
डिलीवरी बॉय से कैब ड्राइवर तक, गिग वर्कर्स के लिए कंपनियों को करना होगा ये काम
सरकार ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक फैसले में चार श्रम संहिताओं को तत्काल प्रभाव से लागू करने की घोषणा की। इनके जरिये 29 मौजूदा श्रम कानूनों को तर्कसंगत बनाया गया है। इसमें गिग वर्कर्स के लिए कई अहम ऐलान हुए हैं।
देश में नए लेबर लॉ आज यानी 21 नवंबर 2025 से लागू हो गए हैं। इसके लागू होने से कर्मचारियों को कई बड़ी सुविधाएं मिलने वाली हैं। इसके तहत गिग वर्कर्स के लिए भी कुछ अहम ऐलान हुए हैं। गिग वर्कर्स में फ्रीलांसर, डिलीवरी बॉय और कैब ड्राइवर्स आते हैं। नए लेबर लॉ के लागू होने से स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट और जेप्टो जैसी ऑनलाइन फूड डिलीवरी, ई-कॉमर्स और क्विक-कॉमर्स कंपनियों सहित कई अन्य कंपनियों को अब अपने वार्षिक कारोबार का 2% तक गिग और प्लेटफॉर्म कर्मचारियों के लिए आवंटित करना होगा।
पहली बार गिग वर्कर्स के लिए हुआ ये काम
बता दें कि सरकार ने पहली बार कानूनों में गिग वर्कर्स, प्लेटफॉर्म वर्कर्स और एग्रीगेटर्स की परिभाषा जोड़ते हुए स्पष्ट किया है कि ये श्रमिक देश के औपचारिक आर्थिक ढांचे का हिस्सा हैं। नए श्रम संहिताओं के तहत सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 को लागू करते हुए मंत्रालय ने घोषणा की कि सभी गिग तथा प्लेटफॉर्म वर्कर्स को अब पीएफ, ईएसआईसी, बीमा और अन्य सुरक्षा लाभों का अधिकार होगा। इससे पहले यह लाभ केवल संगठित क्षेत्र तक सीमित थे, जिसके कारण देश के 80% से अधिक श्रमिक ऐसे थे जिन्हें सामाजिक सुरक्षा का कोई लाभ नहीं मिलता था।
कंपनियां क्या करेंगी?
नए लेबर लॉ के अनुसार, गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को रोजगार देने वाली एग्रीगेटर कंपनियों को अपने वार्षिक कारोबार का 1-2% श्रमिकों को देने की आवश्यकता नहीं होगी। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने यह भी बताया कि कंपनियों द्वारा इन श्रमिकों को देय राशि में से गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों के लिए आवंटन की ऊपरी सीमा 5% होगी। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने अपनी आधिकारिक घोषणा में कहा- एग्रीगेटर्स को वार्षिक टर्नओवर का 1-2% योगदान देना होगा, जो गिग और प्लेटफॉर्म श्रमिकों को भुगतान/देय राशि के 5% तक सीमित होगा।
यूनिवर्सल अकाउंट नंबर का ऐलान
सरकार ने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) की भी घोषणा की है, जो आधार से जुड़ा होगा और देशभर में पूरी तरह पोर्टेबल रहेगा। इसका लाभ यह होगा कि अगर कोई गिग वर्कर दिल्ली से मुंबई या किसी भी अन्य राज्य में नौकरी बदलता है, तब भी उसका सामाजिक सुरक्षा खाता सक्रिय रहेगा और उसमें जमा राशि सुरक्षित रहेगी। इससे उन लाखों श्रमिकों को बड़ी राहत मिलेगी जो बार-बार काम बदलते हैं या अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर काम करते हैं।





