चीनी की कीमतों में उबाल, त्योहारी सीजन के बीच ₹70 किलो पहुंचा भाव

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मुख्य बातें

  • त्योहारी सीजन के बीच चीनी की कीमतें सातवें आसमान पर हैं
  • पिछले एक महीने में चीनी के दाम में 20 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है
  • अभी कई जगह चीनी 70 रुपये प्रति किलो पर बिक रहा है

चीनी के दाम बढ़े
चीनी के दाम में बेतहाशा बढ़ोतरी

Sugar price: त्योहारी सीजन के बीच चीनी की कीमतें सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं। पश्चिम बंगाल के खुदरा बाजार में तो चीनी के दाम बढ़कर 70 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गए हैं। बता दें कि चीनी की कीमतों को कंट्रोल करने के लिए केंद्र सरकार अब तक कई बड़े कदम उठा चुकी है।

एक महीने में 20 रुपये महंगा

पश्चिम बंगाल के कारोबारियों ने बताया कि पिछले एक महीने में चीनी के दाम में 20 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, सिर्फ पिछले चार-पांच दिन में ही कीमतों में अचानक 10 प्रतिशत का उछाल आया है। चीनी से बने उत्पादों जैसे गुड़, बताशा और नकुलदाना के दाम में भी इसी तरह की बढ़ोतरी हुई है। कन्फेडरेशन ऑफ वेस्ट बंगाल ट्रेड एसोसिएशन (सीडब्ल्यूबीटीए) के अध्यक्ष सुशील पोद्दार ने कहा कि चीनी मिलों पर कोई नियंत्रण नहीं है और थोक कीमतें पहले ही 65 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई हैं।

पोद्दार ने कहा, ''चीनी मिलों पर कोई नियंत्रण नहीं है। थोक कीमतें पहले ही बढ़कर 65 रुपये किलोग्राम हो गई हैं और खुदरा कीमतें करीब 70 रुपये किलोग्राम तक पहुंच जाएंगी। एथनॉल के लिए चीनी का इस्तेमाल बढ़ना इसकी प्रमुख वजहों में से एक है। इसके अलावा, एथनॉल का अधिक मात्रा में मिश्रण से अब वाहनों को भी नुकसान पहुंचा रहा है।'' उन्होंने कहा, ''सितंबर से नवंबर के बीच त्योहारी सीजन से पहले चीनी की कीमतों में अचानक हुई बढ़ोतरी चिंता का विषय है। सरकार द्वारा 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति देना कीमतों में वृद्धि रोकने के लिए पर्याप्त नहीं होगा और अधिक हस्तक्षेप की जरूरत है।'' उन्होंने कहा कि 10 लाख टन चीनी देश की करीब दो सप्ताह की मांग के बराबर ही है।

भंडार का इस्तेमाल कर रहे चीनी मिल?

हालांकि, एक प्रमुख चीनी मिल कंपनी के अधिकारी ने कहा कि चीनी की पेराई अप्रैल में खत्म हो गई थी और मिलें अब केवल अपने भंडार से चीनी जारी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस समय मिलें इससे अधिक कुछ नहीं कर सकतीं। वहीं, पश्चिम बंगाल के मंत्री दिलीप घोष ने चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के लिए एथनॉल मिश्रण को नहीं बल्कि जमाखोरी को जिम्मेदार ठहराया।

सरकार के फैसले

बता दें कि केंद्र सरकार ने चीनी मिलों को 10 लाख टन कच्ची चीनी आयात करने की अनुमति दी है। करीब एक दशक बाद इस तरह का कदम उठाया गया है। सरकार ने उन थोक खरीदारों पर भी भंडार सीमा लगा दी है जो महीने में 10 टन से अधिक चीनी की खपत करते हैं। उनके पास 15 दिन की खपत के बराबर ही चीनी का भंडार रखने की सीमा तय की गई है।

Deepak Kumar

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हिन्दुस्तान डिजिटल में करीब 5 साल से कार्यरत दीपक कुमार यहां बिजनेस की खबरें लिखते हैं। दीपक को स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस के अलावा बिजनेस से जुड़े तमाम विषयों की गहरी समझ है। वह जटिल आर्थिक और कारोबारी मुद्दों को सरल, संतुलित और आम बोलचाल की भाषा में पाठकों तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं। उनकी बिजनेस सेक्शन के अलावा एंटरटेनमेंट, स्पोर्ट्स और पॉलिटिक्स से जुड़ी खबरों पर भी मजबूत पकड़ है। दीपक को उनके बेहतरीन काम के लिए विभिन्न स्तरों पर सम्मानित भी किया जा चुका है। मूल रूप से बिहार के सीवान जिले से ताल्लुक रखने वाले दीपक के पास पत्रकारिता का करीब 13 साल का अनुभव है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला से की। इसके बाद दैनिक भास्कर, आजतक और इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम किया। इसका अगला पड़ाव हिन्दुस्तान डिजिटल था, जहां वह वर्तमान में असिस्टेंट न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं। दीपक ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन की पढ़ाई की जबकि हिमाचल प्रदेश सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएट हुए हैं। जहां एक तरफ वह सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं तो वहीं नई तकनीकों से खुद को अपडेट रखते हैं। खाली समय में फिल्में देखना, खाना बनाना और क्रिकेट खेलना पसंद है।

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