₹29,000 करोड़ तक पहुंच सकता है टाटा का घाटा, नए बिजनेस डूबो रहे लुटिया

Apr 07, 2026 07:44 am ISTDrigraj Madheshia लाइव हिन्दुस्तान
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Tata Group के नए बिजनेस में बड़ा घाटा होने का अनुमान है। यह लॉस FY26 में ₹29,000 करोड़ तक पहुंच सकता है। घाटे का सबसे बड़ा हिस्सा एयर इंडिया से आ रहा है। वित्त वर्ष 2026 में इसका नुकसान ₹20,000 करोड़ तक पहुंच सकता है, जो पहले के अनुमान से कई गुना अधिक है।

₹29,000 करोड़ तक पहुंच सकता है टाटा का घाटा, नए बिजनेस डूबो रहे लुटिया

टाटा संस के नए कारोबारों में बढ़ते घाटे ने ग्रुप के अंदर चिंता बढ़ा दी है। आंतरिक अनुमानों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में इन बजनेसों का कुल घाटा करीब ₹29,000 करोड़ तक पहुंच सकता है, जो पहले के अनुमान ₹5,700 करोड़ से बहुत ज्यादा है। यह बढ़ता नुकसान अब समूह की रणनीति और निवेश फैसलों पर सवाल खड़े कर रहा है।

9 महीनों में ही ₹21,700 करोड़ पार

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में ही कुल घाटा ₹21,700 करोड़ तक पहुंच चुका है, जबकि पूरे वित्त वर्ष 2025 में यह ₹16,550 करोड़ था। इससे साफ है कि नुकसान का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। इस बढ़ते घाटे में सबसे बड़ा हाथ एयर इंडिया, टाटा डिजिटल, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स और तेजस नेटवर्क जैसे नए बिजनेस से आ रहा है।

नोएल टाटा की चिंता, बोर्ड स्तर पर बढ़ा दबाव

नोएल टाटा ने इन नए प्रोजेक्ट्स के बढ़ते घाटे को लेकर गंभीर चिंता जताई है। यही कारण रहा कि फरवरी में हुई बोर्ड बैठक में चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को मंजूरी देने का फैसला टाल दिया गया। अब उम्मीद है कि जून की बैठक में घाटा कम करने की ठोस रणनीति पेश की जाएगी।

टाटा डिजिटल बना सबसे बड़ी चिंता

टाटा ग्रुप का डिजिटल कारोबार, जिसमें बिग बॉस्केट, Tata 1mg, क्रोमा और टाटा क्लिक जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं, अभी तक फायदे में नहीं आ पाया है। FY26 में इस यूनिट का घाटा ₹5,000 करोड़ से ज्यादा रहने का अनुमान है, जबकि 9 महीनों में ही ₹3,750 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर ग्रोथ, लीडरशिप में बदलाव और प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले धीमी रणनीति इसके पीछे मुख्य कारण हैं।

एयर इंडिया पर सबसे बड़ा बोझ

घाटे का सबसे बड़ा हिस्सा एयर इंडिया से आ रहा है। वित्त वर्ष 2026 में इसका नुकसान ₹20,000 करोड़ तक पहुंच सकता है, जो पहले के अनुमान से कई गुना अधिक है। तेल की ऊंची कीमतें, पाकिस्तान एयरस्पेस का बंद होना और ग्लोबल टेंशन जैसे बाहरी कारणों ने कंपनी की लागत बढ़ा दी है। हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सेवा सुधार की गति अभी भी अपेक्षा से धीमी है।

अन्य बिजनेस भी दबाव में

टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के सेमीकंडक्टर कारोबार में FY26 में करीब ₹3,000 करोड़ के घाटे का अनुमान है। वहीं तेजस नेटवर्क्स, जो FY25 में मुनाफे में थी, अब FY26 में ₹1,000 करोड़ के नुकसान में जा सकती है। यह दिखाता है कि समूह के कई नए निवेश अभी शुरुआती चरण में हैं और उन्हें स्थिर होने में समय लगेगा।

क्या है आगे की चुनौती?

टाटा ग्रुप के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब इन नए व्यवसायों को मुनाफे की राह पर लाना है। लगातार बढ़ता घाटा निवेशकों और बोर्ड दोनों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर जल्द ही रणनीतिक बदलाव नहीं किए गए, तो यह घाटा आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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