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9 अप्रैल, 2020|3:33|IST

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एप से आंखमूंदकर लेन-देन में खाली हो सकता है आपका अकाउंट

डिजिटल लेन-देन ने बैंकिंग और खरीददारी को बेहद आसान कर दिया है। इसमें यूनीफाई पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) का बड़ा योगदान है। लेकिन इस सुविधा के साथ ही इससे होने वाली धोखाधड़ी के मामलों में भी तेजी से इजाफा हुआ है। ऐसे में यूपीआई के आधार पर काम करने वाले गूगल पे या फोन-पे सहित किसी भी एप से लेन-देन में बरती गई असावधानी कभी भी आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। आइए जानें एप के जरिये भुगतान में किन बातों का रखें ध्यान।

बातों में उलझाते हैं धोखेबाज
साइबर अपराधी व्यक्ति को सबसे पहले बातों में उलझाते हैं। इसके बाद व्यक्ति के यूपीआई एप पर रिक्वेस्ट भेजते हैं। बातचीत के दौरान जल्दबाजी में कई बार रिक्वेस्ट पढ़ने में गड़बड़ हो जाती है और साइबर अपराधी उसी का फायदा उठा लेते हैं। इसके तहत धोखेबाज यूपीआई एप के एक विकल्प रिक्वेस्ट मनी का सहारा लेते हैं। धोखेबाज आमतौर पर किसी उत्पाद को खरीदने में दिलचस्पी दिखाते हुए उत्पाद बेचने वाले को बातों में उलझाते हैं। इसके बाद वह व्यक्ति रिक्वेस्ट मनी विकल्प के जरिये  पैसा भेजने की बात कहते हैं। जैसे ही व्यक्ति रिक्वेस्ट स्वीकार करता है उसके खाते से उतनी राशि गायब हो जाती है।

ध्यान से पढ़ें एसएमएस
रिक्वेस्ट मनी विकल्प के तहत जो एसएमएस आता है उसमें यह स्पष्ट लिखा होता है कि आपके खाते से संबंधित राशि काट ली जाएगी या जमा कर दी जाएगी। धोखेबाज संबंधित व्यक्ति को इसीलिए बातों में उलझाते हैं कि वह एसएमएस को ध्यान से न पढ़ सके। आपको पैसा भेजने की बात कहकर दरअसल वह आपके खाते से पैसा लेने का एसएमएस भेजते हैं और जैसे ही आप रिक्वेस्ट स्वीकार करते हैं ठकी के शिकार हो जाते हैं। ऐसे में यूपीआई से लेन-देन में एसएमएस को ध्यान से पढ़ने के बाद ही फैसला करें।

पैसा लेने के लिए पिन की जरूरत नहीं
यूपीआई से जुड़े किसी भी एप में पैसा लेने के लिए पिन की जरूर नहीं होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यूपीआई एप में उपयोगकर्ता लेन-देन के दौरान सावधानी और चतुराई बरतना जरुरी है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब यूपीआई में पैसा लेने के लिए पिन जरुरत नहीं पड़ती है तो आपको अगर किसी ऐसे व्यक्ति से  रिक्वेस्ट मिलती है जिसे आप नहीं जानते हैं तो तत्काल ऐसी रिक्वेस्ट को अस्वीकार कर देना चाहिए।

अपनी जानकारी साझा न करें
यूपीआई से धोखाधड़ी कई तरह से हो सकती है। यदि उपयोगकर्ता  गलती से अपनी जानकारी किसी दूसरे के साथ साझा कर दे उसमें ठगे जाने की संभावना रहती है। वहीं किसी ऐप में कई ऐसे वायरस हो सकते हैं जो जरूरी जानकारी चोरी करके खुद लेन-देन कर सकता है। डिजिटल लेन-देन में इससे जुड़ी धोखाधड़ी के मामले भी काफी बढ़ रहे हैं।

इन बातों का रखें ध्यान
अपने बैंक खाता, यूपीआई पिन, ओटीपी की जानकारी किसी को न दें। इस बात को याद रखें कि कोई भी बैंक या संस्थान आपसे खाता की निजी जानकारी नहीं मांगता है। मोबाइल, टैब या लैपटॉप में अच्छे एंटीवायरस का इस्तेमाल करें। अनजाने एप डाउनलोड न करें और किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की पड़ताल जरूर करें।

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  • Web Title:Your Bank Account May Be Empty If You Are Using App For Digital Payments Transactions