कर्ज फ्री होने जा रही टाटा की यह कंपनी, 8 गुना बढ़ गया है मुनाफा, ₹196 का शेयर
कंपनी की ऑपरेशनल कमाई भी मजबूत रही और रेवेन्यू 6% से ज्यादा बढ़कर ₹56,646 करोड़ हो गया। मुनाफे में यह तेज़ उछाल लागत नियंत्रण, बेहतर मार्जिन और भारत में मजबूत मांग का नतीजा माना जा रहा है।

Tata Steel Q3 Result: टाटा ग्रुप की दिग्गज कंपनी टाटा स्टील ने अक्टूबर–दिसंबर तिमाही (Q3 FY26) में जबरदस्त नतीजे पेश किए हैं। 6 फरवरी को घोषित किए गए नतीजों के मुताबिक, कंपनी का कंसॉलिडेटेड शुद्ध मुनाफा साल-दर-साल 723% उछलकर यानी करीबन 8 गुना बढ़कर ₹2,689.70 करोड़ पहुंच गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह मुनाफा सिर्फ ₹326.64 करोड़ था। कंपनी की ऑपरेशनल कमाई भी मजबूत रही और रेवेन्यू 6% से ज्यादा बढ़कर ₹56,646 करोड़ हो गया। मुनाफे में यह तेज़ उछाल लागत नियंत्रण, बेहतर मार्जिन और भारत में मजबूत मांग का नतीजा माना जा रहा है। नतीजों के ऐलान के बाद एनएसई पर टाटा स्टील का शेयर 0.6% गिरकर ₹196.51 पर बंद हुआ।
क्या है डिटेल
मार्जिन के मोर्चे पर भी टाटा स्टील की स्थिति काफी सुधरी है। Q3 FY26 में कंपनी का नेट प्रॉफिट मार्जिन 0.55% से बढ़कर 4.79% हो गया। वहीं ऑपरेटिंग EBITDA मार्जिन 14.58% तक पहुंच गया, जो पिछले साल के मुकाबले काफी बेहतर है। फॉरेक्स एडजस्टमेंट के बाद कंपनी का कंसॉलिडेटेड EBITDA ₹8,276 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹7,155 करोड़ था। इससे साफ है कि कंपनी ने ऑपरेशनल लेवल पर अपनी पकड़ और मजबूत की है।
भारत में टाटा स्टील का प्रदर्शन खास तौर पर मजबूत रहा। कंपनी की भारतीय इकाई में उत्पादन 12% और डिलीवरी 14% बढ़ी। Q3 में डिलीवरी 6.04 मिलियन टन रही, जो पहली बार 6 मिलियन टन के आंकड़े को पार कर गई। कंपनी के CEO और MD टी. वी. नरेंद्रन ने कहा कि ऑटोमोटिव सेगमेंट में बिक्री 20% बढ़ी है, जबकि रिटेल बिजनेस में भी अच्छी रफ्तार देखने को मिली। हालांकि, कंपनी के यूके और नीदरलैंड्स ऑपरेशंस में मांग कमजोर रही। नीदरलैंड्स में रेवेन्यू €1.35 बिलियन और EBITDA €55 मिलियन रहा, जबकि यूके में ₹468 मिलियन पाउंड की कमाई के बावजूद £63 मिलियन का EBITDA घाटा दर्ज किया गया।
कर्ज घटाने पर फोकस
कंपनी ने लागत घटाने और कर्ज कम करने पर भी बड़ा फोकस रखा है। टाटा स्टील के CFO कौशिक चटर्जी के मुताबिक, कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन प्रोग्राम के तहत सिर्फ इस तिमाही में करीब ₹3,000 करोड़ की बचत हुई, जबकि पूरे 9 महीनों में यह बचत ₹8,600 करोड़ तक पहुंच गई। दिसंबर तिमाही के अंत में कंपनी का कंसॉलिडेटेड नेट कर्ज घटकर ₹81,834 करोड़ रह गया और ग्रुप की लिक्विडिटी ₹44,062 करोड़ रही।
लेखक के बारे में
Varsha Pathakवर्षा पाठक लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं और पिछले 4 सालों से इस संस्थान से जुड़ी हुई हैं। मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें लगभग 8 साल का अनुभव है। उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है। बिहार की रहने वाली वर्षा वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के बिजनेस सेक्शन के लिए खबरें लिखती हैं। उन्हें स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, यूटिलिटी, टैक्स, बजट, एक्सप्लेनर, इंटरव्यूज और कॉरपोरेट सेक्टर से जुड़ी खबरों की समझ है। जटिल आर्थिक विषयों को सरल, तथ्यात्मक और पाठकों के लिए उपयोगी भाषा में प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की विशेषता है। हिन्दुस्तान से पहले वर्षा दैनिक भास्कर (प्रिंट), मनी भास्कर और नेटवर्क18 जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुकी हैं। उन्हें फील्ड रिपोर्टिंग का अनुभव भी है। डिजिटल पत्रकारिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए वर्षा को मनी भास्कर में सबसे अधिक UVs-PVs का पुरस्कार मिल चुका है। इसके अलावा, लाइव हिन्दुस्तान में भी वर्षा का टॉप परफॉर्मेंस रहा है और इसके लिए पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।
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