक तकनीक बनेगी आधार

SpaceX इंजीनियर इयान डाहल के अनुसार, ये AI सैटेलाइट Starlink V3 सैटेलाइट्स की कई तकनीकों का इस्तेमाल करेंगे। इनमें अपग्रेडेड सोलर पैनल, टेम्परेचर मैनेजमेंट सिस्टम और अन्य महत्वपूर्ण हार्डवेयर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि AI सैटेलाइट्स को Starlink की तरह बड़े कम्युनिकेशन एंटीना की जरूरत नहीं होगी, इसलिए इनका डिजाइन अपेक्षाकृत सरल होगा।

स्टारशिप देगा विस्तार की ताकत

कंपनी का कहना है कि उसका पुन: इस्तेमाल करने लायक रॉकेट स्टारशिप भविष्य में बड़े पैमाने पर सोलर पैनल, कंप्यूटर चिप्स और अन्य उपकरण अंतरिक्ष में पहुंचाने में मदद करेगा। इससे ऑर्बिटल कंप्यूटिंग नेटवर्क को तेजी से विस्तार दिया जा सकेगा। मस्क ने बताया कि टेक्सास के बैस्ट्रोप स्थित SpaceX की AI सैटेलाइट फैक्ट्री अगले साल के अंत तक बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर सकती है।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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