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हिंदी न्यूज़ बिजनेस‘गिग वर्कर’ की हिस्सेदारी बढ़ी, लेकिन महिलाओं की संख्या काफी कम

‘गिग वर्कर’ की हिस्सेदारी बढ़ी, लेकिन महिलाओं की संख्या काफी कम

नई दिल्ली। हिन्दुस्तान ब्यूरोDrigraj Madheshia
Fri, 26 Nov 2021 01:57 PM
‘गिग वर्कर’ की हिस्सेदारी बढ़ी, लेकिन महिलाओं की संख्या काफी कम

कोरोना महामारी से राहत मिलने के बाद ‘गिग वर्कर’ की हिस्सेदारी भारतीय अर्थव्यवस्था में काफी तेजी से बढ़ी है। हालांकि, उस अनुपात में महिलाओं की हिस्सेदारी देखने को नहीं मिल रही है। भारतीय अर्थव्यवस्था में महिला गिग वर्कर की संख्या काफी कम है। जोमैटो, अरबन क्लैप, स्विगी, ओला, उबर जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने यह जानकारी दी है, जहां सबसे अधिक गिग वर्कर काम करते हैं।
स्विगी कंपनी की ओर से दी गई जानकारी में बताया गया है कि उसके पास गिग वर्कर की संख्या करीब 22 हजार है लेकिन उसमें महिलाआ वर्कर की संख्या सिर्फ 1000 है। वहीं जोमैटो के डिलिवरी पार्टनर में महिला कर्मियों की संख्या मात्र 0.5 फीसदी है।

कौन होते हैं गिग वर्कर

  • -स्वतंत्र रूप से ठेके पर काम करने वाले कर्मचारी
  • -ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए काम करने वाले कर्मचारी
  • -फूड डिलीवरी एप और एप के जरिये कैब सुविधा देने वाली कंपनी के कर्मचारी
  • -ठेका पर काम करने वाले कर्मचारी
  • -कॉल पर काम के लिए उपलब्ध कर्मचारी
  • -सभी तरह के अस्थायी कर्मचारी

कंपनियों ने अपनी नीतियों में बदलाव किया

गिग वर्कर में महिलाओं की संख्या बढ़ाने के लिए जून महीने में अपनी नीतियों में बदलाव भी किया है। कंपनियों ने महिलाओं की सहूलियत को ध्यान में रखकर कई कदम उठाए हैं। जोमैटो ने महिला गिग वर्कर के लिए सुरक्षा से संबंधित शिक्षा, संपर्क रहित डिलीवरी, अलग वॉशरूम, एसओएस बटन और समर्पित सहायता टीम शुरू की है। वहीं, स्विगी ने महिला डिलीवरी पार्टनर्स के लिए दो दिवसीय मासिक भुगतान शुरू की है। हालांकि, इन प्रयासो के बावजूद भी महिला गिग वर्कर की हिस्सेदारी उम्मीद के अनुरूप नहीं बढ़ी है।

कोरोना महामारी के अहमियत बढ़ी

कोरोना महामारी ने कंपनियों को खर्चे कम करने के लिए मजबूर किया है। बदलते हालात में कंपनियां स्थायी कर्मचारी रखने की जगह अस्थायी कर्मचारी यानी गिग वर्कर से काम करने पंसद कर रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना के बाद 70 फीसदी कंपनियों ने गिग वर्कर से लागत घटाने के लिए लिया काम लेने शुरू किया जो अब और ज्यादा जोर पकड़ने लगा है। इसके चलते सभी प्रमुख क्षेत्रों में गिग वर्कर की मांग तेजी से बढ़ी है। आर्थिक जानकारों का कहना है कि गिग अर्थव्यवस्था भारतीय अर्थव्यवस्था का छोटा हिस्सा है, पर इस क्षेत्र का लगातार विस्तार हो रहा है। यह हाल के दिनों में सबसे तेजी से बढ़ता क्षेत्र बन गया है।

क्या है गिग वर्कर

गिग वर्कर अस्थायी कर्मी होता है। उन्हें कई बार यह भी पता नहीं होता कि वे अगले दिन किस मालिक के साथ काम कर रहे होंगे या उन्हें काम मिलेगा भी या नहीं। दूसरे शब्दों में काम के बदले भुगतान के आधार पर रखे गए कर्मचारियों को गिग वर्कर कहा जाता है। गिग वर्कर्स के लिए काम के कोई समय तय नहीं होता है। यह गिग अर्थव्यवस्था का हिस्सा होते हैं। गिग अर्थव्यवस्था से आशय रोजगार की ऐसी व्यवस्था से है जहां स्थायी तौर पर कर्मचारियों को रखे जाने के बजाए अल्प अवधि के लिए अनुबंध पर रखा जाता है।

ऑनलाइन कंपनियों के लिए काफी महत्वपूर्ण

ऑनलाइन सामान बेचने वाली कंपनियों के लिए गिग वर्कर्स का रोल काफी महत्वपूर्ण है। अधिकांश कंपनियां ग्राहकों की सहूलियत के अनुसार सामान की डिलीवरी करती हैं। कई बार ग्राहक ऑफिस टाइम के बाद या सुबह-सुबह डिलीवरी मंगाते हैं। ऐसे में स्थायी वर्कर इसके लिए पूरी तरह से फिट नहीं बैठ पाते हैं। कंपनियां गिग वर्कर्स के जरिए ऐसा काम कराती हैं। गिग वर्कर के तौर पर काम करने वाले कर्मचारी और कंपनी के बीच एक समझौता होता है। इस समझौता के तहत कर्मचारी की कंपनी की कॉल पर काम करना होता है।

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