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कर्मचारियों की मानसिक सेहत खराब कर रहा काम का बोझ

दुनिया में 20 फीसदी कर्मचारी बर्नआउट जैसी मानसिक परेशानी से जूझ रहे हैं।  30 देशों के 30 हजार कर्मचारियों पर किया गए सर्वे में यह बात निकल कर आई है।  18 से 24 साल के युवा बर्नआउट का ज्यादा शिकार।

कर्मचारियों की मानसिक सेहत खराब कर रहा काम का बोझ
Drigraj Madheshiaनई दिल्ली, एजेंसी।Tue, 05 Dec 2023 07:10 AM
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कार्यस्थल पर काम के बोझ के चलते कर्मचारियों को की मानसिक सेहत खराब हो रही है। अंतराष्ट्रीय स्तर पर हुए एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है। इसमें पाया गया कि दुनिया भर में औसत 20 फीसदी कर्मचारी बर्न आउट की शिकायत करते हैं। वहीं हमारे देश में ये आंकड़ा दुनिया भर के औसत से ज्यादा है।

18 से 24 साल के युवा बर्नआउट का ज्यादा शिकार: मैकिन्से स्वास्थ्य संस्थान की ओर से 30 देशों के 30 हजार कर्मचारियों को इस सर्वे में शामिल किया गया। सर्वे में ये भी पाया गया कि छोटी कंपनियों में काम करने वाले 18 से 24 साल के युवा बर्नआउट का ज्यादा शिकार हो रहे हैं। इसकी वजह से काम का भी नुकसान होता है और आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ सकता है।

क्या है बर्न आउट: अमेरिकी मनोवैज्ञानिक हर्बर्ट फ्रेउडेनबर्ग ने 1974 में ‘बर्नआउट’ शब्द का प्रयोग किया था। स्टाफ बर्नआउट नाम के एक रिसर्च पेपर में उन्होंने बताया था कि बर्नआउट ‘क्रॉनिक स्ट्रेस’ यानी लगातार रहने वाली तनाव की स्थिति है। अगर काम का तनाव लगातार बना रहे तो आगे चलकर ये बर्नआउट का रूप ले सकता है।

डब्ल्यूएचओ ने माना गंभीर बीमारी: बर्नआउट की गंभीरता को देखते हुए 2019 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे एक बीमारी का दर्जा दिया और इसे पहचानने के कुछ लक्षण भी बताए। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक बर्न आउट ऐसी स्थिति है, जो अचानक पैदा नहीं होती, बल्कि धीरे-धीरे बढ़ती है। रोजमर्रा का थोड़ा-थोड़ा स्ट्रेस आगे चलकर बर्नआउट का रूप ले लेता है।

बर्न आउट के लक्षण

  1. घबराहट बढ़ने लगे
  2. लगातार थकान बनी रहे
  3.  किसी काम में मन न लगे
  4. हर वक्त बेवजह उदासी महसूस करना

बचाएं खुद को बर्न आउट से

1. नकारात्मक सोच से बचें : नकारात्मक सोच की वजह से हमें लग सकता है कि आसपास के लोग हमारे काम को पसंद नहीं करते। इसकी वजह से आप अपने मन में ही स्ट्रेस के हालात बना लेते हैं। इस सोच से बचने और इसे बदलने की कोशिश करें।
2. फीडबैक को समझें : बर्न आउट से पीड़ित लोग स्ट्रेस फीडबैक को आलोचना की तरह लेते हैं। फीडबैक को वो अपनी असफलता का संकेत भी मान लेते हैं। लेकिन, यह अपने काम को बेहतर करने, सीखने और आगे बढ़ने का एक मौका है
3. समय का प्रबंधन ठीक से करें : वर्क लाइफ बैलेंस के लिए समय का प्रबंधन सबसे जरूरी है इसके जरिये आप अपने ऑफिस और निजी लाइफ को अलग रख सकते हैं। अपने लिए समय निकाल सकते हैं और समय पर काम खत्म करके दबाव भी कम कर सकते हैं।
4. लोगों के पसंदीदा विषय पर बातचीत करें : अगर आपके जीवन में सिर्फ ऑफिस या काम की ही बातें होंगी तो हो सकता है आप खुद को अकेला समझने लगें। इसलिए अपने दोस्तों या परिवार से बातें करें।

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