गिरते मार्केट में रॉकेट बन गया यह शेयर, 12% की ऊंची उड़ान, चार साल में सबसे बड़ी तेजी के पीछे क्या है वजह
मुख्य बातें
- थर्मैक्स का जनवरी-मार्च तिमाही का नेट मुनाफा 244.3 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल इसी तिमाही से 19% अधिक है
- थर्मैक्स के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 14 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने की सिफारिश की है

आज जहां शेयर मार्केट में गिरावट है वहीं थर्मैक्स लिमिटेड के शेयर रॉकेट बने हुए हैं। इनमें एक दिन में 12% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह पिछले चार सालों में शेयरों में आई सबसे बड़ी एक-दिन की तेजी है। इस उछाल का मुख्य कारण कंपनी द्वारा जारी किए गए चौथी तिमाही के नतीजे हैं, जो बाजार की सभी उम्मीदों से बेहतर रहे। शेयर दोपहर सवा 12 बजे के करीब 4,700 रुपये पर था।
कंपनी का मुनाफा अनुमान से कहीं ज्यादा
थर्मैक्स का जनवरी-मार्च तिमाही का नेट मुनाफा 244.3 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल इसी तिमाही से 19% अधिक है। सीएनबीसी-टीवी18 के अनुमान में 219 करोड़ रुपये का मुनाफा होने का अनुमान लगाया गया था। कंपनी की कुल आय (रेवेन्यू) भी बढ़कर 3,428 करोड़ रुपये हो गई, जबकि अनुमान 3,277 करोड़ रुपये का था। यानी कंपनी ने आय के मामले में भी उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया।
EBITDA और मार्जिन में भी शानदार सुधार
कंपनी का EBITDA 24.9% बढ़कर 374.3 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। मार्केट को इसके 322 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद थी। इसके अलावा, कंपनी का EBITDA मार्जिन भी पिछले साल के 9.8% से बढ़कर 10.9% हो गया। यह भी अनुमान (9.8%) से काफी ऊपर रहा।
डिविडेंड और बड़े ऑर्डर ने बढ़ाया भरोसा
थर्मैक्स के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 14 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने की सिफारिश की है। इसके अलावा, कंपनी ने बताया कि तिमाही के दौरान उसे 1,600 करोड़ रुपये का एक बड़ा बॉयलर पैकेज ऑर्डर मिला है। इससे कंपनी की भविष्य में ग्रोथ को लेकर संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।
किन सेगमेंट्स पर रहा दबाव?
हालांकि, सभी सेगमेंट का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। कंपनी ने बताया कि केमिकल्स सेगमेंट में कच्चे माल की लागत बढ़ने और उत्पादों के मिश्रण में बदलाव के कारण मुनाफा कम रहा। वहीं ग्रीन सॉल्यूशंस वाले कारोबार में प्रोजेक्ट की बढ़ी हुई लागत से मार्जिन पर दबाव पड़ा।
कंपनी के फंडामेंटल्स और टेक्निकल चार्ट क्या कह रहे
थर्मैक्स के Screener डेटा के अनुसार कंपनी के फंडामेंटल काफी मजबूत हैं। सेल्स और प्रॉफिट दोनों में पिछले कुछ वर्षों में अच्छी ग्रोथ दिखी है। ROCE लगभग 16% और ROE करीब 13% है, जो इंजीनियरिंग सेक्टर के हिसाब से अच्छे माने जाते हैं। कंपनी पर कर्ज भी बहुत ज्यादा नहीं है और ऑपरेटिंग धीरे-धीरे सुधर रहे हैं।
हालांकि वैल्युएशन इस समय सबसे बड़ी चिंता है। कंपनी का P/E लगभग 70 के आसपास चल रहा है, जो सेक्टर से काफी ऊपर माना जाएगा। इसका मतलब बाजार भविष्य की ग्रोथ को पहले ही काफी कीमत में जोड़ चुका है। P/B रेशियो भी ऊंचा है, जिससे शेयर एक्सपेंसिव जोन में दिखता है। इसलिए फंडामेंटल्स मजबूत होने के बावजूद शॉर्ट टर्म में अपसाइड सीमित हो सकता है और करेक्शन का रिस्क भी बना रहता है। लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह क्वालिटी स्टॉक माना जा सकता है, लेकिन नए निवेश के लिए वैल्युएशन पर सावधानी जरूरी है।
(डिस्क्लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। यहां सिर्फ शेयर के परफॉर्मेंस की जानकारी दी गई है, यह निवेश की सलाह नहीं है। शेयर मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)
लेखक के बारे में
Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


