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18 सितम्बर, 2020|12:57|IST

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आरबीआई की मौद्रिक नीति से जानें किसको होगा कितना फायदा

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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम ( एमएसएमई)  सेक्टर को राहत देते हुए कर्ज पुनर्गठन (रिस्ट्रक्चरिंग) की अवधि बढ़ाकर 31 मार्च 2021 तक कर दी है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने गुरुवार को मौद्रिक समीक्षा जारी करते हुए कहा कि एमएसएमई के लिए कर्ज का पुनर्गठन पहले से ही मौजूद है। अब इसे बढ़ाया जा रहा है। इस योजना से बड़ी संख्या में एमएसएमई को फायदा मिला है। हालांकि, आरबीआई ने एमएसएमई को अपने लोन का पुनर्गठन करने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। 1 मार्च 2020 को उन पर बैंकों और एनबीएफसी (गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां) का कुल लोन 25 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं होना चाहिए। 1 मार्च 2020 को कर्जदार का खाता 'स्टैंडर्ड एसेट' होना चाहिए। पुर्नगठन लागू होने की डेट पर फर्म जीएसटी रजिस्टर्ड होनी चाहिए। हालांकि यह शर्त उन एमएसएमई पर लागू नहीं होगी जो जीएसटी-पंजीकरण से मुक्त हैं।

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गौरतलब है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले सप्ताह कहा था कि सरकार कोविड- 19 से प्रभावित उद्योग की मदद के लिए कर्ज के पुनर्गठन की आवश्यकता को लेकर रिजर्व बैंक के साथ मिलकर काम कर रही है। सीतारमण ने कहा था, ध्यान पुनर्गठन पर है। इस मुद्दे पर वित्त मंत्रालय रिजर्व बैंक के साथ सक्रियता से काम कर रहा है। सैद्धांतिक तौर पर इस बात पर गौर किया गया है कि पुनर्गठन की आवश्यकता पड़ सकती है, इस बात ध्यान दिया गया है। रिजर्व बैंक ने इससे पहले फरवरी में जीएसटी में पंजीकृत सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के मानक खातों में संपत्ति वर्गीकरण को नीचे किये बिना ही एकबारगी पुनर्गठन की सुविधा दी थी। यह सुविधा उन एमएसएमई को दी गई जो कि एक जनवरी 2020 को चूक में थे। यह कदम बजट घोषणा के अनुरूप उठाया गया था। दास ने कहा कि दबाव झेल रहे एमएसएमई कर्जदारों के खाते यदि मानक खातों के तौर पर वर्गीकृत हैं तो वह भी ऋण पुनर्गठन के पात्र होंगे। 

आधार पर कार्ड पर ऑफ-लाइन भुगतान की अनुमति मिलेगी

रिजर्व बैंक ने पायलट आधार पर ऑफ-लाइन यानी बिना इंटरनेट के कार्ड और मोबाइल के जरिये खुदरा भुगतान योजना की घोषणा की। इस पहल का मकसद उन जगहों पर भी डिजिटल लेन-देन के लिए ग्राहकों को प्रोत्साहित करना है, जहां इंटरनेट कनेक्टविवटी कमी है। इस पायलट योजना के तहत उपयोगकर्ताओं के हितों, देनदारी सुरक्षा आदि का ध्यान रखते हुए ऑफ-लाइन माध्यम से अंतर्निहित सुविधाओं के साथ छोटी राशि के भुगतान की अनुमति देने का प्रस्ताव है।

आरबीआई ने कहा, खासकर दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट का अभाव या उसकी कम गति डिजिटल भुगतान के रास्ते में बड़ी बाधा है। इसको देखते हुए कार्ड, वॉलेट और मोबाइल उपकरणों के माध्यम से ऑफलाइन भुगतान का विकल्प उपलब्ध कराया जा रहा है। उम्मीद है कि इससे डिजिटल भुगतान को और बढ़ावा मिलेगा। केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा कि 'पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर (पीएसओ) को ऑनलाइन विवाद समाधान (ओडीआर) लागू करना होगा। डिजिटल लेन-देन बढ़ने के साथ विवाद और शिकायतें भी बढ़ी हैं।

स्टार्टअप को प्राथमिक क्षेत्र में शामिल किया

रिजर्व बैंक ने प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत कर्ज का दायरा बढ़ाते हुए इसमें स्टार्टअप को भी शामिल किया। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के लिए कर्ज सीमा बढ़ाया गया है। केंद्रीय बैंक ने प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत कर्ज (पीएसएल) के तहत छोटे एवं सीमांत किसानों और कमजोर तबकों के लिये भी कर्ज सीमा बढ़ाने की घोषणा की।     पात्र इकाइयों को पीएसएल के तहत बैंकों से आसान शर्तों पर कर्ज मिल सकेगा। बैंकों को समायोजित शुद्ध बैंक कर्ज या ऑफ बैलेंस-शीट कर्ज ऋण समतुल्य राशि (दिया गया ऋण और भविष्य में दिया जाने वाले कर्ज का जोड़), जो भी अधिक हो, उसका 40 प्रतिशत प्राथमिक क्षेत्र को देना होता है। इसमें कृषि और सूक्ष्म उद्यम शामिल हैं। इससे पहले, आरबीआई ने पीएसएल दिशानिर्देश की समीक्षा अप्रैल, 2015 में की थी।

के.वी. कामथ की अध्यक्षता में समिति

रिजर्व बैंक ने के.वी. कामथ की अध्यक्षता में एक विशेषज्ञ समिति बनाई है जिसे समाधान प्रस्तावों के लिए आवश्यक वित्तीय पैरामीटरों पर अपने सुझाव देगी। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक के बाद गवर्नर शक्तिकांत दास ने यह घोषणा करते हुये कहा कि यह समिति एक निर्धारित ऋण की सीमा वाले खातों के लिए समाधान प्रस्तावों के वास्ते प्रक्रिया पर भी विचार करेगी। समिति को 30 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी होगी। यह समिति 1,500 करोड़ रुपये या उससे अधिक के ऋण खातों के समाधान के बारे में सिफारिशें करेगी। इस समिति का कायार्लय भारतीय बैंक संघ के कायार्लय में होगा लेकिन समिति के सारे व्यय रिजर्व बैंक वहन करेगा।

रियल एस्टेट सेक्टर को और मजबूती 

भारतीय रिजर्व बैंक ने राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) तथा राष्ट्रीय आवास बैंक (एनएचबी) के लिए पांच-पांच हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त विशेष तरलता सुविधा (एएसएलएफ) की घोषणा की है। यह राशि नाबार्ड और एनएचबी के बीच बराबर बांटी जाएगी। इस राशि का इस्तेमाल कोविड-19 संकट के बीच छोटी वित्त प्रदान करने वाली इकाइयों तथा आवास ऋण कंपनियों की मदद के लिए किया जाएगा। दास ने कहा कि एनएचबी को 5,000 करोड़ रुपये का एएसएलएफ दिया जाएगा, जिससे आवास क्षेत्र को नकदी संकट से बचाया जा सके तथा आवास वित्त कंपनियों (एचएफसी) के जरिये क्षेत्र को वित्त का प्रवाह बढ़ाया जा सके। अंतरिक्ष इंडिया के सीएमडी राकेश यादव ने कहा कि इस फैसले से लाखों घर खरीदारों को राहत मिलेगी। उनकों बैंकों से आसानी से कज मिलेगा। वहीं पहले से होम लोन लिए व्यक्ति को कर्ज पुनर्गठन करा कर अपनी ईएमआई कम करा पाएगा। 

कर्ज सस्ता होने की उम्मीद को झटका 

रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत दरों को यथावत रखने का निर्णय लिया। चालू वित्त वर्ष में समिति की तीन दिवसीय दूसरी बैठक के बाद गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि समिति ने बहुमत से यह निर्णय लिया है।  उन्होंने कहा कि रेपो दर को चार प्रतिशत, रिवर्स रेपो दर को 3.35 प्रतिशत, बैंक दर को 4.25 प्रतिशत और मार्जिनल स्टैंडिंग फैस्लीलिटी (एमएसएफ) को 4.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले से कर्ज सस्ता होने को झटका लगा है। 

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