टाटा की इस कंपनी का चमकेगा विदेशी कारोबार... 250 रुपये तक जा सकता है शेयर

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मुख्य बातें

  • टाटा स्टील के शेयर की बात करें तो 187.15 रुपये पर है
  • बीते दिनों शेयर को लेकर ब्रोकरेज बुलिश थे
  • शेयर के लिए टारगेट प्राइस 250 रुपये तक है
टाटा का यह शेयर 7% टूटा, 52 वीक लो पर आया भाव, एक्सपर्ट्स ने दी बेचने की सलाह

Tata steel share target: टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा स्टील के शेयर गुरुवार को डिमांड में रहे। शेयर में तेजी ऐसे समय आई जब टाटा स्टील के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कंपनी के नीदरलैंड कारोबार से 400-500 मिलियन यूरो एबिटा मिलने की उम्मीद है। टाटा स्टील के शेयर को लेकर एक्सपर्ट भी बुलिश हैं। बता दें कि बीते दिनों ज्यादातर ब्रोकरेज ने 220 रुपये से ज्यादा का टारगेट प्राइस दिया था।

क्या है शेयर का परफॉर्मेंस?

टाटा स्टील के शेयर की बात करें तो 187.15 रुपये पर है। एक दिन पहले के मुकाबले यह शेयर 1.08% बढ़कर बंद हुआ। मई 2026 में शेयर 224.40 रुपये तक गया था। यह शेयर के 52 हफ्ते का हाई है। अगस्त 2025 में शेयर 152.55 रुपये के निचले स्तर पर आ गया। यह शेयर के 52 हफ्ते का लो है। बीते दिनों ब्रोकरेज यस सिक्योरिटीज ने इस शेयर के लिए 'एड' रेटिंग और 240 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है।

ब्रोकरेज Axis सिक्योरिटीज ने इस स्टॉक पर 'होल्ड' रेटिंग दी है और इसका टारगेट प्राइस 235 रुपये तय किया। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल ने टाटा ग्रुप के इस शेयर के लिए 250 रुपये का प्राइस टारगेट तय किया है।

नीदरलैंड कारोबार पर चेयरमैन ने क्या कहा?

टाटा स्टील के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने गुरुवार को कंपनी की 119वीं सालाना आम बैठक में कहा कि चालू वित्त वर्ष में कंपनी के नीदरलैंड ऑपरेशन्स से 400-500 मिलियन यूरो मिलने की उम्मीद है। साथ ही, इसे समय के साथ बढ़ाकर €800 मिलियन से €1 बिलियन तक ले जाने का लॉन्ग-टर्म लक्ष्य भी है। इस बैठक में शेयरहोल्डर्स ने इंटरनेशनल ऑपरेशन्स के परफॉर्मेंस को लेकर सवाल उठाए थे। डच ऑपरेशन्स ने FY26 में €267 मिलियन का EBITDA दर्ज किया था।

चंद्रशेखरन ने शेयरहोल्डर्स को बताया कि कंपनी ने यूरोप में हो रहे नुकसान को रोक लिया है लेकिन साथ ही यह भी कहा कि हमें अभी और काम करना है। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 2007 में टाटा स्टील द्वारा कोरस ग्रुप (जिसके स्टील बनाने वाले एसेट्स में UK और नीदरलैंड के प्लांट शामिल थे) को खरीदने के बाद से ही डच ऑपरेशन्स खुद से फंडेड रहे हैं। उन्होंने कहा कि खरीद के बाद से हमने नीदरलैंड्स को कोई फंड नहीं दिया है। इसके सभी ऑपरेशन्स खुद से कमाए गए कैश से ही चले हैं और इन्होंने पिछले कुछ सालों में लगभग €1 बिलियन का डिविडेंड भी दिया है।

ब्रिटेन के कारोबार पर भी चंद्रशेखरन ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कंपनी साउथ वेल्स के पोर्ट टैलबोट प्लांट में ब्लास्ट फर्नेस की जगह इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) लगाने की दिशा में काम कर रही है। करीब 1.25 अरब पाउंड की इस परियोजना को ब्रिटेन सरकार से 500 मिलियन पाउंड का समर्थन भी मिला है।

Deepak Kumar

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हिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।

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