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पेट्रोल और डीजल को GST के दायरे में लाने का विरोध क्यों कर रही महाराष्ट्र और केरल सरकार, जानें वजह 

लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्ली Published By: Tarun Singh
Fri, 17 Sep 2021 06:53 PM
पेट्रोल और डीजल को GST के दायरे में लाने का विरोध क्यों कर रही महाराष्ट्र और केरल सरकार, जानें वजह 

GST Council Meeting : क्या पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाना चाहिए? महाराष्ट्र सरकार के उपमुख्यमंत्री सह वित्त मंत्री अजीत पवार ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि राज्य सरकार ऐसे किसी कदम का समर्थन नहीं करेगी। जीएसटी काउंसिल की बैठक में हिस्सा नहीं ले रहे अजीत पवार ने पुणे में कहा कि मौजूदा सिस्टम में कोई फेरबदल नहीं करना चाहिए क्योंकि कोविड के कारण राज्यों की वित्तीय स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। हालांकि, उन्होंने केन्द्र सरकार से मांग की है टैक्स में कटौती हो जिससे लोगों को पेट्रोल और डीजल सस्ता मिल सके। बता दें, केरल सरकार ने भी पेट्रोल और डीजल को जीएसटी दायरे में लाने का विरोध किया है। 

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क्या कुछ कहा है अजीत पवार ने 

महाराष्ट्र सरकार के उपमुख्यमंत्री ने पुणे में कहा, 'मैंने जीएसटी काउंसिल को लिखित तौर पर अवगत करा दिया है कि VAT (Value Added Tax) को ही पेट्रोल और डीजल के लिए बरकार रखा जाए। उन्हें जीएसटी दायरे में नहीं लाना चाहिए।' उन्होंने कहा,'जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों के अतिरिक्त रेवन्यू सोर्स सीमित हो गए हैं, जिसकी वजह से विकास कार्य प्रभावित हुए हैं।'

केरल सरकार भी कर रही है विरोध

केरल ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह पेट्रोल और डीजल को माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने के किसी भी कदम का पुरजोर विरोध करेगा क्योंकि इससे राज्य के राजस्व संग्रह पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। राज्य ने कहा कि इसके बजाए केंद्र को आम लोगों को राहत देने के लिये ईंधन पर केंद्रीय करों को कम करना चाहिए।

केरल के वित्त मंत्री के एन बालागोपाल ने पीटीआई भाषा से कहा कि अगर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने को लेकर कोई कदम उठाया जाता है, राज्य उसका पुरजोर विरोध करेगा। बालागोपाल ने कहा कि अगर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है, राज्य को सालाना 8,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा।

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पेट्रोल-डीजल से बंपर कमाई

आंकड़ों की बात की जाए तो संसद के पिछले सत्र में पूछे गए सवाल के जवाब में वित्तमंत्रालय ने बताया है कि केंद्र जनवरी 2019 से जनवरी 2021 के दौरान तीन बार केंद्रीय कर बढ़ाए गए हैं। इस साल जुलाई तक अनब्रांडेड पेट्रोल पर 32.90 रुपए और अनब्रांडेड डीजल पर 31.80 रुपए प्रति लीटर उत्पाद शुल्क लग रहा है। साल 2015 के जुलाई महीने में पेट्रोल पर ये शुल्क 17.46 और डीजल पर 10.26 रुपए प्रति लीटर हुआ करता था। वहीं दिल्ली में इस पर 23.50 रुपए और डीजल पर 13.14 रुपए प्रति लीटर वैट वसूला जा रहा है। वैट की दरें सभी राज्यों में अलग है। केंद्र सरकार ने ये भी बताया है कि अप्रैल से जून 2021 के दौरान पेट्रोल, डीजल से 94,181 करोड़ रुपए का उत्पाद शुक्ल वसूला गया है। वहीं 2017-18 से 2020-21 के दौरान वसूले गए सकल राजस्व में पेट्रोलियम उत्पादों की भागेदारी 12 फीसदी रही है।

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