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30 अप्रैल, 2021|12:45|IST

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...तो इसलिए मोदी सरकार ने लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कटौती का फैसला 24 घंटे में ही वापस ले लिया

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लघु बचत योजनाओं में पश्चिम बंगाल का योगदान सबसे अधिक है। इस समय राज्य में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं, जिसकी चर्चा देशभर में है।   लघु बचत योजनाओं मसलन राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी) और भविष्य निधि (पीपीएफ) में प. बंगाल का योगदान करीब 90,000 करोड़ रुपये का है, जो सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में सबसे ऊंचा है। इन योजनाओं में राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के कुल योगदान में प. बंगाल का हिस्सा करीब 15 प्रतिशत है। 

69,660.70 करोड़ रुपये के योगदान के साथ दूसरे नंबर पर यूपी

आबादी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश इन योजनाओं में 69,660.70 करोड़ रुपये के योगदान के साथ दूसरे स्थान पर है। वित्त मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय बचत संस्थान द्वारा 2017-18 में जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार इन योजनाओं में सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों का योगदान 5.96 लाख करोड़ रुपये है। आखिरी बार 2017-18 में ही इन आंकड़ों का अद्यतन किया गया था। 

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सरकार ने बृहस्पतिवार को लघु बचत योजनाओं पर ब्याज में भारी कटौती के फैसले को वापस ले लिया था। एक दिन पहले ही ब्याज दरों में कटौती की घोषणा की गई थी।राष्ट्रीय बचत संस्थान के आंकड़ों के अनुसार पश्चिम बंगाल लघु बचत योजनाओं में संग्रहण में सबसे आगे है। पिछले कुछ साल से इन योजनाओं में राज्य का योगदान 12 से 15 प्रतिशत के बीच बना हुआ है। 

राष्ट्रीय बचत संस्थान वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग के तहत आता है।  जिन अन्य राज्यों में चुनाव हो रहे हैं उनमें असम का लघु बचत योजनाओं में हिस्सा 9,446.37 करोड़ रुपये, केरल का 14,763.01 करोड़ रुपये, पुडुचेरी का 1,082.40 करोड़ रुपये का तमिलनाडु का 28,598.18 करोड़ रुपये है। 

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  • Web Title:why Modi government withdrew the decision to cut interest rates of small savings schemes within 24 hours