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टाइगर ग्लोबल को SC से झटका, वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट अधिग्रहण डील पर देना होगा टैक्स

टाइगर ग्लोबल को SC से झटका, वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट अधिग्रहण डील पर देना होगा टैक्स

संक्षेप:

बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने एक आदेश में मॉरीशस स्थित प्राइवेट इक्विटी फर्म टाइगर ग्लोबल इंटरनेशनल III होल्डिंग्स और उसकी सहयोगी इकाइयों को वर्ष 2018 में फ्लिपकार्ट में हिस्सेदारी बिक्री पर कैपिटल गेन टैक्स से छूट दी थी। यह बिक्री अमेरिकी रिटेल दिग्गज वॉलमार्ट को की गई थी। 

Jan 15, 2026 05:36 pm ISTDeepak Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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Walmart-Flipkart deal: दिग्गज निवेश कंपनी- टाइगर ग्लोबल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसले में कहा कि 2018 में वॉलमार्ट-फ्लिपकार्ट अधिग्रहण डील के समय टाइगर ग्लोबल द्वारा फ्लिपकार्ट में 1.6 अरब डॉलर के शेयर बेचे जाने पर टैक्स लगेगा। इसे कंपनियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय टैक्स संधियों के इस्तेमाल को लेकर एक ऐतिहासिक फैसले के तौर पर देखा जा रहा है।

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बता दें कि दिल्ली हाईकोर्ट ने एक आदेश में मॉरीशस स्थित प्राइवेट इक्विटी फर्म टाइगर ग्लोबल इंटरनेशनल III होल्डिंग्स और उसकी सहयोगी इकाइयों को वर्ष 2018 में फ्लिपकार्ट में हिस्सेदारी बिक्री पर कैपिटल गेन टैक्स से छूट दी थी। यह बिक्री अमेरिकी रिटेल दिग्गज वॉलमार्ट को की गई थी। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश को पलट दिया है।

क्या है मामला?

यह मामला 2018 में तब शुरू हुआ जब टाइगर ग्लोबल ने फ्लिपकार्ट सिंगापुर में अपनी हिस्सेदारी वॉलमार्ट से जुड़े एक विदेशी निवेशक को बेची। फ्लिपकार्ट सिंगापुर, फ्लिपकार्ट इंडिया की होल्डिंग कंपनी थी। टाइगर ग्लोबल की मॉरीशस स्थित इकाइयों ने फ्लिपकार्ट इंडिया के शेयर सीधे नहीं बेचे बल्कि फ्लिपकार्ट सिंगापुर के शेयर बेचे, जिसे इंडायरेक्ट ट्रांसफर माना गया। इसी आधार पर टैक्स नहीं चुकाया गया। हालांकि, आयकर विभाग ने इसे टैक्स बचाने की योजना बताते हुए चुनौती दी। टैक्स विभाग ने ₹14,500 करोड़ (करीब 1.7 अरब डॉलर) की टैक्स मांग की और इसके साथ ही मॉरीशस से मिले टैक्स रेजिडेंसी सर्टिफिकेट (TRC) को भी नजरअंदाज कर दिया। इससे विदेशी निवेशकों के बीच TRC की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हुए हैं।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

3one4 कैपिटल के को-फाउंडर सिद्धार्थ पाई ने कहा- इस फैसले के बाद अब टैक्स डिपार्टमेंट मॉरीशस-बेस्ड कंपनियों के एग्जिट की बारीकी से जांच करेगा। जबकि कई फंड मैनेजर सिंगापुर, अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) या GIFT IFSC में चले गए हैं, मॉरीशस में पिछली मौजूदगी के कारण निवेशकों और सलाहकारों को अपने टैक्स रिस्क की दोबारा जांच करनी होगी और प्रावधान करने होंगे।

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दीपक कुमार, हिन्दुस्तान डिजिटल में बिजनेस की खबरें लिखते हैं। वह स्टॉक मार्केट, यूटिलिटी समेत बिजनेस सेक्शन से जुड़ी हर खबरों की ना सिर्फ समझ रखते हैं, बल्कि आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। दीपक की बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी जबरदस्त पकड़ है। उन्हें बेहतरीन काम की सराहना मिलती रही है और सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से सीवान (बिहार) के रहने वाले दीपक के पास करीब 11 साल का अनुभव है। करियर की बात करें तो अमर उजाला से शुरू हुआ सफर दैनिक भास्कर,आजतक, इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप होते हुए हिन्दुस्तान डिजिटल तक पहुंच चुका है। फिलहाल, वह हिन्दुस्तान डिजिटल में बतौर असिस्टेंट न्यूज एडिटर कार्यरत हैं। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। वहीं, पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए हिमाचल यूनिवर्सिटी चले गए। दीपक सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहते हैं। उन्हें नई-नई तकनीक से रूबरू होना अच्छा लगता है। खाली वक्त में फिल्में देखना या क्रिकेट खेलना पसंद करते हैं। और पढ़ें
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