चीनी के दाम ₹51 किलो तक आ गए, दिखने लगा सरकार की सख्ती का असर

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मुख्य बातें

  •  4 दिन में खुदरा बाजार में चीनी 8 रुपये प्रति किलो तक सस्ती हुई है
  • सरकार का मानना था कि घरेलू मांग पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध है, लेकिन मौसम की मार और जमाखोरी के कारण बाजार में कृत्रिम कमी और सट्टेबाजी का माहौल बना, जिससे कीमतें तेजी से बढ़ीं
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चीनी के दाम ₹51 किलो तक आ गए, दिखने लगा सरकार की सख्ती का असर

चीनी की बढ़ती कीमतों को काबू में करने के लिए सरकार की ओर से उठाए गए कई कदमों का असर अब बाजार में दिखाई देने लगा है। देश के कई हिस्सों में चीनी के भाव नरम हुए हैं। दक्षिण महाराष्ट्र में जहां चीनी का भाव करीब 62 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया था, वहीं अब महाराष्ट्र में मिल स्तर पर यह करीब 51-52 रुपये प्रति किलो में कारोबार कर रही है। कोलकाता में थोक भाव करीब 53 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है। कोलकाता पूर्वोत्तर राज्यों के लिए चीनी का प्रमुख आपूर्ति केंद्र है।

ChiniMandi के सूत्रों के मुताबिक, थोक और मिल स्तर पर आई इस नरमी का असर अगले 3-5 दिनों में खुदरा बाजार में भी दिखाई दे सकता है। इससे घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है।

रिटेल मार्केट में 8 रुपये तक सस्ती हुई चीनी

ChiniMandi के ताजा रेट्स के मुताबिक दिल्ली में बुधवार को चीनी 62 रुपये किलो बिकी। इसका हाई 68 रुपये था। वहीं, कानपुर में चीनी की कीमत अब 69 की जगह 62 रुपये पर आ गई है। मुंबई में चीनी का भाव अब 68 रुपये से घटकर 61 रुपये, गुवाहटी में 71 से घटकर 63, हैदराबाद में 70 से घटकर 62 और चेन्नई में 70 रुपये से घटकर 65 रुपये किलो रह गई।

चीनी के थोक भाव में बड़ी गिरावट

अगर होलसेल प्राइस की बात करें तो मुंबई में चीनी अपने हाई से 950 रुपये प्रति क्विंटल सस्ती हो चुकी है। मुंबई में चीनी 5800 रुपये पर आ गई है जबकि, 22 अगस्त को 6750 रुपये के ऑल टाइम हाई पर थी। दिल्ली में चीनी 6000 रुपये प्रति क्विंटल पर ही टिकी है। यह 6600 रुपये पर पहुंच गई थी। चार दिन में कानपुर में भी चीनी के दाम में भी 600 रुपये की बड़ी गिरावट है। यहां एक क्विंटल चीनी 6050 रुपये पर आ गई है।

सरकार ने क्या-क्या उठाए हैं कदम

स्टॉक लिमिट: कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़े उपभोक्ताओं और डीलरों के लिए स्टॉक रखने की सीमा तय की। इससे इनके पास जमा अतिरिक्त चीनी बाजार में आने लगी और उपलब्धता बढ़ी। सप्लाई सुधरने के साथ ही कीमतों पर दबाव कम हुआ है।

जमाखोरी पर छापेमारी: सरकार ने चीनी की जमाखोरी और स्टॉक छिपाने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी तेज कर दी है। देशभर में अब तक 1,000 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी या निरीक्षण किए जाने की बात सामने आई है।

इसके साथ ही चीनी मिलों को निर्देश दिया गया है कि अगस्त का निर्धारित कोटा जिन मिलों ने अभी तक बाजार में नहीं उतारा है, उसे जल्द से जल्द बेचें। इससे आने वाले दिनों में बाजार में चीनी की उपलब्धता और बढ़ सकती है।

ड्यूटी-फ्री आयात: सरकार ने 21 अगस्त को 10 लाख मीट्रिक टन चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी थी। सूत्रों के मुताबिक, निर्यातक देशों से करीब 70-80 हजार टन चीनी वाली 3-4 खेपें पहले ही रवाना हो चुकी हैं। इनके सितंबर के मध्य से अंत तक भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की उम्मीद है।

त्योहारों से पहले सरकार की नजर कीमतों पर

अगस्त के बचे हुए कोटे की चीनी बाजार में आने, आयातित चीनी की खेपों के पहुंचने और बंदरगाहों पर रिफाइन होने वाली चीनी की उपलब्धता बढ़ने से प्रमुख खपत वाले इलाकों में सप्लाई बेहतर होने की उम्मीद है।

खासकर त्योहारी सीजन को देखते हुए सरकार की कोशिश बाजार में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने की है। अगर ये सभी कदम उम्मीद के मुताबिक काम करते हैं, तो आने वाले हफ्तों में चीनी के भाव में और नरमी देखने को मिल सकती है।

Drigraj Madheshia

लेखक के बारे में

Drigraj Madheshia

दृगराज मद्धेशिया पिछले 21 वर्षों से पत्रकारिता जगत का एक विश्वसनीय चेहरा हैं। वर्तमान में 'लाइव हिन्दुस्तान' की बिजनेस टीम के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में, वे शेयर बाजार, कमोडिटी, पर्सनल फाइनेंस और यूटिलिटी सेक्टर पर अपनी गहरी पकड़ रखते हैं। वह कलम से बाजार की नब्ज टटोलने वाले एक पत्रकार हैं, जो शेयर बाजार से लेकर आपकी जेब (Personal Finance) तक, हर खबर को आसान बनाते हैं। टीवी, प्रिंट और डिजिटल मीडिया के अपने विस्तृत अनुभव के साथ, दृगराज जटिल मार्केट डेटा को आम पाठकों के लिए 'कुछ अलग' और आसान भाषा में पेश करने के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में हिन्दुस्तान, सहारा समय, दैनिक जागरण और न्यूज नेशन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। मूलत: उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के रहने वाले दृगराज मैथ्स बैकग्राउंड होने के कारण डेटा और कैलकुलेशन में माहिर हैं, जो बिजनेस पत्रकारिता के लिए एक बड़ा प्लस पॉइंट है। उन्होंने कॅरियर की शुरुआत गोरखपुर से सहारा समय साप्ताहिक से बतौर फ्रीलांसर की और बहुत ही जल्द सहारा समय उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड के हिस्सा बन गए। ​इसके बाद छत्तीसगढ़ में वॉच न्यूज से जुड़े। टीवी को छोड़ हिन्दुस्तान अखबार के बरेली एडिशन की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बने। साढ़े सात साल की मैराथन पारी के बाद अगला पड़ाव न्यूज नेशन डिजिटल रहा। इसके बाद एक बार फिर हिन्दुस्तान दिल्ली से जुड़े और अब डिजिटल टीम का हिस्सा हैं। और पढ़ें

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