चढ़ते बाजार में औंधेमुंह गिरा टाटा का यह शेयर, मोतीलाल ओसवाल ने दे दी बेचने की सलाह
मुख्य बातें
- Tata Elxsi Share Price: कंपनी ने तिमाही में 170.6 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 18.2 प्रतिशत अधिक है
- इसके बावजूद मोतीलाल ओसवाल ने टाटा एलेक्सी पर अपनी 'Sell' की सलाह जारी रखी है और उसका टार्गेट प्राइस 3,100 रुपये तय किया है

शेयर मार्केट में तेजी के बीच टाटा ग्रुप की एक कंपनी का शेयर आज बुरी तरह पिट रहा है। टाटा एलेक्सी के शेयरों में बुधवार को करीब 6 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली और यह 3,474 रुपये के निचले स्तर पर आ गए। यह गिरावट कंपनी के जून तिमाही के नतीजों के बाद आई है। कंपनी ने पहली तिमाही में 170.6 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 18.2 प्रतिशत अधिक है। कंपनी की ऑपरेशनल इनकम में भी 14.5 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी हुई है और यह 1,021.1 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। तिमाही आधार पर आय में 2.8 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।
तिमाही के प्रमुख वित्तीय आंकड़े
कंपनी का टैक्स से पहले मुनाफा इस पहली तिमाही में 232.5 करोड़ रुपये रहा, जो एक साल पहले के मुकाबले 18.4 प्रतिशत अधिक है। टैक्स से पहले मुनाफे का मार्जिन 21.9 प्रतिशत रहा। कंपनी का परिचालन प्रदर्शन भी मजबूत रहा है और उसका EBITDA 15.7 प्रतिशत बढ़कर 216 करोड़ रुपये हो गया है। कंपनी का EBITDA मार्जिन 21.2 प्रतिशत और शुद्ध लाभ मार्जिन 16.1 प्रतिशत रहा है।
मोतीलाल ओसवाल ने टार्गेट प्राइस भी घटाया
मोतीलाल ओसवाल ने टाटा एलेक्सी पर अपनी 'Sell' की सलाह जारी रखी है और उसका लक्ष्य मूल्य 3,100 रुपये तय किया है, जो मौजूदा स्तरों से करीब 16 प्रतिशत की गिरावट का संकेत देता है। ब्रोकरेज का कहना है कि कंपनी के जून तिमाही के प्रदर्शन से उसके विकास की व्यापक तस्वीर में कोई खास बदलाव नहीं आया है।
रेवेन्यू में तिमाही आधार पर 1.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो उम्मीदों के अनुरूप तो है, लेकिन यह वृद्धि ज्यादातर मीडिया और टेलीकॉम सेक्टर से आई है। कंपनी के कुल रेवेन्यू में करीब 55 प्रतिशत का योगदान देने वाला ट्रांसपोर्ट बिजनेस और हेल्थ सर्विस सेक्टर अभी भी कमजोर बने हुए हैं।
मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि टाटा एलेक्सी के ग्रोथ में सार्थक सुधार के लिए परिवहन क्षेत्र में सुधार जरूरी है, जहां ग्राहकों का खर्च, खासकर यूरोप में, सतर्क बना हुआ है। ब्रोकरेज ने यह भी बताया कि कंपनी के मार्जिन उम्मीदों से काफी कम रहे हैं। टाटा एलेक्सी का EBIT मार्जिन घटकर 19 प्रतिशत पर आ गया है, जबकि ब्रोकरेज का अनुमान 21.5 प्रतिशत था।
चॉइस इंस्टीट्यूशनल ने भी दी बेचने की सलाह
चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने भी टाटा एलेक्सी को 'बेचें' में डाउनग्रेड कर दिया है और उसका टार्गेट प्राइस 3,650 रुपये से घटाकर 3,150 रुपये कर दिया है। इसने वित्त वर्ष 2027 और 2028 के अपने अनुमानों को क्रमशः 2.7 प्रतिशत और 6.0 प्रतिशत कम कर दिया है।
ब्रोकरेज के अनुसार, कंपनी का पहली तिमाही का प्रदर्शन उम्मीदों से कमजोर रहा, जिसमें मार्जिन परियोजना लागत में वृद्धि और जारी रणनीतिक निवेशों से प्रभावित हुए हैं, भले ही परिवहन और मीडिया एवं टेलीकॉम सेक्टर में हेल्दी ग्रोथ देखी गई हो। ब्रोकरेज ने यह भी बताया कि टाटा एलेक्सी अपनी एआई क्षमताओं, प्लेटफार्मों और प्रतिभा में निवेश तेज कर रही है ताकि अपनी 'डोमेन-प्लस-एआई' पेशकश को मजबूत किया जा सके।
(डिस्क्लेमर: एक्सपर्ट्स की सिफारिशें, सुझाव, विचार और राय उनके अपने हैं, लाइव हिन्दुस्तान के नहीं। शेयर मार्केट में निवेश जोखिमों के अधीन है और निवेश से पहले अपने एडवाइजर से परामर्श कर लें।)
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Drigraj Madheshiaदृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें


