₹890 करोड़ के GST विवाद में टाटा स्टील की जीत! सुप्रीम कोर्ट ने टैक्स डिमांड की खारिज

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मुख्य बातें

  • टाटा स्टील को ₹890.52 करोड़ के GST विवाद में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है
  • कोर्ट ने कंपनी पर लगाई गई ₹890.52 करोड़ की टैक्स डिमांड, इतनी ही राशि की पेनल्टी और लागू ब्याज को रद्द कर दिया है
  • आइए इसको जरा विस्तार से समझते हैं

Tata Steel
टाटा स्टील पर ₹890 करोड़ का GST टैक्स डिमांड और जुर्माना सुप्रीम कोर्ट ने किया रद्द।

टाटा स्टील (Tata Steel) को लंबे समय से चल रहे करीब ₹890.52 करोड़ के GST विवाद में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी के खिलाफ जारी ₹890.52 करोड़ के टैक्स डिमांड, इतनी ही राशि की पेनल्टी और उस पर लागू ब्याज को रद्द कर दिया है, यानी टैक्स और पेनल्टी की कुल रकम करीब ₹1,781 करोड़ थी, जिसमें ब्याज शामिल नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने टैक्स विभाग को कुछ शर्तों के तहत दोबारा कार्रवाई शुरू करने की सीमित अनुमति भी दी है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं।

मिंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने बुधवार 26 अगस्त को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने उसकी अपील स्वीकार कर ली है। इसके साथ ही CGST और सेंट्रल एक्साइस अधिकारियों, जमशेदपुर की ओर से जारी जून 2025 के शो कॉज नोटिस और दिसंबर 2025 के आदेश को भी रद्द कर दिया गया है। टाटा स्टील (Tata Steel) के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ₹890.52 करोड़ की टैक्स डिमांड, इतनी ही राशि की पेनल्टी और लागू ब्याज की देनदारी फिलहाल खत्म हो गई है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला इनकम टैक्स क्रेडिट (Input Tax Credit) ITC से जुड़ा था। GST व्यवस्था में कंपनियां कारोबार के दौरान खरीदे गए योग्य सामान और सेवाओं पर चुकाए गए टैक्स का क्रेडिट लेकर अपनी बिक्री पर बनने वाली GST देनदारी को कम कर सकती हैं। टैक्स अधिकारियों का आरोप था कि टाटा स्टील (Tata Steel) ने वित्त वर्ष 2018-19 से 2020-21 के बीच करीब ₹890.52 करोड़ का ITC गलत तरीके से क्लेम किया था। इसी आधार पर विभाग ने टैक्स की वसूली के साथ ब्याज और बराबर राशि की पेनल्टी लगाने की मांग की थी।

टाटा स्टील (Tata Steel) ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा था कि उसने अतिरिक्त या गलत ITC क्लेम नहीं किया। कंपनी का तर्क था कि संबंधित टैक्स क्रेडिट एक वित्त वर्ष से जुड़ा था, लेकिन उसे अगले वित्त वर्ष में क्लेम किया गया और GST नियमों के तहत ऐसा करना अनुमत था। कंपनी ने टैक्स कार्रवाई के अधिकार क्षेत्र और समय-सीमा से जुड़े मुद्दे भी उठाए थे।

₹890.52 करोड़ की मांग को बरकरार

दिसंबर 2025 में टैक्स अथॉरिटी ने कंपनी के खिलाफ ₹890.52 करोड़ की मांग को बरकरार रखा और उतनी ही राशि की पेनल्टी भी लगाई। इसके बाद टाटा स्टील (Tata Steel) ने फरवरी 2026 में झारखंड हाईकोर्ट का रुख किया। अप्रैल में हाईकोर्ट ने मामले को अपीलीय प्राधिकरण के सामने ले जाने का रास्ता दिया, जिसके बाद कंपनी सुप्रीम कोर्ट पहुंची। सुप्रीम कोर्ट ने मई में मामले में नोटिस जारी कर आगे की कार्रवाई पर रोक लगाई। 19 अगस्त को सुनवाई हुई और 25 अगस्त को फैसला सुनाया गया।

निवेशक ध्यान रखें ये बात

हालांकि, निवेशकों को एक बात ध्यान में रखनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का फैसला मौजूदा टैक्स डिमांड और पेनल्टी को खत्म करता है, लेकिन विवाद को हर तरह से हमेशा के लिए समाप्त नहीं करता। कोर्ट ने टैक्स विभाग को CGST Act की सेक्शन 74 के तहत उचित शर्तों का पालन करते हुए नई कार्यवाही शुरू करने की सीमित अनुमति दी है। ऐसी किसी नई कार्यवाही में आदेश 28 फरवरी 2027 तक पारित किया जाना होगा। फिलहाल Tata Steel के लिए यह फैसला बड़ी राहत है, क्योंकि कंपनी पर लगी मौजूदा ₹890.52 करोड़ की GST डिमांड और बराबर की पेनल्टी रद्द हो चुकी है।

Sarveshwar Pathak

लेखक के बारे में

Sarveshwar Pathak

सर्वेश्वर पाठक अक्टूबर 2022 से ‘लाइव हिंदुस्तान’ में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में बिजनेस और ऑटो सेक्शन के लिए काम कर रहे हैं। सर्वेश्वर बिजनेस और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की खबरों, रिव्यू और गहराई से किए गए एनालिसिस के लिए जाने जाते हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 7 साल से अधिक का अनुभव है, जिसमें उन्होंने अपनी मजबूत पकड़ और समझ के जरिए एक अलग पहचान बनाई है। उन्होंने देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री हासिल की और वर्ष 2019 में ईटीवी भारत के साथ अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दैनिक जागरण और एडिटरजी जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया, जहां उन्होंने अपनी लेखन शैली और विश्लेषण क्षमता को और निखारा।

उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर से आने वाले सर्वेश्वर केवल एक पत्रकार ही नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय भागीदारी निभाते हैं। उन्हें बाल शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता से जुड़े अभियानों में विशेष रुचि है। अपने विश्वविद्यालय के दिनों में उन्होंने महाराष्ट्र के गोंदिया में दो महीने से अधिक समय तक सोशल वेलफेयर से जुड़े कार्य किए, जहां उन्होंने कई स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को उच्च शिक्षा के प्रति प्रेरित किया। लेखन के अलावा सर्वेश्वर को बचपन से ही क्रिकेट खेलने और डांस का शौक है, जो उनके व्यक्तित्व को संतुलित और ऊर्जावान बनाता है। उनका उद्देश्य सिर्फ खबरें लिखना ही नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक और प्रेरित करना भी है।

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