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अलर्ट:अगर डाउनलोड किया है ये एप तो तुरंत हटा दें, वर्ना खाली हो जाएगा बैंक अकाउंट

google chrome fraud (photo- Daily Express)

अगर किसी ने भी 'एनीडेस्क' नाम का एप डाउनलोड किया है तो उसे तुरंत अपने फोन या लैपटॉप से हटा दें। ऑनलाइन बैंकिंग बढ़ने के साथ धोखेबाज नए-नए तरीके ईजाद कर फर्जीवाड़ा को अंजाम दे रहे हैं। इन दिनों बैंकिंग फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए धोखेबाज फर्जी एप, हेल्पलाइन नंबर, सिम स्वैप आदि का सहारा ले रहे हैं। इसके साथ ही बैंकों के फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर भी ग्राहकों से अहम जानकारियां चुराकर पैसा निकालने की घटनाएं सामने आई हैं।

सामने आएं 72 मामले

पुलिस की क्राइम ब्रांच की साइबर सेल में 15 मई से अब तक एनी डेस्क एप के जरिए ठगी के 72 से अधिक मामले पहुंच चुके हैं। साइबर सेल के एक्सपर्ट ने बताया कि साइबर ठगों ने इन सभी मामलों में एक ही तरीका अपनाया है। वे अपने टारगेट को विश्वास में लेकर फोन में गूगल प्ले स्टोर से एनी डेस्क एप डाउनलोड कराते हैं। इस पर 9 अंकों का एक कोड जेनरेट होता है, जो ठग पूछ लेते हैं। यह कोड ठग अपने मोबाइल फोन में फीड करता है तो पीड़ित के मोबाइल या कंप्यूटर का कंट्रोल उसके पास चला जाता है। वह उसे एक्सेस करने की अनुमति भी पीड़ित से ले लेता है। इसके बाद फोन या कंप्यूटर का सभी डाटा चुरा लेता है। अब अगर आपके मोबाइल पर यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) एप है तो खाते की पूरी रकम उड़ा लेगा।

ऐसे लूटा जा रहा हैं बैंक अकाउंट 
सोशल मीडिया पर लोगों को 'एनीडेस्क' जैसे ऐप को डाउनलोड करने का विज्ञापन दिया जाता है।  मोबाइल पर ऐप डाउनलोड करने के बाद नौ अंकों का एक कोड आता है, जब आप कोड डालेंगे तो वह मोबाइल फोन पर परमिशन देने को कहेगा। इसके बाद उसे आपके मोबाइल का रिमोट एक्सेस मिलेगा। फिर वह आपके मोबाइल में मौजूद बैंक के ऐप से पैसे निकाल सकता है। 

दूसरे कंप्यूटर का मिल जाता है एक्सेस
दरअसल एनीडेस्क सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किसी भी कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस लेने के लिए होता है। उदाहरण के लिए यदि आपके लैपटॉप में एनीडेस्क सॉफ्टवेयर है और किसी अन्य के पास भी एनीडेस्क है तो दोनों यूजर्स एक दूसरे के सिस्टम को दूर बैठे कंट्रोल कर सकते हैं, हालांकि इसके लिए एक्सेस देना होता है।

ग्राहकों को किया आगाह
भारतीय स्टेट बैंक ने भी फ्रॉड के बढ़ते मामले को देखते हुए अपने 42 करोड़ से ज्यादा ग्राहकों को आगाह किया है। एसबीआई ने अपने ग्राहकों धोखाधड़ी से बचने के लिए सोशल मीडिया पर फेक अकाउंट में बचने को कहा है। बैंक ने अपने ग्राहकों से केवल एसबीआई के सत्यापित खाता और फिशियल हैंडल के टैग को फॉलो करने का सलाह दिया है। 

यूपीआई में भी फर्जीवाड़ा का खतरा 
भारतीय रिजर्व बैंक ने बैंकों को एक नए तरह की बैंक धोखाधड़ी के बारे में चेतावनी दी है, जिसमें यूपीआई के जरिए ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे उड़ाए जा सकते हैं। इसमें ग्राहकों को फर्जी लिंक के जरिए एक एप डाउनलोड करने को कहा जाता है, जो सारी संवेदनशील जानकारियां चुरा लेते हैं। 

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फर्जी एप से डाटा चोरी कर धोखाधड़ी 
बैंकिंग फ्रॉड करने वाले धोखेवाज इन दिनों फर्जी मोबाइल एप का सहारा लेकर धोखेधाड़ी को अंजाम दे रहे हैं। बैंकों के मूल एप से मिलते जुलते एप बनाकर वो गूगल प्ले-स्टोर पर डाल रहे हैं। अगर कोई ग्राहक गलती से वह एप डाइनलोड कर अपने मोबाइल पर इंस्टॉल कर ले रहा है तो उसके जरिए वो डाटा चोरी कर उसके खाते से पैसा निकाल रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, कई ऐसे भी एप हैं जो बैंकिंग करने में सुविधा मुहैया कराने के नाम पर डाटा चोरी कर रहे हैं। 

इस तरह पहचानें सही एप
किसी भी मोबाइल एप को गूगल प्ले-स्टोर से डाउनलोड करने से पहले उसके बारे में जांच करें कि उस ऐप को किसने तैयार किया है। अगर आप भारतीय स्टेट बैंक एप डाउनलोड करना है तो सबसे पहले एसबीआई गूगल प्ले-स्टोर पर सर्च करें। इसके बाद एसबीआई के ऐप पर क्लिक करें। उस पर क्लिक करें और उसके बाद ऑफर्ड वाई और डेवलपर वाई की जांच करें। अगर ऑफर्ड बाय में एसबीआई और डेवलपर में भी एसबीआई का नाम है तो ही एप को डाउनलोड करें अन्यथा नहीं। दूसरा तरीका है कि आप बैंक की वेबसाइट से सीधे एप डाउनलोड करने का लिंग प्राप्त कर सकते हैं। 

सिम स्वैप से एक झटके में खाली खाता 
बैंक खाते में फर्जीवाड़ा करने के लिए इन दिनों सिम स्वैप का भी इस्तेमाल भी हो रहा है। इसमें आपका जो माबाइल नंबर बैंक खाता से जुड़ा होता है वह वह अचानक बंद हो जाता है। असल में होता यह है कि आपके नाम से जो सिम होता है उसे हैकर स्वैप कर लेते हैं। फिर स्वैप किए गए सिम को क्लोन करके उसका नकली सिम बना लिया जाता है। फिर ओटीपी की मदद से खाते से चंद मिनटों में पैसे निकाले जाते हैं। सिम स्वैप के बारे में जागरूक करने के लिए आईसीआईसीआई बैंक ने अपने ग्राहकों को मेल भेज रहा है। 

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