टाटा की कंपनी को बड़ी कामयाबी, जोरावर लाइट टैंक प्रोजेक्ट के लिए हुई शार्टलिस्ट
मुख्य बातें
- प्रोजेक्ट जोरावर लाइट टैंक में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स ने 4 दूसरी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है
- यह प्रोजेक्ट करीब 20,000 करोड़ रुपये का है
- कंपनी को अब 130 हफ्तों में 3 प्रोटोटाइप तैयार करने हैं

टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) नेक्स्ट-जेनरेशन लाइट बैटल टैंक डिवेलप करने से जुड़े डिफेंस मिनिस्ट्री के एक कॉन्टेस्ट में सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी है। इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स ने 4 दूसरी कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है। यह प्रोजेक्ट करीब 20,000 करोड़ रुपये का है। इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों के हवाले से यह बात इकनॉमिक टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कही है।
आर्मी के प्रोजेक्ट जोरावर के क्या हैं डीटेल्स
इंडियन आर्मी के प्रोजेक्ट जोरावर में पहली बार कोई बैटल टैंक पूरी तरह से प्राइवेट सेक्टर बनाएगा। इसमें एक नया ऑर्मर्ड फाइटिंग व्हीकल-इंडियन लाइट टैंक (AFV-ILT) डिवेलप करना शामिल है, जो कि दलदली जगहों और रेगिस्तान के अलावा हाई-एल्टिट्यूड्स में भी ऑपरेट करने में सक्षम हो। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि डिफेंस मिनिस्ट्री ने 3 साल के सेलेक्शन प्रोसेस के बाद टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) को शॉर्टलिस्ट किया है, जिसमें टेक्निकल और कमर्शियल बिड्स का इवैल्यूएशन शामिल है।
130 हफ्तों के भीतर डिवेलप करने होंगे 2 प्रोटोटाइप टैंक
अगले चरण में टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) को 130 हफ्तों के भीतर 2 प्रोटोटाइप टैंक्स डिवेलप करने का काम दिाय गया है। यह प्रोजेक्ट डिफेंस मिनिस्ट्री के मेक 1 पॉलिसी के तहत लागू किया गया है, जो कि प्रोजेक्ट डिवेलपमेंट के लिए 70 पर्सेंट गवर्नमेंट फंडिंग की इजाजत देता है। महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स, इस प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली दूसरी कंपनी रही है। महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स को भी प्रोटोटाइप डिवेलप करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
सेलेक्शन प्रोसेस पर एक कंपनी नेउठाए थे सवाल
टाटा ग्रुप की कंपनी टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) पिछले साल ही इस प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी थी, लेकिन एक प्रतिस्पर्धी कंपनी ने सेलेक्शन प्रोसेस पर ऑब्जेक्शंस उठाए थे। आर्मी और डिफेंस मिनिस्ट्री ने इन आपत्तियों की व्यापक जांच की और इन्हें वैध नहीं पाया और अब प्रोसेस प्रॉडक्शन ऑर्डर इश्यू करने के चरण की तरफ बढ़ गया है।


