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महंगाई को लेकर मोदी सरकार और आरबीआई क्यों हैं 'हाई अलर्ट' पर

RBI on high alert for Inflation: आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में कहा है कि भले ही "मुद्रास्फीति दबाव" कम हो गया है, लेकिन इसका जोखिम बना रहेगा, जिससे सरकार और आरबीआई दोनों को चौकन्ना रहना चाहिए। 

महंगाई को लेकर मोदी सरकार और आरबीआई क्यों हैं 'हाई अलर्ट' पर
Drigraj Madheshiaएजेंसी,नई दिल्लीWed, 22 Nov 2023 05:45 AM
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महंगाई को लेकर मोदी सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया दोनों हाई अलर्ट पर हैं। वित्त मंत्रालय ने अपने अक्टूबर 2023 की आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में कहा है कि भले ही "मुद्रास्फीति दबाव" कम हो गया है, लेकिन इसका जोखिम बना रहेगा, जिससे सरकार और आरबीआई दोनों को चौकन्ना रहना चाहिए। 

मंत्रालय ने यह भी कहा कि मौद्रिक नीति का पूर्ण प्रसारण, जिसका अनिवार्य रूप से अर्थ केंद्रीय बैंक की दरों में बढ़ोतरी को बैंकों द्वारा उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है। यह घरेलू मांग को भी कम कर सकता है। मुद्रास्फीति के मोर्चे पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और मुख्य (कोर) मुद्रास्फीति में निरंतर नरमी से आगे चलकर मुद्रास्फीति के दबाव को नियंत्रित करने की संभावना है।

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इसमें कहा गया है कि इस प्रवृत्ति को पहचानते हुए आरबीआई ने यह भी संकेत दिया है कि मौद्रिक नीति में और सख्ती तब होगी जब उसका पूरा असर होने के करीब होगा और यदि जरूरत होगी।

महंगाई पर अभी तक काबू नहीं पाया है: आरबीआई

अक्टूबर में मुख्य खुदरा मुद्रास्फीति चार महीने के निचले स्तर 4.87 प्रतिशत पर आ गई थी। इसके बावजूद चिंता बनी हुई हैं। पिछले हफ्ते, आरबीआई ने अपने मासिक बुलेटिन में कहा था कि त्योहारी मांग "उत्साही" बनी हुई है और उपभोक्ता भावना "उत्साहित" है। भारत को "अभी मीलों चलना है" और मुद्रास्फीति पर "अभी तक काबू नहीं पाया है"।

बजटीय राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को प्राप्त करने की राह पर

वित्त मंत्रालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि केंद्र सरकार राजस्व संग्रह में उछाल और विवेकपूर्ण व्यय प्रबंधन द्वारा समर्थित चालू वित्तीय वर्ष के लिए बजटीय राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को प्राप्त करने की राह पर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कुल मिलाकर चालू वित्त वर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि दर अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले बेहतर रहने की उम्मीद है।

रिपोर्ट में सार्वजनिक वित्त की स्थिति के बारे में कहा गया है कि केंद्र सरकार चालू वित्त वर्ष में घाटे के तय लक्ष्य को हासिल करने के रास्ते पर है। इसका कारण राजस्व संग्रह लगातार बेहतर बना हुआ है और व्यय के स्तर पर सूझबूझ के साथ काम किया जा रहा है।

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