
सुजलॉन के शेयर पर सोमवार को रहेगी नजर, कंपनी से जुड़े हैं ये बड़े अपडेट
हाल ही में सुजलॉन ने गुजरात राज्य कर अधिकारियों के एक आदेश की जानकारी दी। यह मामला सूजलॉन की पूरी तरह स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Suzlon Global Services Limited से जुड़ा था, जो अब मुख्य कंपनी में विलय हो चुकी है।
Suzlon energy share price: शेयर बाजार में सोमवार को ट्रेडिंग के दौरान सुजलॉन एनर्जी के शेयर पर निवेशकों की नजर रहेगी। दरअसल, कंपनी से जुड़े कुछ अपडेट हैं। यही वजह है कि सोमवार को शेयर में हलचल की उम्मीद है। सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को इस दिग्गज कंपनी के शेयर बंद हुए और बीएसई पर 1.77% की बढ़त के साथ 51.75 रुपये पर बंद हुए जबकि पिछली बार यह 50.85 रुपये पर बंद हुआ था। सुजलॉन के शेयर के 52 हफ्ते का हाई 74.30 रुपये है। शेयर के 52 हफ्ते का लो 46 रुपये है।
क्या है अपडेट?
हाल ही में सुजलॉन ने गुजरात राज्य कर अधिकारियों के एक आदेश की जानकारी दी। यह मामला सूजलॉन की पूरी तरह स्वामित्व वाली सहायक कंपनी Suzlon Global Services Limited से जुड़ा था, जो अब मुख्य कंपनी में विलय हो चुकी है। कर अधिकारियों ने ई-वे बिल प्रावधानों के उल्लंघन को लेकर पहले भारी जुर्माना लगाया था। हालांकि कंपनी की अपील पर सुनवाई करते हुए गांधीडहम के डिप्टी कमिश्नर ऑफ स्टेट टैक्स (अपील) ने कंपनी की दलीलें स्वीकार कर लीं। अब जुर्माने की राशि घटाकर केवल ₹50,000 कर दी गई है।
सुजलॉन ने बताया कि वह अपनी उत्पादन क्षमता को बढ़ाने और भविष्य की मांग को पूरा करने के लिए तीन नए AI-इनेबल्ड स्मार्ट-ब्लेड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित करने जा रही है। ये नए स्मार्ट यूनिट्स न सिर्फ उत्पादन प्रक्रिया को अधिक आधुनिक और कुशल बनाएंगे बल्कि सुजलॉन की मौजूदा सुविधाओं को अपग्रेड करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। हाल ही में कंपनी ने केंद्रीय भूजल प्राधिकरण से जुड़ी एक नियामक चूक का खुलासा किया। सुजलॉन ने भूजल के उपयोग के लिए एनओसी प्राप्त करने हेतु आवेदन देर से जमा करने के लिए 1 लाख रुपये का जुर्माना अदा किया है।
सुजलॉन समूह के अधिकारी ने क्या कहा?
सुजलॉन समूह के उपाध्यक्ष गिरीश तांती का अनुमान है कि सरकार 40 गीगावॉट से अधिक बिना कॉन्ट्रैक्ट वाली रिन्यूएबल एनर्जी कैपिसिटी को स्थिर और प्रेषणीय नवीकरणीय ऊर्जा (एफडीआरई) विकल्प में परिवर्तित कर सकती है क्योंकि यह विकल्प साधारण सौर और पवन परियोजनाओं की तुलना में अधिक भरोसेमंद है।
सरकारी दस्तावेजों के अनुसार लगभग 45.34 गीगावॉट क्षमता के लिए विद्युत खरीद समझौते (पीपीए) पर अब तक हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। सरकार इन परियोजनाओं के लिए समाधान खोजने में सक्रिय है। निविदा के विजेता वितरण कंपनियों के साथ समझौता करने का प्रयास कर रहे हैं।





